युद्धविराम की खबर से कुछ घंटे पहले, पोप लियो XIV ने ट्रंप को कड़ी फटकार लगाई
मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति: पहले अमेरिकी मूल के पोंटिफ ने लगातार मध्य पूर्व युद्ध को सुलझाने के लिए संवाद का आह्वान किया है। उन्होंने ईरान को दी गई ट्रंप की धमकियों को ‘वास्तव में अस्वीकार्य’ बताया।
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-लेखक: एफरात लिवनी-
पोप लियो XIV, जो पहले अमेरिकी मूल के पोंटिफ (ईसाई धर्मगुरु) हैं, ने मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप को एक दुर्लभ फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि ईरान की “पूरी सभ्यता” को मिटा देने की धमकी देना “वास्तव में अस्वीकार्य” है।
हालाँकि उन्होंने सीधे तौर पर राष्ट्रपति का नाम नहीं लिया, लेकिन यह स्पष्ट था कि उनका इशारा किसकी ओर था। इटली में मंगलवार शाम पत्रकारों से बात करते हुए पोप ने कहा, “जैसा कि हम सभी जानते हैं, आज ईरान के पूरे जनमानस के खिलाफ यह धमकी दी गई है। यह वास्तव में अस्वीकार्य है।” यह बयान ट्रंप द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा से कुछ घंटे पहले आया। पोप ने आगे कहा, “यहाँ अंतरराष्ट्रीय कानून के मुद्दे तो हैं ही, लेकिन उससे भी बढ़कर, यह समग्र रूप से लोगों की भलाई से जुड़ा एक नैतिक प्रश्न है।”
मुख्य घटनाक्रम
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ट्रंप की धमकी: राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी थी कि यदि तेहरान ने ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति नहीं दी, तो वह ईरान के हर पुल और बिजली संयंत्र को नष्ट कर देंगे।
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अंतरराष्ट्रीय कानून: नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिबंधित है। ट्रंप की इस धमकी की डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सांसदों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भी दुनिया भर में निंदा की।
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पोप का रुख: पोंटिफ के रूप में अपने पहले वर्ष में, लियो ने बड़े पैमाने पर अमेरिकी राजनीति में सीधे हस्तक्षेप करने से परहेज किया है, लेकिन वे ईरान पर अमेरिकी-इजरायल हमलों को समाप्त करने और संघर्ष को सुलझाने के लिए संवाद की वापसी का लगातार आह्वान करते रहे हैं।
धर्म और युद्ध का टकराव
पोप ने ट्रंप प्रशासन के उन प्रयासों को भी स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है जिसमें युद्ध को ईसाई संदर्भों में पेश करने की कोशिश की गई थी।
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रक्षा सचिव का बयान: मार्च में रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने अमेरिकियों से “ईसा मसीह के नाम पर” युद्ध में जीत और अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया था।
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पोप की प्रतिक्रिया: इसके तुरंत बाद पोप ने युद्ध के लिए ईसा मसीह के नाम का उपयोग करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि ईसा मसीह “युद्ध करने वालों की प्रार्थना नहीं सुनते, बल्कि उन्हें अस्वीकार कर देते हैं।”
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ईस्टर का संदेश: पिछले सप्ताह ईस्टर से पहले एक उपदेश में, लियो ने कहा कि ईसाई मिशन को “प्रभुत्व की इच्छा से विकृत कर दिया गया है, जो ईसा मसीह के मार्ग के लिए पूरी तरह से पराई है।”
शांति की अपील और युद्धविराम
ट्रंप ने ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने या विनाश का सामना करने के लिए मंगलवार शाम तक की समय सीमा दी थी। लियो ने कूटनीति पर जोर देते हुए कहा, “मेज पर वापस आएं। आइए बात करें। शांतिपूर्ण तरीके से समाधान खोजें।”
उनकी इस अपील के कुछ घंटों बाद, अपनी 8 बजे की समय सीमा से ठीक पहले, ट्रंप ने युद्धविराम समझौते की घोषणा की। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि वे “ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति और मध्य पूर्व में शांति के संबंध में एक निर्णायक समझौते के बहुत करीब हैं।”
(संपादन सहयोग: एलिसाबेत्ता पोवोलेडो और मोटोको रिच, अनुवाद -उषा रावत)
