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क्या ब्रिटेन छीन लेगा एंड्रयू का ‘राजगद्दी’ पर हक? जानिए शाही परिवार के इस बड़े कानूनी दंगल की पूरी कहानी

 

 

यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ नजदीकियों ने भले ही प्रिंस एंड्रयू से उनकी चमक छीन ली हो, लेकिन वे अब भी ब्रिटिश सिंहासन की कतार में आठवें नंबर पर हैं। मगर अब लंदन की गलियारों में उन्हें पूरी तरह ‘बाहर’ करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

लेखक: स्टीफन कैसल

लंदन | 25 फरवरी, 2026

ब्रिटेन के शाही खानदान के लाडले रहे प्रिंस एंड्रयू के दिन इन दिनों गर्दिश में हैं। उनसे उनकी शाही उपाधियाँ छीनी जा चुकी हैं, सम्मान वापस ले लिए गए हैं और विंडसर कैसल के पास वाले उनके 30 कमरों के आलीशान महल से भी उन्हें विदा कर दिया गया है। पिछले हफ्ते तो हद तब हो गई जब उन्हें सार्वजनिक पद के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने कुख्यात जेफरी एपस्टीन के साथ कुछ बेहद गोपनीय जानकारी साझा की थी।

आज स्थिति यह है कि जिस प्रिंस को कभी दुनिया सलाम करती थी, उन्हें अब सिर्फ एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर के नाम से पुकारा जाता है। इसके बावजूद, एक पेच अभी भी फंसा है—वे आज भी ब्रिटेन की राजगद्दी के आठवें वारिस बने हुए हैं।

ब्रिटिश सरकार ने पिछले शुक्रवार को संकेत दिए कि पुलिस जांच पूरी होते ही वे उत्तराधिकार की इस सूची (Line of Succession) को बदलने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि एंड्रयू ने हमेशा की तरह इन आरोपों को सिरे से नकारा है, लेकिन सरकार का इरादा साफ है।

रक्षा मंत्री ल्यूक पोलार्ड ने बीबीसी से दो-टूक कहा कि सरकार बकिंघम पैलेस के साथ मिलकर ऐसी योजना बना रही है जिससे पूर्व प्रिंस “सिंहासन के करीब भी न फटक सकें।”

आखिर क्या है यह ‘उत्तराधिकार की कतार’?

सरल शब्दों में कहें तो यह वह लिस्ट है जो तय करती है कि राजा या रानी के बाद अगला नंबर किसका होगा। जो व्यक्ति इस लिस्ट में ऊपर होता है, वह न केवल ब्रिटेन का राजा बनता है, बल्कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे 14 अन्य देशों का भी औपचारिक मुखिया कहलाता है।

आमतौर पर यह प्रक्रिया सीधी होती है। 2022 में जब महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन हुआ, तो ताज उनके बड़े बेटे चार्ल्स के पास चला गया। एंड्रयू महारानी के मंझले बेटे थे, इसलिए उनका नंबर काफी पीछे था। लेकिन 17वीं सदी से ही ब्रिटेन की संसद के पास यह पावर है कि वह तय कर सके कि शाही ताज किसके सिर सजेगा। फिलहाल इस लिस्ट में महारानी एलिजाबेथ के 25 वंशजों के नाम शामिल हैं।

कौन-कौन है एंड्रयू से आगे?

राजगद्दी की इस रेस में सबसे आगे प्रिंस विलियम हैं। उनके बाद उनके तीन बच्चे (जॉर्ज, चार्लोट और लुई) आते हैं। फिर नंबर आता है विलियम के छोटे भाई प्रिंस हैरी का, और उनके बाद उनके दो बच्चों (आर्ची और लिलिबेट) का।

इसका मतलब यह है कि अगर एपस्टीन कांड न भी होता, तब भी एंड्रयू का राजा बनना लगभग नामुमकिन था। लेकिन ‘आठवें नंबर’ पर होना उन्हें एक खास रसूख और सुरक्षा देता है, जिसे अब सरकार खत्म करना चाहती है।

हटाने का रास्ता कितना मुश्किल है?

शाही परिवार चाहकर भी खुद किसी को इस लिस्ट से नहीं निकाल सकता। इसके लिए ब्रिटिश संसद में बकायदा कानून पास करना होगा। यह प्रक्रिया न केवल लंबी है, बल्कि बकिंघम पैलेस के लिए सिरदर्द भी है, क्योंकि संसद में बहस के दौरान राजशाही के खर्चों और उनके तौर-तरीकों पर तीखे सवाल उठ सकते हैं।

इसके अलावा, जिन 14 देशों के वे मुखिया हैं, उनकी सहमति भी जरूरी होगी। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस और न्यूजीलैंड सरकार ने पहले ही इशारा कर दिया है कि उन्हें एंड्रयू को हटाने में कोई ऐतराज नहीं है।

अगर एंड्रयू हटे, तो किसका नंबर आएगा?

एंड्रयू के ठीक नीचे नौवें स्थान पर उनकी बड़ी बेटी प्रिंसेस बीट्राइस हैं। उनके बाद उनकी बेटियाँ और फिर उनकी छोटी बहन प्रिंसेस यूजिनी का नंबर आता है।

एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ एंड्रयू को हटाया जाएगा या उनकी बेटियों को भी पिता के पापों की सजा मिलेगी? जानकारों का मानना है कि बेटियों को हटाना मुश्किल है क्योंकि उनका इन आरोपों से कोई लेना-देना नहीं है। अंतिम फैसला संसद के हाथ में ही होगा।

अचानक इतनी सख्ती क्यों?

शुरुआत में सरकार इस मामले में पड़ना नहीं चाहती थी, लेकिन पिछले हफ्ते एंड्रयू की गिरफ्तारी ने पूरे ब्रिटेन में भूचाल ला दिया। जनता और मीडिया का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

ब्रिटिश राजनीति में आमतौर पर शाही परिवार का सम्मान किया जाता है, लेकिन अब लहजा बदल चुका है। संसद में व्यापार मंत्री क्रिस ब्रायंट ने एंड्रयू को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने एंड्रयू को एक ऐसा “अहंकारी और खुदगर्ज इंसान” करार दिया जो सार्वजनिक सेवा और निजी स्वार्थ के बीच का फर्क ही भूल गया। (Courtsey from The New York Times)

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