क्राइमराष्ट्रीय

अब तक की सबसे बड़ी ड्रग लैब का भंडाफोड़, 52 किलो मेथम्फेटामाइन जब्त

Acting on a specific intelligence received by the Neemuch branch, Madhya Pradesh, of Central Bureau of Narcotics (CBN), on the night of 13.02.2026, the CBN recovered 8.172 kg of high-quality crystal MD/Methamphetamine from two passengers travelling in a bus at Mandsaur. Acting swiftly on the input, a team from CBN Neemuch was constituted and dispatched to Mandsaur. Given the limited time, officers at Mandsaur were alerted telephonically and promptly intercepted the suspect bus. After the arrival of the Neemuch, search proceedings were initiated in accordance with the provisions of the NDPS Act, 1985.

नयी दिल्ली, 19 फरबरी (PIB)। मध्य प्रदेश में अब तक किसी भी एजेंसी द्वारा चलाए गए सबसे बड़े अभियानों में से एक के दौरान केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) के अधिकारियों ने इंदौर जिले की महू तहसील के थवलाय गांव में संचालित एक अवैध कारखाने का भंडाफोड़ किया। तीन दिनों तक चले इस व्यापक अभियान में सीबीएन ने 43.820 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली मेथम्फेटामाइन (एमडी), 260 किलोग्राम से अधिक रसायन तथा अत्याधुनिक उपकरण जब्त किए। पूरे अभियान के दौरान कुल 51.992 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन बरामद की गई। बरामद सभी प्रतिबंधित पदार्थों और रसायनों को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत जब्त किया गया।

मध्य प्रदेश स्थित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की नीमच शाखा को प्राप्त विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर 13 फरवरी 2026 की रात मंदसौर में एक बस में यात्रा कर रहे दो व्यक्तियों के पास से 8.172 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली क्रिस्टल मेथम्फेटामाइन (एमडी) बरामद की गई।

सूचना मिलते ही सीबीएन नीमच से एक टीम गठित कर मंदसौर रवाना की गई। समय की संवेदनशीलता को देखते हुए मंदसौर के अधिकारियों को दूरभाष पर सूचित किया गया, जिन्होंने तुरंत संदिग्ध बस को रोक लिया। नीमच टीम के पहुंचने के बाद एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत विधिवत तलाशी अभियान प्रारंभ किया गया।

तलाशी के दौरान एक यात्री के पास से एक संदिग्ध डिब्बा बरामद हुआ। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसमें मेथम्फेटामाइन (एमडी) है। आगे की जांच में उसके एक सहयोगी की पहचान हुई, जो अलग सीट पर बैठा था। उसकी सीट के नीचे से भी एक अन्य संदिग्ध डिब्बा बरामद किया गया। दोनों डिब्बों की जांच करने पर उनमें कुल पांच पॉलीथीन पैकेट मिले, जिनमें क्रिस्टल रूप में पैक की गई 8.172 किलोग्राम उच्च शुद्धता वाली मेथम्फेटामाइन बरामद हुई। दोनों आरोपियों ने प्रतिबंधित पदार्थ अपने कब्जे में होने की बात स्वीकार की। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वे यह मेथम्फेटामाइन एक गुप्त विनिर्माण प्रयोगशाला से ला रहे थे।

इस खुलासे के बाद सीबीएन ने तत्काल उज्जैन, जावरा, मंदसौर और नीमच शाखाओं के अधिकारियों की एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया, ताकि समन्वित तलाशी अभियान चलाकर संदिग्ध प्रयोगशाला का पता लगाया जा सके। आगे की जांच में महू के निकट स्थित उक्त गुप्त प्रयोगशाला की पहचान की गई।

इसके उपरांत नीमच, मंदसौर, जावरा और उज्जैन से सीबीएन की संयुक्त टीमों ने विनिर्माण स्थल का पता लगाने हेतु मध्यरात्रि से तलाशी अभियान प्रारंभ किया। अगले दिन प्रातः टीम को सफलता मिली।

14 फरवरी 2026 की सुबह अधिकारियों ने संदिग्ध परिसर की पहचान की, जिसके प्रवेश द्वार पर लोहे का गेट और दो ताड़ के पेड़ थे। परिसर से निकल रहे तीव्र रासायनिक धुएं और असहनीय गंध के कारण संभावित स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए तत्काल प्रवेश नहीं किया गया। इसके बाद उपयुक्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) से सुसज्जित एक विशेष दल को नीमच से मौके पर भेजा गया।

प्रयोगशाला के भीतर आधुनिक मशीनरी और संयंत्र उपकरण स्थापित पाए गए। इन अत्याधुनिक उपकरणों को निष्क्रिय एवं ध्वस्त करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता थी। अतः नीमच स्थित सरकारी अफीम एवं एल्कलॉइड कारखाना (जीओएडब्ल्यू) से तकनीकी सहायता मांगी गई। जीओएडब्ल्यू नीमच के इंजीनियरों और रसायनशास्त्रियों की चार सदस्यीय टीम 15 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि को घटनास्थल पर पहुंची। संयंत्र और मशीनरी को विधिवत नष्ट कर सीबीएन द्वारा जब्त कर लिया गया। संपूर्ण कार्यवाही 15 फरवरी 2026 की सुबह संपन्न हुई।

मंदसौर के बीपीएल चौराहा क्षेत्र से पकड़े गए दोनों आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिस मकान में गुप्त प्रयोगशाला संचालित की जा रही थी, उसके मालिक को भी कार्यवाही के दौरान हिरासत में लिया गया।

कृत्रिम मादक पदार्थों के निर्माण और वितरण में संलिप्त व्यापक नेटवर्क की पहचान एवं उसके उन्मूलन के लिए आगे की जांच जारी है।

यह अभियान सीबीएन अधिकारियों की प्रतिबद्धता, समन्वय और पेशेवर दक्षता का प्रतीक है। सीमित सूचना और अत्यंत कम समय के बावजूद राज्य की सबसे बड़ी अवैध सिंथेटिक ड्रग प्रयोगशालाओं में से एक का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया गया। त्वरित खुफिया कार्रवाई, अंतर-जिला समन्वय और जीओएडब्ल्यू नीमच से प्राप्त तकनीकी सहयोग के कारण एक प्रमुख अवैध मादक पदार्थ निर्माण इकाई को ध्वस्त किया जा सका।

सीबीएन मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए भारत को नशामुक्त बनाने के संकल्प के प्रति दृढ़ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!