पर्यावरणब्लॉग

2°C तापमान वृद्धि की चेतावनी: हिंदू कुश हिमालय की केवल 25% बर्फ ही बचेगी

 

देहरादून। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने गंभीर चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है, तो हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में मौजूद ग्लेशियरों की मात्रा का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही शेष रह जाएगा। यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल ‘साइंस’ में प्रकाशित हुआ है और इसे अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) ने उजागर किया है। संस्था ने जीवाश्म ईंधन के उपयोग में तत्काल कमी लाने की अपील की है।

ICIMOD की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वैश्विक नीतियों के तहत पृथ्वी का तापमान औसतन 2.7°C तक बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में दुनिया भर में ग्लेशियरों का केवल 24 प्रतिशत द्रव्यमान ही बच पाएगा। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र—जो दक्षिण एशिया की प्रमुख नदियों जैसे गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र और मेकांग का उद्गम स्थल है—में 2°C तापमान वृद्धि की स्थिति में 2020 के स्तर की तुलना में केवल 25 प्रतिशत बर्फ शेष रहेगी। यह वही क्षेत्र है, जो दो अरब से अधिक लोगों के लिए जल स्रोत प्रदान करता है।

अध्ययन के मुताबिक, यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित किया जाए, तो हिमालय और काकेशस क्षेत्रों में 40 से 45 प्रतिशत तक बर्फ बच सकती है, जबकि मध्य एशिया में यह अनुपात 60 प्रतिशत तक रह सकता है। लेकिन तापमान 2°C पहुंचने पर यह घटकर मात्र 30 प्रतिशत रह जाएगी।

ICIMOD की डिप्टी डायरेक्टर जनरल ने चेतावनी दी है कि हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियर अत्यंत तीव्र गति से पिघल रहे हैं, जिससे आने वाले दशकों में पानी की कमी, कृषि उत्पादकता में गिरावट और प्राकृतिक आपदाओं—जैसे ग्लेशियल झील फटने और भूस्खलन—का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में हर एक डिग्री की वृद्धि ग्लेशियरों के लिए घातक सिद्ध हो रही है। यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रोका गया, तो छोटे ग्लेशियर पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं।

ICIMOD ने वैश्विक नेताओं से जलवायु वित्तपोषण बढ़ाने, अनुकूलन उपायों को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित समुदायों को न्यायसंगत मुआवजा देने की मांग की है।

यह चेतावनी इस तथ्य की ओर संकेत करती है कि हिमालयी बर्फ के तीव्र पिघलाव से न केवल पर्वतीय क्षेत्रों बल्कि समूचे दक्षिण एशिया के मैदानी इलाकों में भी जल संकट, बाढ़ और सूखे की स्थितियाँ गहराने का खतरा है। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि यदि अब भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाला समय मानवता के लिए अभूतपूर्व जलवायु संकट लेकर आएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!