तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से  उद्यमिता के नए आयाम पर अतिथि व्याख्यान

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प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

मुरादाबाद, 24 नवंबर  । उजाला सिग्नस हेल्थ केअर एंड हॉस्पिटल, नई दिल्ली के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. उत्कर्ष अग्रवाल ने कहा, जीवन में न कोई जीतता है, न कोई हारता है, बस हमें प्रयास करने से पीछे नहीं हटना चाहिए, बल्कि समस्या का समाधान नए तरीके से सोचना चाहिए। डॉ. उत्कर्ष ने उद्यमिता को अपने शब्दों में परिभाषित करते हुए बताया,  उद्यमिता व्यवसाय में नवाचार की ओर प्रेम और स्नेह से की जाने वाली वैचारिक गतिविधि है, जिसमें स्वयं पर विश्वास, एक सीमित दायरे के अंदर प्रत्युत्पन्न समस्या के समाधान हेतु स्वयं की क्षमता और लगन पर भरोसा, अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अपनी टीम को मैं से हम की भावना से लबरेज करना और जिसका उद्देश्य सिर्फ धनसंचय या संपत्ति निर्माण न होकर एक अच्छी तरह से रहने योग्य विश्व का सृजन करना भी है।

डॉ. अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से आयोजित स्वास्थ्य के क्षेत्र में उद्यमिता के नए आयाम पर व्याख्यान दे रहे थे। इसके बाद कार्यशाला भी हुई, जिसमें उद्यमिता के सिद्धांतों को रोचक तरीके से समझाया गया। अंत में वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एससी डिंडा ने डॉ. उत्कर्ष अग्रवाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

व्याख्यान में फार्मेसी कॉलेज के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सहभागिता रही। कार्यशाला के अंतर्गत छात्र-छात्राओं ने मार्शमेलो चैलेंज गतिविधि में चार-चार की टीम बनाकर भाग लिया। इस गतिविधि के अंत में डॉ. अग्रवाल ने छात्रों को बताया कि नवाचार करने वाले लोग प्रत्यक्ष समस्या का समाधान सीमित संसाधनों में नई सोच और नए तरीकों से करते हैं और यही उन्हें सफलता की राह पर अग्रसर करता है। साथ ही इसमें छात्रों और शिक्षकों ने जाना कि किस तरह एक उद्यमी सोचता है। फार्मेसी के प्राचार्य डॉ. अनुराग वर्मा ने अपने संदेश में बताया कि वर्तमान परिदृश्य में उद्यमिता और तकनीकी कौशल का अत्यंत महत्व है। विभागाध्यक्ष डॉ. एलफाइन प्रभाकर ने फार्मा और स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्यमिता की महती भूमिका को रेखांकित किया। इंस्टिट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के फार्मेसी कॉलेज के प्रतिनिधि डॉ. मुकेश सिकरवार ने बताया, ज्ञान ही आपको सफलता दिलाता है। एक उद्यमी नूतन प्रयोगों से निरंतर सीखता रहता है। फार्मेसी के प्रोफेसर डॉ. एससी डिंडा, कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. मयूर पोरवाल और डॉ. वैभव रस्तोगी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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