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हेलंग कल्पेश्वर सड़क खतरनाक हाल में : बारहमासी तीर्थ यात्रा से रोक रही श्रद्धालुओं को

 

-गोपेश्वर से महिपाल गुसाईं-

उत्तराखंड में इन दिनों शीतकालीन चारधाम यात्रा चल रही है और देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच भी रहे हैं किंतु इसके विपरीत बारहों महीने खुला रहने वाला तीर्थ पंचम केदार हाशिए पर है। इसी घाटी के उर्गम गांव में चतुर्थ बदरी, यानी ध्यान बदरी तीर्थ भी है लेकिन उसके महत्व की किसी को फ़िक्र ही नहीं है।

इन दोनों तीर्थों की यात्रा को सुखद, निरापद और व्यवस्थित करने की पहली शर्त बेहतर सड़क की है लेकिन जब धरातल पर स्थिति निराशाजनक हो तो विकास और प्रयास की बात ही खारिज हो जाती है और कल्पगंगा घाटी में दो महत्वपूर्ण तीर्थ होने के बावजूद उपेक्षा की यह स्थिति लोगों की उम्मीदों पर तुषारापात से कम नहीं है। एक दशक से पहले बनी हेलंग – कल्पेश्वर सड़क की दुर्दशा सरकार की तत्परता और हर कोने तक विकास की पहुंच बनाने के दावे की पोल खोलती है।

इस जानलेवा सड़क का सफर श्रद्धालुओं को कल्पनाथ की यात्रा करने से रोक रहा है। हेलंग में जिस स्थान से कल्पनाथ की यात्रा शुरू होती है, बाहर से आने वाला वाहन चालक वहां एक होटल में मौजूद लोगों से पूछते हैं कि सड़क कैसी है? जवाब मिलता है कि अपने रिस्क पर जाएं। देखा जाए तो यह हमारे “इंजीनियरों के कौशल” का एक नमूना है। मोड़ पर वाहन चलाना कम जोखिमभरा नहीं होता। इस सड़क का कभी डामरीकरण हुआ होगा, उसकी पुष्टि दस किमी तक तो होती ही नहीं। पूरी सड़क ऊबड़ खाबड़ होने से जोखिमभरी यात्रा श्रद्धालुओं को रोकने के लिए पर्याप्त है।

कल्पेश्वर के रास्ते में सड़क से जुड़ा पहला गांव ल्यारी है। यहां थोड़ा सा प्रतीत होता है कि अब शायद ज्यादा जोखिम नहीं है, हालांकि आगे आने वाले नालों पर जो स्थिति है, वह वापस लौटने के लिए विवश कर देती है। फरीदाबाद से आए राजेश गुप्ता बताते हैं कि वे पिछले पांच साल से हर वर्ष कल्पनाथ की यात्रा पर आ रहे हैं लेकिन सड़क की दशा बद से बदतर होती जा रही है। इसके सुधार के नाम पर जिस कछुआ चाल से काम दिख रहा है, उस लिहाज से शायद दो दशक और लग जाएंगे, जबकि राज्य सरकार शैव सर्किट और बारह माह यात्रा का जो प्रचार कर रही है, वह इस सड़क की दशा देख कर बंद करना ज्यादा ठीक लगता है।

उर्गम गांव में स्थानीय निवासी गजेन्द्र सिंह बताते हैं कि उन्हें ठीक से याद नहीं है कि इस सड़क पर आखिरी बार डामर बिछाया गया लेकिन सुधार के नाम पर ठेकेदारों को खूब काम मिलता आ रहा है। आज भी यहां 14 करोड़ रुपए की लागत से सड़क सुधारीकरण का बोर्ड घाटी के लोगों का मुंह चिढ़ा रहा है। इस मार्ग पर आए दिन हादसे होते आ रहे हैं, एक बार तो बारात का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, तब दर्जन से अधिक लोगों की जान गई थी, उन जानलेवा स्थानों पर कोई काम नहीं हुआ है।

देवग्राम के स्थानीय लोग बताते हैं कि इस घाटी के लोगों को सिर्फ सपने दिखाए जाते रहे हैं। पर्यटन और तीर्थाटन की उम्मीद में लोगों ने किसी तरह यह होटल और होम स्टे बना लिए लेकिन उनमें ठहरने के लिए कोई यात्री तभी आ सकता है, जब सड़क अच्छी हो। वे बताते हैं कि अब कल्पनाथ मास्टर प्लान का ढोल पीटा जा रहा है। धाम के प्रवेश द्वार के पास पार्किंग निर्माण के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं लेकिन सड़क की दशा सुधारना प्राथमिकता में नहीं दिख रहा है। स्थानीय लोग मानते हैं कि उनका दुर्भाग्य है कि राजनीतिक नेतृत्व उन्हें बुनियादी सुविधाओं का हकदार ही नहीं मानता। राज्य स्थापना के बाद से अब तक उन्होंने जिन भी लोगों को उन्होंने अपना भाग्य विधाता चुना, सबने सिर्फ सपने बेचे। क्षेत्र में अभी अनेक सड़कें बन रही हैं, लेकिन मुख्य सड़क की अर्से से लगातार उपेक्षा की जा रही है। ग्रामीण मानते हैं कि इस एक अदद सड़क को पैमाना मान लिया जाए तो किसी भी सरकार की मनसा, इच्छाशक्ति, जनहित के प्रति प्रतिबद्धता और समग्र विकास की दृष्टि का आकलन हो जाता है। हेलंग कल्पेश्वर सड़क एक तरह से राज्य सरकार को आईना दिखा रही है।

क्या कहते हैं अधिशासी अभियंता

हेलंग कल्पनाथ सड़क की दशा सुधारने का जिम्मा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पोखरी डिवीजन के पास है। इस डिवीजन के अधिशासी अभियंता प्रमोद गंगाड़ी कहते हैं कि सड़क को सुगम बनाने का काम प्रगति पर है और आगामी मार्च माह तक इसे दुरुस्त करने का लक्ष्य है तथा विभाग इस दिशा में गंभीरता से प्रयासरत है।

डीएम बोले – शिकायतें मिली हैं, जांच होगी

चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने कल्पेश्वर सड़क की दुर्दशा के बाबत पूछे जाने पर बताया कि उन्हें इस संबंध में अनेक शिकायतें मिली हैं और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने बताया कि निकाय चुनाव सम्पन्न होते ही वे खुद सड़क की दशा का जायजा लेंगे और लोगों की शिकायतों की जांच करेंगे।

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