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हिमालयी वादियों में लंबे इंतजार के बाद बर्फबारी, औली से बद्रीनाथ तक बर्फ की सफेद चादर

 

सूखे और वनाग्नि से जूझ रहे क्षेत्र को मिली बड़ी राहत


ज्योतिर्मठ, 23 जनवरी (कपरुवाण)। सूखे और लगातार बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं से जूझ रही हिमालयी वादियों में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बर्फ ने दस्तक दे ही दी। मौसम विभाग का पूर्वानुमान पूरी तरह सटीक साबित हुआ। शुक्रवार सुबह से जहां ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई थी, वहीं दोपहर होते-होते निचले इलाकों में भी बर्फ के फुहारे गिरने लगे, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड और नमी लौट आई।

नीती और माणा घाटियों के साथ-साथ श्री बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब-लोकपाल, फूलों की घाटी, उर्गम घाटी और चिनाप घाटी में जोरदार हिमपात दर्ज किया गया। इसके अलावा विश्व विख्यात हिमक्रीड़ा केंद्र औली भी ताजा बर्फ से लकदक हो गया है। चारों ओर बिछी सफेद चादर ने क्षेत्र की खूबसूरती में नया रंग भर दिया है।

बर्फबारी से ठीक पहले औली पहुंचे पर्यटकों के लिए यह किसी सौभाग्य से कम नहीं रहा। पर्यटकों ने हिमपात के मनोहारी दृश्यों को कैमरों में कैद किया और बर्फ के फुहारे गिरने के बीच जमकर आनंद लिया। औली में ताजा बर्फ गिरने से आगामी दिनों में स्कीइंग गतिविधियों के लिए भी अनुकूल हालात बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

ताजा हिमपात के बाद ज्योतिर्मठ से औली तक पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर में लिपट गया है। देर से ही सही, लेकिन इस बर्फबारी से स्थानीय काश्तकारों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से बारिश और बर्फ न पड़ने के कारण रबी फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। बर्फ पिघलने से खेतों में नमी बढ़ेगी और जलस्रोतों को भी संजीवनी मिलने की उम्मीद है।
वहीं पिछले कई दिनों से वनाग्नि की लगातार बढ़ती घटनाओं से परेशान वन विभाग के लिए भी यह हिमपात बड़ी राहत लेकर आया है। बर्फबारी और बढ़ी नमी से जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगने की संभावना है।

कुल मिलाकर यह बर्फबारी न केवल पर्यटन के लिहाज से बल्कि कृषि, वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से भी हिमालयी क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित हो रही है।

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