अंतरिक्ष बना नया रणक्षेत्र : उपग्रह हाइजैक और कक्षा में हथियारों की होड़
वॉशिंगटन। 21वीं सदी का युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह साइबरस्पेस और अंतरिक्ष तक पहुँच चुका है। इसका ताजा उदाहरण तब सामने आया जब रूस के विजय दिवस परेड के दौरान क्रेमलिन समर्थित हैकर्स ने यूक्रेन को टेलीविजन सेवा प्रदान करने वाले एक उपग्रह को हाइजैक कर लिया।
सामान्य प्रसारण की जगह यूक्रेन के दर्शकों को मास्को से परेड का फुटेज दिखाया गया, जिसमें टैंकों, सैनिकों और हथियारों की झलक थी। यह एक मनोवैज्ञानिक हमला था, जिसका उद्देश्य यूक्रेन को भयभीत करना और यह जताना था कि भविष्य के युद्ध अब अंतरिक्ष में भी लड़े जाएंगे।
उपग्रह निष्क्रिय करने का खतरा
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी उपग्रह को निष्क्रिय करना गोली चलाए बिना भी संभव है। हैकर्स उपग्रह के सुरक्षा सॉफ़्टवेयर को निशाना बनाकर या उसकी पृथ्वी से संपर्क साधने की क्षमता को बाधित कर ऐसा कर सकते हैं।
नेट-राइज़ (NetRise) कंपनी के सीईओ टॉम पेस, जो अमेरिकी ऊर्जा विभाग में भी कार्य कर चुके हैं, कहते हैं—
“यदि आप किसी उपग्रह की संचार क्षमता को रोक देते हैं तो यह एक विनाशकारी स्थिति होगी। सोचिए, अगर पूरा देश जीपीएस से वंचित हो जाए तो क्या अराजकता फैलेगी।”
उपग्रहों पर बढ़ता निर्भरता संकट
वर्तमान में 12,000 से अधिक उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। ये प्रसारण, इंटरनेट कनेक्शन, जीपीएस, खुफिया जानकारी और सैन्य संचार जैसी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।
हैकर्स प्रायः उन उपग्रहों को निशाना बनाते हैं जिनका सॉफ़्टवेयर या हार्डवेयर पुराना हो चुका होता है। रूस समर्थक हैकर्स ने यूक्रेन के टीवी प्रसारण को हाइजैक कर यही प्रदर्शित किया कि अंतरिक्ष से भी किसी देश की सुरक्षा और मनोबल पर हमला संभव है।
अमेरिका की चेतावनी और रूसी हथियार
अमेरिकी अधिकारियों ने हाल ही में खुलासा किया है कि रूस एक परमाणु-आधारित अंतरिक्ष हथियार विकसित कर रहा है। यह हथियार लो-अर्थ ऑर्बिट (निम्न-पृथ्वी कक्षा) में परिक्रमा कर रहे उपग्रहों को एक साथ निष्क्रिय कर सकता है।
यह तकनीक दोहरी मार करती है—पहले तो भौतिक हमला कर उपग्रहों को नष्ट करती है और फिर परमाणु घटक का उपयोग कर उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जला देती है।
अमेरिकी सांसद माइक टर्नर ने इस हथियार को लेकर चेतावनी दी है और रक्षा विभाग से कांग्रेस को गोपनीय ब्रीफिंग देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह तकनीक यदि तैनात की गई तो यह अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन होगी और इसे सामूहिक विनाश के हथियार की श्रेणी में गिना जाएगा।
चंद्रमा और क्षुद्रग्रहों पर नई होड़
अंतरिक्ष संघर्ष केवल उपग्रहों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रमा और क्षुद्रग्रहों पर मौजूद कीमती खनिज और संसाधन भविष्य के टकराव का कारण बन सकते हैं।
नासा के कार्यकारी प्रशासक सीन डफी ने चंद्रमा पर एक छोटा परमाणु रिएक्टर भेजने की योजना की घोषणा की है। उनका कहना है कि अमेरिका को यह कदम चीन या रूस से पहले उठाना चाहिए।
चंद्रमा पर प्रचुर मात्रा में हीलियम-3 पाया जाता है, जिसे वैज्ञानिक भविष्य में परमाणु संलयन (nuclear fusion) के जरिये असीमित ऊर्जा उत्पादन में काम आने योग्य मानते हैं। विशेषज्ञ जोसेफ रूके का कहना है कि आने वाले दशकों में चंद्रमा पर नियंत्रण यह तय करेगा कि कौन-सा देश ऊर्जा और खनिज संपन्न भविष्य पर अपना प्रभुत्व जमाएगा।
चीन और रूस ने भी निकट भविष्य में चंद्रमा पर परमाणु संयंत्र लगाने की योजनाओं का खुलासा किया है।
आतंरिक्ष की होड़ भविष्य का गंभीर खतरा
आज उपग्रह केवल संचार और प्रसारण का माध्यम नहीं रहे, बल्कि आधुनिक युद्ध और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अहम हथियार बन चुके हैं। अंतरिक्ष की यह होड़ आने वाले समय में मानवता को न केवल तकनीकी सुरक्षा संकट में डालेगी बल्कि चंद्रमा और अन्य ग्रहों पर संसाधनों की लूट को भी जन्म दे सकती है।
