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टीएमयू में मज्जिनेन्द्र कल्पद्रुम महामंडल विधान का भव्य समापन : विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुई पूर्णाहुति

 

मुरादाबाद,  8 नवंबर । तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के रिद्धि-सिद्धि भवन में नौ दिवसीय भक्ति-श्रद्धा-ज्ञान की त्रिवेणी श्री मज्जिनेन्द्र कल्पद्रुम महामंडल विधान का आज विश्व शांति महायज्ञ के साथ भव्य समापन हुआ। हजारों पुण्यार्जक श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अर्घ्य समर्पित किए।

महायज्ञ नायक कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने सम्राट भरत चक्रवर्ती की भूमिका में ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों के साथ यज्ञ वेदी में आहुतियाँ दीं। क्षुल्लक श्री 105 दिव्यानंद जी महाराज ने भगवान शांतिनाथ के अभिषेक मंत्रों का उच्चारण किया, तो प्रज्ञाश्रमण उपाध्याय श्री 108 प्रज्ञानंद जी महामुनिराज ने स्वयं शांतिधारा के पावन मंत्रों का गान किया।

समापन के पावन क्षण में कुलाधिपति श्री सुरेश जैन एवं फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन ने गुरुदेव के चरणों में शीश झुकाकर भावुक क्षमायाचना की। उन्होंने कहा, “हे परम पूज्य गुरुवर! यदि इस महायज्ञ में हमसे जाने-अनजाने कोई त्रुटि, प्रमाद या भूल हुई हो, तो सपरिवार उत्तम क्षमा प्रदान करें।” गुरुदेव ने धर्म की दृढ़ता का आशीर्वाद देते हुए सभी दोष क्षमा कर दिए।

विधान को सफल बनाने वाले पूजक पंडित श्री ऋषभ जैन शास्त्री एवं पंडित श्री मनीष जैन का कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने तिलक लगाकर अभिनंदन किया। सौधर्म इंद्र बने श्री ऋषि जैन, शचि इंद्राणी श्रीमती निधि जैन, बाहुबली श्री मनोज जैन, उनकी रानी श्रीमती नीलिमा जैन, कुबेर प्रो. विपिन जैन एवं इंद्राणी श्रीमती अहिंसा जैन ने भी पूजकों का वंदन किया। इस अवसर पर श्रीमती जहान्वी जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सम्राट भरत चक्रवर्ती की भूमिका निभा रहे श्री मनीष जैन ने गुरुदेव से प्रश्न किया, “हे गुरुवर! इस कल्पद्रुम विधान का परम फल क्या है?” गुरुदेव ने गूढ़ रहस्य खोला – “यह विधान मोहनीय कर्म की निर्जरा करता है, अज्ञान का नाश करता है तथा उत्तम आयु, उत्तम गति और उत्तम परिणामों की प्राप्ति कराकर मोक्ष द्वार तक ले जाता है। यह पूजा पुण्य नहीं, शुद्ध आत्म-परिणामों की गारंटी है।”

अंत में गुरुदेव ने इसे कुलाधिपति श्री सुरेश जैन परिवार की विशुद्ध मंगल भावना का फल बताया और कहा, “आज यहाँ एक समोशरण बना है, भविष्य में पच्चीस समोशरणों की रचना हो।” श्री मनीष जैन ने चक्रवर्ती पद पर किमिच्छित् दान करते हुए एक गाय-बछड़े का भी दान किया।

इस अवसर पर डॉ. कल्पना जैन, प्रो. विपिन जैन, डॉ. विनोद जैन, डॉ. रत्नेश जैन, प्रो. रवि जैन, डॉ. अर्चना जैन, श्री आदित्य जैन, प्रो. प्रवीन कुमार जैन, डॉ. विनीता जैन, डॉ. अक्षय जैन, श्रीमती निकिता जैन, श्रीमती सुनीता जैन सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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