भारत कैसे बना जंगली जानवरों का नंबर 1 गंतव्य
– आदित्य प्रताप सिंह रावत
भारत की विविधता न केवल उसके लोगों और संस्कृति में है, बल्कि अब जंगली जानवरों के मामले में भी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। हाल के वर्षों में भारत ने हजारों जंगली जानवरों को आयात करके खुद को इन प्राणियों का प्रमुख गंतव्य बना लिया है। जहां एक ओर चीतों की पुनर्स्थापना ने सुर्खियां बटोरीं, वहीं चुपचाप हजारों अन्य जानवर दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भारत पहुंचे हैं। यह विशेष रिपोर्ट तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण करती है कि कैसे भारत इस क्षेत्र में नंबर 1 बना, विशेष रूप से चिड़ियाघरों और संरक्षण परियोजनाओं के माध्यम से।
चीतों की सुर्खियां और पर्दे के पीछे की कहानी
भारत में चीतों की वापसी ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आयातित चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में बसाया गया, जो भारत की वन्यजीव संरक्षण की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में भारत ने 35,000 से अधिक जंगली जानवरों को आयात किया है, जिनमें से अधिकांश वंतारा जैसे निजी चिड़ियाघरों और संरक्षण केंद्रों में बसाए गए हैं। वंतारा, जो अंबानी परिवार द्वारा संचालित है, ने अकेले 40,000 से अधिक जानवरों को आश्रय दिया है, जिसमें 2,000 से ज्यादा प्रजातियां शामिल हैं।
यह आयात न केवल संरक्षण के लिए है, बल्कि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और निजी क्षेत्र की भागीदारी को दर्शाता है। सीआईटीईएस (कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज) की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2019 से 2023 तक वंतारा ने 3,819 से अधिक जानवरों को ग्रहण किया, जिनमें से कई दक्षिण अफ्रीका, वेनेजुएला और कांगो से आए। यह संख्या भारत को जंगली जानवरों के आयात में वैश्विक лидер बनाती है, जहां पिछले दो वर्षों में ही दो भारतीय संस्थानों ने 35,000 जानवरों का आयात किया।

आंकड़ों में भारत का उदय
- कुल आयात: हाल के चार वर्षों में भारतीय चिड़ियाघरों में 6,400 से अधिक जानवर आयातित हुए। दिलचस्प बात यह है कि 1978 से अब तक के कुल चिड़ियाघर आयातों का लगभग 90% हिस्सा हाल के वर्षों में ही हुआ है। यह दर्शाता है कि भारत की नीतियां और बुनियादी ढांचा अब वैश्विक स्तर पर जानवरों को आकर्षित करने में सक्षम हैं।
- प्रजातियों की विविधता: आयातित जानवरों में पक्षी, सरीसृप, एप्स (वानर) और बड़े बिल्लियां शामिल हैं। उदाहरण के लिए, वंतारा में दक्षिण अफ्रीका से आयातित शेर, चीतों के अलावा, दुर्लभ प्रजातियां जैसे अमूर फाल्कन और बारासिंघा भी संरक्षित हैं।
- स्रोत देश: अधिकांश आयात दक्षिण अफ्रीका (जो कैप्टिव ब्रिडिंग के लिए प्रसिद्ध है), वेनेजुएला और कांगो से हुए। यह भारत की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करता है, लेकिन सीआईटीईएस ने इस पर चिंता जताई और 2025 में आयात पर अस्थायी रोक की सिफारिश की, जिसे बाद में जांच के बाद वापस ले लिया गया।
- आर्थिक प्रभाव: वन्यजीव पर्यटन में 15% की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। भारत में 52 टाइगर रिजर्व, 104 नेशनल पार्क और 550 वन्यजीव अभयारण्य हैं, जो जानवरों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं।
ये आंकड़े भारत की संरक्षण रणनीति की सफलता को रेखांकित करते हैं। जहां एक ओर निजी चिड़ियाघर जैसे वंतारा ने बड़े पैमाने पर आयात को संभव बनाया, वहीं सरकारी पहल जैसे प्रोजेक्ट टाइगर ने स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा दिया। हालांकि, विवाद भी हैं – पर्यावरणविदों का कहना है कि बड़े पैमाने पर आयात से स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की जांच ने वंतारा को क्लीन चिट दी।
भारत की प्रेम कहानी: टाइगर से आगे
भारत का टाइगर प्रेम जगजाहिर है – यहां दुनिया के आधे से अधिक टाइगर हैं। लेकिन आयात ने विविधता बढ़ाई है। जंगलोर जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से हर दर्शन को एक कहानी में बदल दिया जा रहा है। भारत की जैव विविधता, जो दुनिया की 8% प्रजातियों को आश्रय देती है, अब वैश्विक जानवरों को भी आमंत्रित कर रही है।
निष्कर्ष में, तथ्यों और आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत की मजबूत नीतियां, निजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने इसे जंगली जानवरों का नंबर 1 गंतव्य बना दिया है। यह न केवल संरक्षण की जीत है, बल्कि भविष्य की पर्यटन और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में एक कदम है।
