राष्ट्रीयस्वास्थ्य

सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार सक्रिय, 935 दवाओं की कीमत तय

 

नई दिल्ली, 20 मार्च (PIB)। देश में आम लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ) 2013 के तहत अब तक 935 आवश्यक दवाओं की अधिकतम कीमत तय कर दी है।
लोकसभा में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एनपीपीए अनुसूची-I में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमत निर्धारित करता है और सभी कंपनियों के लिए इन दवाओं को तय सीमा के भीतर बेचना अनिवार्य है।
इसके अलावा, प्राधिकरण नई दवाओं के खुदरा मूल्य भी तय करता है। 18 मार्च 2026 तक 3,702 नई दवाओं के दाम निर्धारित किए जा चुके हैं।
गैर-अनुसूचित दवाओं पर भी नियंत्रण
सरकार ने गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतों पर भी नियंत्रण रखा है। नियमों के अनुसार, कोई भी कंपनी किसी दवा के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में एक वर्ष के भीतर 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि नहीं कर सकती।
विशेष परिस्थितियों में हस्तक्षेप
जनहित में एनपीपीए समय-समय पर विशेष कदम भी उठाता रहा है।
वर्ष 2014 में मधुमेह और हृदय रोग से जुड़ी 106 दवाओं के दाम नियंत्रित किए गए।
2017 में पहली बार कोरोनरी स्टेंट और घुटने के इम्प्लांट्स की कीमत तय की गई।
कैंसर रोधी 42 दवाओं के व्यापार मार्जिन पर सीमा लगाने से 526 ब्रांड सस्ते हुए।
कोविड-19 काल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर सहित कई उपकरणों की कीमतें नियंत्रित की गईं।
एनपीपीए दवाओं की कीमतों पर लगातार निगरानी रखता है और अधिक कीमत वसूलने पर कड़ी कार्रवाई भी करता है।
पेटेंट कानून में संतुलन का प्रयास
सरकार ने दवा क्षेत्र में नवाचार और सस्ती दवाओं के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पेटेंट अधिनियम, 1970 में भी कई प्रावधान किए हैं।
इन प्रावधानों के तहत:
पेटेंट अधिकार निजी होते हैं, लेकिन विवादों का समाधान न्यायालयों के माध्यम से होता है।
पेटेंट आवेदन की दो चरणों में कड़ी जांच की जाती है ताकि गैर-जरूरी पेटेंट न मिल सकें।
पूर्व और पश्चात विरोध की व्यवस्था से किसी भी संदिग्ध पेटेंट को चुनौती दी जा सकती है।
धारा 3(डी) के तहत मामूली बदलाव कर पेटेंट अवधि बढ़ाने पर रोक लगाई गई है।
अनिवार्य लाइसेंसिंग का प्रावधान
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनिवार्य लाइसेंस केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिए जाते हैं, जैसे दवा का महंगा होना या जनता की जरूरतें पूरी न होना। साथ ही, पेटेंट धारक को उचित रॉयल्टी देने का प्रावधान भी सुनिश्चित किया गया है।

कुल मिलाकर, सरकार दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने, पारदर्शिता बनाए रखने और आम जनता को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!