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चंद्रमा की दहलीज पर फिर से इंसान: आर्टेमिस II के साथ अंतरिक्ष के नए युग का आगाज़

NASA’s Artemis II is the first crewed test flight of the Orion spacecraft in deep space since Apollo, launching on April 1, 2026, aboard the SLS rocket. The approximately 10-day mission sends four astronauts — NASA’s Reid Wiseman (Commander), Victor Glover (Pilot), Christina Koch (Mission Specialist), and CSA’s Jeremy Hansen — on a journey around the Moon and back, totaling 695,081 miles. The crew will perform a lunar flyby, passing within 4,070 miles of the lunar surface and reaching a maximum distance of 252,760 miles from Earth — surpassing Apollo 13’s record by about 4,105 miles. Key activities include testing Orion’s life-support, propulsion, navigation, and thermal systems; manual operations; proximity activities; habitability assessments; and lunar observations from both near and far sides. During the flyby on April 6, the crew will conduct a seven-hour observation period, break the farthest-human-travel record, and capture imagery. They have access to 189 menu items for nutrition. The mission’s goals focus on validating systems for sustained lunar exploration, emergency procedures, and crew performance in deep space. Splashdown is scheduled for April 10, 2026, at approximately 8:07 p.m. EDT off San Diego’s coast, with recovery aboard the USS John P. Murtha. The flight paves the way for future Artemis landings, demonstrating human capabilities beyond low Earth orbit.

–जयसिंह रावत –

नासा का आर्टेमिस II मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया अध्याय लिख रहा है। 1 अप्रैल को फ्लोरिडा से रवाना हुए चार अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन—ओरियन यान में सवार होकर चंद्रमा की 10 दिवसीय यात्रा पर हैं। यह मिशन पृथ्वी से 2,52,760 मील की रिकॉर्ड दूरी तय कर रहा है, जो अपोलो 13 से भी अधिक है। चालक दल गहरे अंतरिक्ष में यान की जीवन-रक्षक प्रणालियों और नेविगेशन का परीक्षण कर रहा है। 6 अप्रैल को चंद्रमा के ‘लूनर फ्लाईबी’ के दौरान यात्री इसकी सतह का मानवीय अवलोकन करेंगे। यह ऐतिहासिक मिशन 10 अप्रैल को सैन डिएगो तट पर सुरक्षित लैंडिंग के साथ समाप्त होगा, जो भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों का आधार बनेगा।

अतुलनीय दूरियां और रिकॉर्ड तोड़ने का जज़्बा

आर्टेमिस II मिशन के दौरान ओरियन यान कुल 6,95,081 मील की लंबी दूरी तय करेगा। इस यात्रा का सबसे रोमांचक मोड़ वह होगा जब यह यान पृथ्वी से 2,52,760 मील की अधिकतम दूरी पर पहुँच जाएगा। यह दूरी वर्ष 1970 में अपोलो 13 मिशन द्वारा बनाए गए पिछले रिकॉर्ड से भी लगभग 4,105 मील अधिक है। यात्रा के दौरान चालक दल चंद्रमा की सतह के मात्र 4,070 मील ऊपर से गुजरेगा। इस मिशन का उद्देश्य केवल दूरी तय करना नहीं है, बल्कि ओरियन की जीवन-रक्षक प्रणालियों, प्रणोदन और नेविगेशन तकनीकों को उस परिवेश में जांचना है जहाँ ज़रा सी चूक की कोई गुंजाइश नहीं होती। यह यान अपनी गति और दिशा को नियंत्रित करते हुए चंद्रमा के ‘फार साइड’ यानी उस हिस्से को भी देखेगा जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता।

चंद्रमा के साये में एक रोमांचक फ्लाईबी

मिशन के छठे दिन यानी 6 अप्रैल को पूरी दुनिया की नज़रें ओरियन पर टिकी रहेंगी, क्योंकि यही वह समय है जब ‘लूनर फ्लाईबी’ की गतिविधियां शुरू होंगी। जब ओरियन चंद्रमा के पीछे के हिस्से में प्रवेश करेगा, तो पृथ्वी के मिशन कंट्रोल सेंटर से इसका संपर्क कुछ समय के लिए टूट जाएगा। यह वह क्षण होगा जब अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा को अपनी आंखों से इतनी करीब से देखेंगे जैसे हाथ में पकड़ी हुई कोई बास्केटबॉल हो। नासा ने इस दौरान विशेष अवलोकन सत्रों की योजना बनाई है। हालांकि हमारे पास अत्याधुनिक रोबोटिक कैमरे मौजूद हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव आंखें रंगों, बनावट और सतह की बारीकियों में उन सूक्ष्म अंतरों को पहचान सकती हैं जिन्हें मशीनें शायद न पकड़ पाएं। यह मानवीय अवलोकन भविष्य के उन मिशनों के लिए आधार तैयार करेगा जहाँ इंसान चंद्रमा की सतह पर उतरकर वहां बस्तियां बसाने की दिशा में काम करेगा।

अंतरिक्ष का स्वाद और आधुनिक जीवनशैली

चंद्रमा की कक्षा में चक्कर काटते हुए अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत और मानसिक सतर्कता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए नासा ने एक विस्तृत मेनू तैयार किया है जिसमें 189 अलग-अलग खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इन अंतरिक्ष यात्रियों के पास न केवल कॉफी और स्मूदी जैसे पेय पदार्थ हैं, बल्कि टॉरटिला, बीबीक्यू बीफ ब्रिसकेट, मैकरोनी एंड चीज़ और चॉकलेट जैसे व्यंजनों का भी आनंद लेने की सुविधा है। यह भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं बल्कि कैलोरी, हाइड्रेशन और पोषक तत्वों के संतुलन को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यान के भीतर और बाहर लगे 32 कैमरे हर पल की गतिविधियों को कैद कर रहे हैं, जिनमें से कुछ कैमरे खुद चालक दल द्वारा संचालित किए जाते हैं ताकि दुनिया को गहरे अंतरिक्ष का वह अनुभव मिल सके जो अब तक केवल कल्पनाओं में था।

वापसी का कठिन मार्ग और भविष्य की संभावनाएं

10 दिनों की इस चुनौतीपूर्ण यात्रा का समापन 10 अप्रैल को सैन डिएगो के तट पर एक ‘स्पलैशडाउन’ के साथ होगा। समुद्र में उतरने के बाद रिकवरी टीमें हेलीकॉप्टरों की मदद से चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालेंगी। यह पूरी प्रक्रिया नासा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आर्टेमिस III मिशन की नींव रखेगी, जिसके तहत पहली बार किसी महिला और अश्वेत व्यक्ति को चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा। आर्टेमिस II की सफलता यह प्रमाणित करेगी कि इंसान गहरे अंतरिक्ष की प्रतिकूल परिस्थितियों में न केवल जीवित रह सकता है, बल्कि वहां रहकर जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों को भी अंजाम दे सकता है। यह मिशन चंद्रमा पर एक स्थायी आधार बनाने और अंततः मंगल ग्रह तक पहुँचने के मानव जाति के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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