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भारतीय महिलाओं में मुंह के कैंसर से निपटने के आनुवंशिक सूत्र सामने आए

Despite the limited cohort size (N=38), the findings suggest that co-occurring TP53 and CASP8 mutations confer a markedly aggressive and lethal phenotype in oral cancer. These observations warrant further investigation, and the team is now focused on delineating the molecular mechanisms of oncogenesis driven by this novel driver mutation within the background of TP53 alterations for the next phase of the research. The team also used artificial intelligence (deep learning) to digitally analyze tumor tissues. This revealed two distinct groups of female patients, each with a different immune response in their tumors. This insight is crucial because it suggests that some patients might respond better to certain treatments based on their tumor profile.

चित्र – रोगियों के जीन का अनुक्रमण: कर्नाट क के कोलार जिले की महिलाओं में आमतौर पर देखी जाने वाली एक विशिष्ट क्षेत्रीय तंबाकू चबाने की आदत (कड्डीपुडी) वाली महिला ओएससीसी-जीबी रोगियों के युग्मित ट्यूमर और रक्त के नमूनों पर संपूर्ण-एक्सोम अनुक्रमण (डब्ल्यूईएस) और प्रतिलिपि-संख्या सारणी प्रोफाइलिंग की गई। इस महिला-केंद्रित समूह के विश्लेषण से मौखिक ट्यूमरजनन में निहित एक विशिष्ट प्रेरक उत्परिवर्तन का पता चला है।

 

BY- JYOTI RAWAT

भारतीय वैज्ञानिकों ने दक्षिण भारत की महिला रोगियों में मुंह के कैंसर पैदा करने वाले जीन उत्परिवर्तन की खोज की है। भारत दुनिया में मुंह के कैंसर के सबसे अधिक रोगियों वाले देशों में एक है। यहां कुछ क्षेत्रों, विशेष रूप से दक्षिणी और पूर्वोत्तर भारत में, महिलाओं में इसकी दर चिंताजनक रूप से उच्च देखी गई है। इसका कारण तंबाकू युक्त पान, गुटखा और इससे संबंधित उत्पादों को चबाने की व्यापक आदत है। पुरुषों में इस बीमारी का व्यापक रूप से अध्ययन किया गया है, जबकि महिलाओं में मुंह के कैंसर पर अक्सर ध्यान नहीं दिया गया है।

बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र (जेएनसीएएसआर) और कल्याणी स्थित बीआरआईसी-राष्ट्रीय जैव चिकित्सा जीनोमिक्स संस्थान (एनआईबीएमजी) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कोलार स्थित श्री देवराज उर्स उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान अकादमी (एसडीयूएएचईआर) के चिकित्सकों के साथ मिलकर भारत में तंबाकू चबाने की अनोखी आदत के साथ मुंह के कैंसर के बारे में एक महिला-केन्द्रित अध्ययन किया है।

बेंगलुरु के जेएनसीएएसआर के प्रोफेसर तपस के. कुंडू के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि महिलाओं में कैंसर की क्या विशिष्टता है, महिला रोगियों में यह रोग कैसे प्रकट होता है और कैसे बढ़ता है, तथा हम उनका बेहतर उपचार कैसे कर सकते हैं।

 

 

क्लिनिकल एंड ट्रांसलेशनल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस अनुसंधान को विशेष रूप से भारतीय महिलाओं को प्रभावित करने वाले असामान्य रूप से आक्रामक, अत्यधिक आवर्ती और जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले मौखिक कैंसर के जैविक आधार को सामने लाने हेतु डिजाइन किया गया था।

अत्याधुनिक संपूर्ण-एक्सोम अनुक्रमण का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने कर्नाटक के कोलार (एसडीयूएएचईआर) से महिला मौखिक कैंसर समूह में महत्वपूर्ण उत्परिवर्तन वाले दस प्रमुख जीनों की पहचान की।

भले ही इन रोगियों में दो प्रमुख जीन, सीएएसपी8 और टीपी53, अत्यधिक उत्परिवर्तित पाए गए, लेकिन फिर भी सीएएसपी8 ही चालक उत्परिवर्तन (कैंसर पैदा करने वाला) प्रतीत होता है, जो कि मुंह के कैंसर के रोगियों (मुख्यतः पुरुषों) में पूर्व में अध्ययन किए गए उत्परिवर्तनों की तुलना में काफी भिन्न है।

सीमित समूह आकार (N=38) के बावजूद, निष्कर्ष बताते हैं कि टीपी53 और सीएएसपी8 उत्परिवर्तन एक साथ होने से मुंह के कैंसर में एक अत्यंत आक्रामक और घातक लक्षण-प्ररूप उत्पन्न होता है। इन निष्कर्षों के आगे की जांच की जरूरत है और अब टीम अनुसंधान के अगले चरण के लिए सीएएसपी8 परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में इस नए प्रेरक उत्परिवर्तन द्वारा संचालित ऑन्कोजेनेसिस के आणविक तंत्रों को रेखांकित करने पर केन्द्रित है। टीम ने ट्यूमर के ऊतकों का डिजिटल विश्लेषण करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (डीप लर्निंग) का भी उपयोग किया। इससे महिला रोगियों के दो अलग-अलग समूह सामने आए, जिनमें से प्रत्येक के ट्यूमर में एक अलग प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया थी। यह जानकारी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि कुछ रोगी अपने ट्यूमर प्रोफाइल के आधार पर कुछ उपचारों पर बेहतर प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

यह अभूतपूर्व अध्ययन कैंसर से संबंधित अनुसंधान में एक नया मानक स्थापित करता है। यह न केवल जैव-चिकित्सा अनुसंधान में अधिक महिला रोगियों को शामिल करने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है, बल्कि मुंह के कैंसर – एक ऐसी बीमारी जिसने भारत में कई लोगों की जान ले ली है – से निपटने में व्यक्तिगत चिकित्सा के लिए एक रोडमैप भी पेश करता है। हालांकि, इन निष्कर्षों की और अधिक संख्या में रोगियों पर पुष्टि किए जाने की आवश्यकता है।

प्रकाशन लिंक – doi: 10.1002/ctm2.70386

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