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परिवार रजिस्टर में गड़बड़ियों को लेकर उत्तराखंड सरकार हुयी सख्त, जांच के आदेश जारी

 

देहरादून, 3 जनवरी। उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर से जुड़ी अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूरे प्रदेश में परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की व्यापक, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने के निर्देश जारी किए गए। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख़्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारियों के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि अभिलेखों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न रहे। रजिस्टरों की जांच सीडीओ/एडीएम स्तर पर कराई जाएगी और जांच अवधि वर्ष 2003 से अब तक की प्रविष्टियों को शामिल करेगी।

यह भी स्पष्ट किया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परिवार रजिस्टर का रखरखाव पंचायती राज (कुटुम्ब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले सभी परिवारों का विवरण इसमें दर्ज होना अनिवार्य है तथा प्रविष्टियों के शुद्धिकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी नियमावली में निर्धारित है। सरकार अब इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और कड़े प्रावधानों के साथ लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ सीमावर्ती मैदानी क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर नाम दर्ज होने की शिकायतें मिली हैं, जिनसे जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई। इसी परिप्रेक्ष्य में नियमावली में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है।
पंचायती राज विभाग के अनुसार 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने हेतु 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2,60,337 स्वीकृत और 5,429 आवेदन अपूर्ण या नियमविरुद्ध पाए जाने पर निरस्त किए गए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित पूरे राज्य में समान रूप से जांच की जाए और भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के तहत कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते तथा निदेशक पंचायती राज निधि यादव उपस्थित रहे।

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