भारत सरकार ने अंतरिक्ष नीति 2023 को मंजूरी दी : अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास के लिए खुला आसमान
The government on Thursday approved the Indian Space Policy 2023 that seeks to institutionalize the private sector participation in the space sector, with ISRO focusing on research and development of advanced space technologies.
नयी दिल्ली, 7 अप्रैल। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित हुये भारत सरकार ने गुरुवार को अंतरिक्ष नीति 2023 को मंजूरी दे दी। नयी नीति अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को संस्थागत बनाने की अनुमति देती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति द्वारा अनुमोदित भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 में इसरो, अंतरिक्ष क्षेत्र के पीएसयू न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआइएल) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (आइएन-स्पेसई) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘संक्षेप में, भारतीय अंतरिक्ष नीति स्थापित घटकों (हाल के दिनों में) की भूमिका में स्पष्टता प्रदान करेगी।‘‘ उन्होंने कहा कि नीति निजी क्षेत्र को एंड-टू-एंड अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देगी जिसमें उपग्रह, रॉकेट और लॉन्च वाहन बनाना, डेटा संग्रह और प्रसार शामिल है।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विभाग के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एनएसआइएल द्वारा अंतरिक्ष

क्षेत्र से संबंधित रणनीतिक गतिविधियों को अंजाम दिया जाएगा, जो मांग-संचालित मोड में काम करेगा।
इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने एक संवाद ऐजेसी को बताया कि यह अंतरिक्ष नीति अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने कहा कि नीति निजी क्षेत्र के लिए एक छोटे से शुल्क के लिए इसरो की सुविधाओं का उपयोग करने के लिए रूपरेखा तैयार करती है और उन्हें इस क्षेत्र के लिए नए बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है। सोमनाथ ने कहा कि इसरो अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कोई परिचालन और उत्पादन कार्य नहीं करेगा और अपनी ऊर्जा को नई तकनीकों, नई प्रणालियों और अनुसंधान और विकास के विकास पर केंद्रित करेगा। इसरो के मिशनों के परिचालन भाग को न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जो अंतरिक्ष विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। सोमनाथ ने कहा कि वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदा

री वर्तमान में दो प्रतिशत से भी कम है और अंतरिक्ष नीति भविष्य में इसे 10 प्रतिशत तक बढ़ाने में मदद करेगी।
इण्डियन स्पेस एसोसिऐशन के महा निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि) अनिल भट्ट ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुये कहा कि नयी नीति अंतरिक्ष सुधारों में बहुत आवश्यक स्पष्टता के साथ आगे का मार्ग प्रशस्त करेगी और देश के लिए अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के अवसर को चलाने के लिए निजी उद्योग की भागीदारी को बढ़ाएगी। जनरल भट्ट ने कहा कि निजी क्षेत्र काफी समय से इस नीति का इंतजार कर रहा था और गुरुवार को इसकी घोषणा सुखद आश्चर्य के रूप में हुई। भट्ट ने कहा, ‘‘हम उत्सुकता से नीति के विवरण का इंतजार कर रहे हैं। हम भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित सुधारों पर विशेष ध्यान देने के साथ प्रधानमंत्री को उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं।‘‘
