धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

घोघा पूजा और प्रसाद वितरण के साथ सम्पन्न हुआ फूलदेई पर्व

– राजेश्वरी राणा –
पोखरी, 22 मार्च। उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक आठ दिवसीय पारंपरिक लोक पर्व ‘फूलदेई’ क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हो गया। पर्व का समापन घोघा पूजा, प्रसाद वितरण और सामूहिक भोजन के साथ हुआ। पूरे आयोजन के दौरान गांवों में बच्चों की चहल-पहल और पारंपरिक लोकगीतों की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
चैत्र संक्रांति से आरंभ होने वाला यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश देता है। यह पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे, सौहार्द, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। आठ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में गांवों के नौनिहाल सुबह-सुबह रिंगाल की टोकरियों में फ्यूंली, बुरांश और अन्य रंग-बिरंगे सुगंधित फूल सजाकर घर-घर जाते हैं। वे प्रत्येक घर की देहरी पर फूल बिखेरते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
ग्रामीण भी इस परंपरा को पूरे उत्साह से निभाते हुए बच्चों को गुड़, चावल, दाल, मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री भेंट स्वरूप देते हैं। इससे बच्चों में उत्साह बना रहता है और परंपराओं के प्रति उनका जुड़ाव भी मजबूत होता है।
पर्व के अंतिम दिन बच्चों ने गांव के प्रत्येक घर की देहरी पर फूल अर्पित किए। इसके बाद पय्या (स्थानीय वृक्ष) की टहनी काटकर गांव में लाई गई, जिसे लाल-पीले कपड़ों से सजाकर घोघा देवता का प्रतीक बनाया गया। बच्चों ने पूरे गांव में घोघा देवता को घुमाते हुए पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान ग्रामीणों ने श्रद्धापूर्वक चावल, दाल, गुड़ सहित अन्य सामग्री भेंट की।
पूजा-अर्चना के बाद बच्चों ने एकत्रित सामग्री से हलवा, दाल-चावल सहित विभिन्न व्यंजन तैयार किए। घोघा देवता को भोग अर्पित करने के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया और सभी ने मिलकर सामूहिक भोजन किया। इस दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा और बच्चों के चेहरों पर विशेष उत्साह देखने को मिला।
बच्चन सिंह भण्डारी, गजेंद्र राणा, नवीन राणा, जलमा देवी सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि फूलदेई जैसे लोक पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। बदलते समय में भी इस प्रकार के आयोजन पारंपरिक संस्कृति को संजोए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इसी के साथ क्षेत्र में पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर फूलदेई पर्व का विधिवत समापन हो गया।

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