सुरक्षा

भारत अब रक्षा सामग्रियों का निर्माता बनेगा, उपभोक्ता नहीं : रक्षा मंत्री 

लखनऊ, 19 अक्टूबर ।रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए यह ज़रूरी है कि देश रक्षा और एयरोस्पेस में इस्तेमाल होने वाली दुर्लभ सामग्रियों (Rare Materials) का उत्पादन खुद करे।

वे लखनऊ स्थित पीटीसी इंडस्ट्रीज के स्ट्रैटेजिक मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी कॉम्प्लेक्स में निर्मित टाइटेनियम और सुपरलॉय मैटेरियल्स प्लांट राष्ट्र को समर्पित करने के अवसर पर बोल रहे थे।

भारत अब “टेक्नोलॉजी मेकर” बनने की ओर

रक्षा मंत्री ने कहा कि अतीत में भारत रक्षा और एयरोस्पेस के लिए आवश्यक उन्नत सामग्रियों और तकनीकों के लिए विदेशों पर निर्भर था, जिससे प्रगति की रफ्तार धीमी रही।
“आज का यह संयंत्र इस प्रवृत्ति को उलट देगा,” उन्होंने कहा।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत तभी अपनी असली ताकत हासिल करेगा, जब वह अपनी सामग्री, कलपुर्जे, चिप्स और मिश्रधातुएं (Alloys) स्वयं तैयार करेगा।

उन्होंने कहा, “यह नया प्लांट भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करता है, जो अपने लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, नौसैनिक प्रणालियों और उपग्रहों के लिए आवश्यक सामग्रियों का निर्माण स्वयं करते हैं।”

टेक्नोलॉजी शक्ति है, पर असली ताकत सामग्री है”

सिंह ने कहा —

> “चाहे वह सेमीकंडक्टर चिप हो, बुलेट-प्रूफ सामग्री हो या इंजन टरबाइन का पुर्जा — रणनीतिक सामग्रियों के बिना कुछ भी संभव नहीं है। हम एक ऐसी मज़बूत नींव तैयार कर रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी संप्रभुता को सुरक्षित करेगी।”

उन्होंने इस संयंत्र को ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जीवंत उदाहरण बताया और कहा कि इससे उद्योग जगत, युवाओं और समाज सभी को लाभ होगा। यह संयंत्र न केवल रक्षा क्षेत्र में नवाचार श्रृंखला को गति देगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा।

उत्तर प्रदेश बनेगा एशिया का प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र

रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सामरिक सामग्री प्रौद्योगिकी परिसर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र में नया अध्याय जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह प्लांट सहायक इकाइयों और आपूर्तिकर्ता उद्योगों के माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा करेगा।

उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा आने वाले समय में एशिया के सबसे उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में से एक बनेगा।”
श्री सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश-अनुकूल माहौल के कारण राज्य आज ‘देश का विकास इंजन’ बन चुका है।

डिज़ाइन इन इंडिया” की ओर कदम

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत की मानसिकता बदल चुकी है —

> “हम केवल मेक-इन-इंडिया तक सीमित नहीं हैं, अब हम डिज़ाइन, डेवलप और डिलीवर इन इंडिया की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।”

उन्होंने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका की सराहना की और कहा कि सरकार और उद्योग जगत के सहयोग से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

युवाओं और स्टार्ट-अप्स के लिए अवसरों का नया द्वार

श्री राजनाथ सिंह ने युवाओं, नवप्रवर्तकों और एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ केवल व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के रूप में लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि “आज जो कार्य हो रहे हैं, वे नवाचार की नई पीढ़ी को प्रेरित करेंगे।”
उन्होंने रक्षा निर्माण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की प्रगति की सराहना करते हुए आश्वासन दिया कि सरकार हर स्तर पर नीतिगत सहयोग देगी।

महत्वपूर्ण समझौते और तकनीकी उपलब्धियां

इस अवसर पर पीटीसी इंडस्ट्रीज लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के बीच मिसाइलों, यूएवी और लोइटरिंग हथियारों के प्रणोदन प्रणालियों तथा छोटे एयरो-इंजनों के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम (Joint Venture) के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

इसके अतिरिक्त, पीटीसी इंडस्ट्रीज को डीआरडीओ के अंतर्गत सेमिलैक (CEMILAC) से एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए टाइटेनियम रियर फिन रूट कास्टिंग और कावेरी डेरिवेटिव इंजन (KDE-2) के लिए ऑयल टैंक असेंबली के स्वदेशी निर्माण हेतु तकनीकी स्वीकृति पत्र प्राप्त हुए।

सामरिक सामग्री स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक कदम

50 एकड़ में फैले इस कॉम्प्लेक्स की स्थापना 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से की गई है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 6,000 टन से अधिक है। यह संयंत्र भारत को घरेलू और पुनर्चक्रित स्रोतों से विमानन-ग्रेड टाइटेनियम और सुपरअलॉय तैयार करने में सक्षम बनाएगा — जो भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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