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साइबर अपराध पर कड़ा शिकंजा, जागरूकता और तकनीकी तंत्र से बढ़ी सुरक्षा

 

नई दिल्ली, 18 मार्च (PIB)। देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कानून, तकनीक और जागरूकता—तीनों स्तरों पर व्यापक प्रयास तेज कर दिए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट “क्राइम इन इंडिया-2023” के अनुसार, वर्ष 2021 से 2023 के बीच साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो डिजिटल युग में बढ़ती चुनौतियों की ओर संकेत करती है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में जहां देशभर में 52,974 साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 86,420 तक पहुंच गई। विशेष रूप से कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मामलों की संख्या अधिक रही, जबकि कुछ राज्यों में गिरावट भी दर्ज की गई।
संविधान के प्रावधानों के तहत ‘पुलिस’ और ‘कानून-व्यवस्था’ राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार राज्यों की सहायता के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय ने ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) की स्थापना की है, जो देशभर में साइबर अपराध से निपटने का प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका है।
नागरिकों की सुविधा के लिए ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किए गए हैं, जिनके माध्यम से लोग आसानी से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। खासतौर पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए 2021 में शुरू की गई प्रणाली के तहत 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में 8,690 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सुरक्षित कराई जा चुकी है।
सरकार ने 2 जनवरी 2026 को एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी लागू की है, जिससे शिकायतों के निपटान में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ेगा। इसके अलावा, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और ऑनलाइन ठगी जैसे मामलों से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा “मन की बात” कार्यक्रम में साइबर ठगी के नए तरीकों पर चर्चा, आकाशवाणी और दूरदर्शन के विशेष कार्यक्रम, कॉलर ट्यून, सोशल मीडिया अभियान, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम और रेलवे स्टेशनों व हवाई अड्डों पर डिजिटल संदेशों के माध्यम से लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्ट करें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उपायों के साथ-साथ जन-जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।

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