गैस आपूर्ति व्यवस्था और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष पर हरक सिंह ने उठाए सवाल
देहरादून, 16 मार्च। उत्तराखंड कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने एलपीजी गैस आपूर्ति व्यवस्था और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के उपयोग को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में गैस आपूर्ति को लेकर लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और इस स्थिति पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
डॉ. रावत ने कहा कि गैस बुकिंग के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग समयावधि निर्धारित की गई है, जिससे कई उपभोक्ताओं को असुविधा हो रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देहरादून सहित कई स्थानों पर ऐसी गैस एजेंसियां हैं जो पहले ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित की गई थीं, लेकिन अब वे नगर निगम या नगर पालिका क्षेत्र में आ चुकी हैं। इसके बावजूद वहां के उपभोक्ताओं को अभी भी ग्रामीण श्रेणी के अनुसार 45 दिन के अंतराल में गैस बुकिंग करनी पड़ रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे क्षेत्रों की श्रेणी की समीक्षा कर शहरी क्षेत्रों के समान 25 दिन की बुकिंग व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं को सुविधा मिल सके।
उन्होंने कहा कि देश में गैस और तेल की बढ़ती आयात निर्भरता पर भी दीर्घकालिक नीति बनाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार वर्ष 2014 के बाद गैस और तेल के आयात में वृद्धि हुई है, जिससे लागत और आपूर्ति प्रबंधन पर प्रभाव पड़ रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के उपयोग को लेकर भी पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त कुछ दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों से प्राप्त जानकारी के आधार पर इस कोष के वितरण की प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के उपयोग से संबंधित सभी जिलों के आंकड़ों को सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता को स्पष्ट जानकारी मिल सके। इस अवसर पर कांग्रेस के कई पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
