भारत के मीडिया और मनोरंजन जगत के भविष्य में छलांग

मुख्य बिंदु
- भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र एक उभरता हुआ उद्योग है। डिजिटल नवोन्मेष और रचनात्मक प्रौद्योगिकी विकास से संचालित इस उद्योग के 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का हो जाने का अनुमान है।
- भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) नेटफ्लिक्स, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनविडिया और अन्य के साथ वैश्विक सहयोग के जरिए सृजनात्मक शिक्षा को नया स्वरूप दे रहा है। इस तरह वह एक विश्व स्तरीय प्रतिभा परिवेश का निर्माण कर रहा है।
- भारतीय वीएफएक्स और एनिमेशन स्टूडियो वैश्विक सिनेमा में अब एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अवतार, थोर: द डार्क वर्ल्ड और गेम ऑफ थ्रोंस जैसी बेहद कामयाब फिल्मों में उनका योगदान रहा है।
- A PIB FEATURE-
डिजिटल नवोन्मेष, युवा प्रेरित मांग और रचनात्मक उद्यमिता के विस्फोट से सशक्त भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र देश के सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में से एक के तौर पर उभरा है। सरकार ने इसे सेवा अर्थव्यवस्था के अंदर उच्च संभावना वाले क्षेत्र के रूप में मान्यता दी है। इस क्षेत्र के लगभग 7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि सालाना दर से बढ़ते हुए 2027 तक 3067 अरब रुपए का हो जाने का अनुमान है।1 राष्ट्रीय परिदृश्य के अनुसार 2030 तक यह उद्योग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का हो जाएगा। इससे भारत के विषय वस्तु उपभोक्ता राष्ट्र से बौद्धिक संपदा के वैश्विक निर्माता और निर्यातक में निर्णायक बदलाव का संकेत मिलता है।1
इस क्षेत्र के लिए रणनीतिक दृष्टि तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित हैः

मौजूदा पहलकदमियों का उद्देश्य प्रशिक्षण में निवेश, डिजिटल अवसंरचना और नवोन्मेष आधारित संस्थानों के माध्यम से एनिमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग और विस्तारित रियलटी (एवीजीसी-एक्सआर) में स्वदेशी क्षमता को मजबूत करना है। सभी क्षेत्रों और भाषाई सीमाओं की समावेशी भागीदारी इस नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। इसके जरिए सुनिश्चित किया जा रहा है कि रचनात्मक अवसरों का महानगरीय समूहों से आगे उभरती सांस्कृतिक अर्थव्यवस्थाओं में भी विस्तार हो।
आर्थिक तौर पर मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र मूल्य संवर्द्धन और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान करता है। उसका सकल मूल्य संवर्द्धित हिस्सा पिछले दशक से लगातार बढ़ रहा है। भारत एनिमेशन और वीएफएक्स सेवाओं में 40 से 60 प्रतिशत तक किफायत प्रदान करता है। उसके पास एक बड़ा और कुशल कार्यबल भी है। इस तुलनात्मक लाभ की वजह से अंतरराष्ट्रीय परियोजनाएं भारत की ओर लगातार आकर्षित हो रही हैं। परिणामस्वरूप भारत को वैश्विक निर्माण पश्चात कार्यों के लिए तरजीह मिल रही है। इस क्षेत्र का बढ़ता वैश्विक प्रभाव डिजिटल मीडिया में भी दिखाई देता है। भारतीय ओटीटी विषय वस्तु की कुल दर्शक संख्या का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा विदेशी दर्शकों का है। इससे भारतीय रचनात्मक विषय वस्तु के वाणिज्यिक आकर्षण के साथ ही सांस्कृतिक कूटनीति में इसकी बढ़ती भूमिका का भी संकेत मिलता है। भारतीय कहानियां विभिन्न महाद्वीपों में भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध कायम कर रही हैं।1
एवीजीसी-एक्सआर क्रांति

इस रचनात्मक पुनरुत्थान की सबसे गतिशील अभिव्यक्ति एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में मिलती है। इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी, कहानी कला और नवोन्मेष मिल कर भारतीय मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के विकास के अगले अध्याय को परिभाषित कर रहे हैं। यहां भारत की रचनात्मक महत्वाकांक्षा और डिजिटल क्षमता के मिलन से दर्शकों के वास्ते कथा वस्तु निर्माण से विश्व के लिए अनुभव को आकार देने की ओर परिवर्तन का पता चलता है।
उत्पत्ति और संस्थागत ढांचा
एनिमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग, कॉमिक्स और विस्तारित रियलटी क्षेत्र को विकास के मुख्य वाहक के रूप में औपचारिक मान्यता मिलने के साथ ही भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था एक परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर गई है। वर्ष 2022 में एवीजीसी प्रोत्साहन कार्य बल के गठन के साथ ही नीतिगत यात्रा को रफ्तार मिल गई। इस कार्य बल के गठन का उद्देश्य भारत के एवीजीसी-एक्सआर परिवेश को रचनात्मक प्रौद्योगिकी और डिजिटल कथावस्तु निर्माण के वैश्विक केंद्र के तौर पर पोषित करने के लिए एक विस्तृत राष्ट्रीय रणनीति तैयार करना था। इस कार्य बल ने ‘भारत में निर्माण’ पर केंद्रित राष्ट्रीय एवीजीसी-एक्सआर मिशन शुरू करने की सिफारिश की। इसका उद्देश्य देश को डिजिटल कथावस्तु सृजन और रचनात्मकता के वैश्चिक केंद्र के रूप में स्थापित करना था।4 एवीजीसी संवर्द्धन कार्य बल की रिपोर्ट में इस क्षेत्र में अगले दस वर्षों में लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान व्यक्त किया गया। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया कि यह क्षेत्र निर्माण, निर्यात और संबंधित सेवाओं के जरिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद में योगदान कर सकता है।4
भारत की एवीजीसी-एक्सआर यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रतिभा और नवोन्मेष के पोषण के लिए समर्पित एक संस्थागत ढांचे का निर्माण है। एवीजीसी-एक्सआर के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) को सरकार ने 2024 को मंजूरी दी। इसे एनिमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग और इमर्सिव मीडिया में प्रशिक्षण, अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग की शीर्ष संस्था के रूप में स्थापित किया गया है।6
2024 में एवीजीसी-एक्सआर के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) का महाराष्ट्र के मुंबई में उद्घाटन किया गया।6 भारतीय कंपनी कानून की धारा 8 के अंतर्गत6 गठित यह संस्थान आर्थिक लाभ के लिए नहीं बनाया गया है। यह अपने संसाधनों का संस्था के विकास के लिए पुनर्निवेश करता है। यह संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार को एक मंच पर लाने का काम करता है। आईआईसीटी आधुनिक पाठ्यक्रम के विकास तथा साझा अनुसंधान और वैश्विक उद्योग संपर्क को बढ़ावा देकर रचनाकारों और नवोन्मेषकों की एक नई पीढ़ी को आकार दे रहा है। इस तरह यह भारत को वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था में नेतृत्वकारी स्थिति प्रदान कर रहा है।
आईआईसीटी- परिकल्पना से हकीकत तक
- मई 2025: भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) की कंपनी कानून की धारा 8 के अंतर्गत स्थापना की गई। इसका उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान और नवोन्मेष के जरिए भारत के एवीजीसी-एक्सआर परिवेश को उन्नत बनाना तथा नीतिगत इरादों को संस्थागत कार्रवाई में बदलना है।
- मई 2025: आईआईसीटी ने मिल कर पाठ्यक्रम विकसित करने, इंटर्नशिप और वजीफा मुहैया कराने तथा उद्भवन और मार्गदर्शन के जरिए रचनात्मक प्रौद्योगिकी स्टार्टअप संस्थाओं को सहायता देने के उद्देश्य से गूगल, यूट्यूब, मेटा, एडोबे, माइक्रोसॉफ्ट, एनविडिया, वैकॉम और जियोस्टार के साथ औद्योगिक साझीदार के तौर पर हाथ मिलाया।
- 15 जुलाई 2025: उद्योग विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श से विकसित किए गए गेमिंग, निर्माण पश्चात प्रक्रियाओं, एनिमेशन, कॉमिक्स और एक्सआर में विशेष पाठ्यक्रमों के पहले अकादमिक सत्र में दाखिला शुरू। आईआईसीटी ने शिक्षकों के आदान-प्रदान, अनुसंधान में सहयोग और विश्व स्तरीय पाठ्यक्रम विकास के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क (ब्रिटेन) के साथ करार किया।
- 18 जुलाई 2025: आईआईसीटी के पहले परिसर का राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) कॉम्प्लेक्स, मुंबई में उद्घाटन। इसमें 400 करोड़ रुपए के शुरुआती बजट से पहले बैच में प्रोफेशनल कौशल उन्नयन मॉड्यूल के साथ लगभग 300 छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया।
- 30 अगस्त, 2025: रचनात्मक उद्यमिता के परिपोषण के लिए वेवएक्स मीडिया-टेक स्टार्टअप इंक्यूबेटर की शुरुआत की गई। इसके पहले जत्थे में 15 स्टार्टअप को शामिल कर उन्हें मार्गदर्शन, अवसंरचना और वैश्विक साझीदारों तक पहुंच मुहैया कराई जा रही है।
- 7 अक्टूबर 2025: आईआईसीटी ने मिल कर पाठ्यक्रम तैयार करने और विशेषज्ञ कक्षाएं चलाने के लिए फिक्की और नेटफ्लिक्स के साथ करार किया। इस करार के तहत नेटफ्लिक्स रचनात्मक अंशधारिता कोष से छात्रवृत्ति भी दी जानी है। इससे विषयवस्तु की वैश्विक विशेषज्ञता को भारत के रचनात्मक शिक्षा परिवेश में जोड़ा जा सकेगा।
नीतिगत प्रगति

कई राज्य राष्ट्रीय पहलों के पूरक के रूप में लक्षित नीतियों और संस्थागत ढाँचों के माध्यम से एवीजीसी-एक्सआर दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं। कर्नाटक कौशल विकास, इनक्यूबेशन और वैश्विक बाज़ार प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित एक समर्पित एवीजीसी-एक्सआर नीति 2024-2029 को लागू करने वाला पहला राज्य है।9 महाराष्ट्र ने भी इस वर्ष सितंबर में अपनी एवीजीसी-एक्सआर नीति 2025 को मंजूरी दे दी है। इसके लिए 3,268 करोड़ रुपये की वित्तीय योजना और 2050 तक विस्तारित दीर्घकालिक रोडमैप रखा गया है। नीति का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, रोजगार के अवसर पैदा करना और समर्पित समूहों और प्रशिक्षणों के माध्यम से राज्य-स्तरीय निर्माण के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है।10
नीतिगत सुधार और बुनियादी ढांचा विकास
अपडेटेड सिनेमा कानूनों और डिजिटल-गवर्नेंस ढांचे से लेकर एकीकृत निर्माण सुविधाओं के विकास तक, निम्नलिखित कदम वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार मीडिया और मनोरंजन उद्योग के निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं:
सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023
सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023, भारत के फिल्म कानून में ऐतिहासिक सुधार का प्रतिनिधित्व करता है। यह संशोधन सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 195212 के नियामक और प्रवर्तन ढाँचे को मज़बूत करता है और फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और वितरण पर अंकुश लगाने के लिए इस अधिनियम में पहली बार कड़े एंटी-पायरेसी प्रावधान समाविष्ट किये गए हैं।13 धारा 6एए और 6एबी डिजिटल पायरेसी को दंडनीय अपराध बनाती है, जिसमें तीन साल तक की कैद और फिल्म की ऑडिट की गई कुल निर्माण लागत का 5 प्रतिशत तक जुर्माना हो सकता है। नई शुरू की गई धारा 7(1बी) (ii) सरकार को डिजिटल उल्लंघन के खिलाफ समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए, अपने प्लेटफार्मों पर दिखाई गई पायरेटेड फिल्म सामग्री को हटाने या प्रतिबंधित करने के लिए ऑनलाइन मध्यस्थों को निर्देशित करने के लिए अधिकृत करती है।14
यह अधिनियम आयु-आधारित प्रमाणन प्रणाली लागू करके, टेलीविजन और ओटीटी रिलीज़ के लिए पुनः प्रमाणन को सुव्यवस्थित करके और फिल्मों के लिए स्थायी प्रमाणन वैधता को सक्षम करके प्रमाणन की प्रक्रिया को आधुनिक बनाता है। ये प्रावधान रचनात्मक स्वतंत्रता को दर्शकों की सुरक्षा और विषय-वस्तु की अखंडता के साथ जोड़ते हैं। सरकार के व्यापक मीडिया-सुधार एजेंडे के तहत प्रमुख नीतिगत पहलों में यह संशोधन एक पारदर्शी, सुरक्षित और नवोन्मेष-अनुकूल सिनेमाई पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय प्रसारण नीति
राष्ट्रीय प्रसारण नीति का उद्देश्य भारत के प्रसारण परिवेश के लिए एक आधुनिक, समावेशी और विकासोन्मुखी ढाँचा तैयार करना है। यह नीति नैतिक मानकों, बौद्धिक संपदा संरक्षण और दर्शकों के विश्वास को सुनिश्चित करते हुए, विषय-वस्तु विविधता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और डिजिटल अवसंरचना में निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी। इस नीति का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देकर, स्थानीय सामग्री निर्माण का समर्थन करना और भविष्य के लिए तैयार संचार वातावरण बनाने के लिए पारंपरिक प्रसारण को उभरते डिजिटल प्लेटफार्मों के साथ मिलाकर मीडिया और मनोरंजन में भारत की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करना है।16
इंडिया सिने हब
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत विकसित और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) द्वारा प्रबंधित इंडिया सिने हब (आईसीएच), पूरे भारत में फिल्म सुविधा के लिए एक ही मंच के रूप में कार्य करता है। इस हब से प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने और एक वैश्विक फिल्मांकन स्थल के रूप में भारत की लोकप्रियता को बढ़ाया जा सकेगा।

अनुमतियों, प्रोत्साहनों और निर्माण संसाधनों को एकीकृत करके, इंडिया सिने हब भारत के सुगम फिल्म निर्माण परिवेश की डिजिटल रीढ़ बन गया है, जिससे देश की स्थिति एक प्रमुख वैश्विक फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में मजबूत हुई है।17
वेव्स: रचनात्मक सहयोग के लिए भारत का वैश्विक मंच

विश्व श्रव्य-दृश्य एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) भारत का पहला एकीकृत मंच है जो देश की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और सुदृढ़ करता है। यह मंच फिल्म, टेलीविजन, ओटीटी, एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग और एक्सआर क्षेत्रों के नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, रचनाकारों और निवेशकों को एक जगह लाने का काम करता है।
इस शिखर सम्मेलन को 1 से 4 मई 2025 तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया और माननीय प्रधानमंत्री19 ने इसका उद्घाटन किया था। इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के प्रतिभागी और कंटेंट, तकनीक और निवेश क्षेत्र की प्रमुख वैश्विक हस्तियाँ एक साथ आईं। चार दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में मंत्रिस्तरीय राऊंड टेबल बैठकें, बाज़ार स्क्रीनिंग, निवेशक मंच, मास्टरक्लास और बी2बी नेटवर्किंग शामिल थीं। इस सम्मलेन ने वैश्विक मीडिया परिदृश्य में भारत के नेतृत्व के लिए मंच तैयार किया।
सम्मलेन के प्रमुख आकर्षणों में वैश्विक मीडिया सहयोग पर वेव्स घोषणापत्र को अपनाना, वेव्स बाज़ार के माध्यम से 1,328 करोड़ रूपए के व्यवसाय का सृजन, और मीडिया-टेक स्टार्ट-अप्स के लिए वेवएक्स में 50 करोड़ रूपए के निवेश पूल का अनावरण शामिल था। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण पर आधारित, वेव्स रचनात्मक तकनीकों, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और अंतर्राष्ट्रीय सह-निर्माण साझेदारियों के केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
उपलब्धियां और प्रभाव
इस क्षेत्र में भारत का फिल्म तकनीक के क्षेत्र में किया गया विकास, प्रयोग से उत्कृष्टता की ओर एक दशक लंबी प्रगति को दर्शाता है। रा.वन (2011), बाहुबली: द बिगिनिंग (2015), और ब्रह्मास्त्र (2022) जैसी फिल्मों में मोशन कैप्चर और कंप्यूटर-जनरेटेड इमेजरी (सीजीआई) के इस्तेमाल ने उच्च-स्तरीय प्रोडक्शन में शुरुआती घरेलू क्षमता का प्रदर्शन किया।21 तब से, भारतीय स्टूडियो तेज़ी से आगे बढ़े हैं और फिल्म निर्माण में इमर्सिव स्टोरीटेलिंग अनुभव प्रदान करने के लिए वास्तविक समय में प्रस्तुत करने, वॉल्यूमेट्रिक कैप्चर और वर्चुअल-प्रोडक्शन के तरीकों को अपनाया गया है। इस बढ़ती तकनीकी परिपक्वता से वैश्विक पोस्ट-प्रोडक्शन और वीएफएक्स बाज़ारों में भारत की प्रतिस्पर्धिता मज़बूत हुई है। उन्नत रचनात्मक कार्यों को भारतीय प्रतिष्ठानों को आउटसोर्स करने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्टूडियो की संख्या बढ़ रही है।
एवीजीसी-एक्सआर परिवेश, पेशेवर प्रशिक्षण और रचनात्मक क्षमता निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति का गवाह रहा है।
कौशल एवं कार्यबल विकास
मीडिया और मनोरंजन कौशल परिषद (एमईएससी) के नेतृत्व में की गई पहल के माध्यम से, पेशेवरों को एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन जैसे विशिष्ट विषयों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।22 उद्योग-अकादमिक सहयोग से ऐसे योग्यता मानकों और मॉड्यूलर पाठ्यक्रमों का विकास हुआ है जो अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों पर खरे उतरते हैं।
परिवेश का विकास और वैश्विक उपस्थिति
दृश्य प्रभावों और एनीमेशन में भारत की बढ़ती महारत ने इसे दुनिया के सबसे पसंदीदा रचनात्मक स्थलों में से एक बना दिया है। देश के स्टूडियो अब बड़े पैमाने पर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियों का अभिन्न अंग बन गए हैं और वैश्विक मनोरंजन के क्षेत्र में कुछ सबसे जटिल दृश्य परियोजनाओं में अपना योगदान दे रहे हैं। यह विकास सेवा-आधारित आउटसोर्सिंग से उच्च-मूल्य रचनात्मक सहयोग की ओर इस क्षेत्र के बदलाव को दर्शाता है जहां भारतीय प्रतिभा को वैश्विक मानकों के अनुरूप नवोन्मेष, सटीकता और कहानी कहने की कला को बढ़ावा मिलता है।
- आरआरआर: इसमें 2,800 से ज़्यादा वीएफएक्स शॉट्स शामिल हैं। सभी जानवरों के दृश्यों को रेडियो-नियंत्रित कारों का उपयोग करके सिंक्रोनाइज़ किया गया था, जिन्हें विशिष्ट गति पर चलने के लिए प्रोग्राम किया गया था, जो भारत के वीएफएक्स कार्य प्रवाह की उच्च परिष्कृतता को दर्शाता है।
- थॉर: द डार्क वर्ल्ड: वीएफएक्स का काम आंशिक रूप से मुंबई स्थित एक स्टूडियो द्वारा किया गया था, जो अंतर्राष्ट्रीय निर्माणों में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
- गेम ऑफ थ्रोन्स: विशिष्ट किस्म के ड्रेगन (खलीसी के ड्रेगन) भारत में एनिमेटेड किए गए, जिससे उच्च-स्तरीय एनीमेशन और डिजाइन में भारत की बढ़ती तकनीकी विश्वसनीयता उजागर हुई।
- अवतार: अवतार के लिए 200 से अधिक वीएफएक्स शॉट्स एक भारतीय कंपनी द्वारा लिए गए जो शीर्ष-स्तरीय वैश्विक निर्माणों में भारत के सहयोग को दर्शाता है।
नवोन्मेष और उद्यमिता
गेमिंग, एक्सआर और इमर्सिव स्टोरीटेलिंग में स्टार्ट-अप्स का उदय स्वदेशी नवोन्मेष की ओर एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। भारतीय स्टूडियो अब स्थानीय कथाओं, पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक धरोहर पर आधारित मोबाइल और कंसोल गेम विकसित कर रहे हैं। इससे सेवा-आधारित कार्य से मौलिक सामग्री निर्माण की ओर एक बदलाव का पता चलता है। स्वतंत्र डेवलपर्स ने सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक शीर्षक, जैसे राजी: एन एंशिएंट एपिक और इंडस बैटल रॉयल, प्रस्तुत किए हैं। इन्होने अपने डिज़ाइन और कहानी कहने की गहराई के लिए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ये कार्य निवेशकों की बढ़ती रुचि को भी आकर्षित कर रहे हैं जो भारत की रचनात्मक-तकनीकी क्षमता और मेटावर्स (आभासी और डिजिटल) अर्थव्यवस्था के लिए इसकी तत्परता में बढ़ते विश्वास का संकेत है।
- भारत का गेमिंग उद्योग, बीजीएमआई (बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया) और एफएयू-जी (फियरलेस एंड यूनाइटेड गार्ड्स) जैसे शीर्षकों द्वारा संचालित, उभरते हुए घरेलू गेमिंग इकोसिस्टम और स्थानीय आईपी निर्माण का प्रतिनिधित्व करता है।
- भारतीय कॉमिक्स उद्योग सुप्पंडी, चाचा चौधरी, तेनाली रमन और शिकारी शंभू जैसे प्रतिष्ठित पात्रों के साथ फल-फूल रहा है। इनमें से कई पात्रों को एनिमेटेड श्रृंखला और फिल्मों में रूपांतरित किया जा रहा है जो पारंपरिक तरीकों से कहानी कहने और नए मीडिया प्लेटफार्मों के बीच के तालमेल का संकेत देता है।
शैक्षणिक विषय-उद्योग एकीकरण
समर्पित एवीजीसी केंद्रों के निर्माण और भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) की स्थापना ने दीर्घकालिक शैक्षणिक विषय और उद्योग जगत के सहयोग को संभव बनाया है। ये केंद्र डिजिटल रचनाकारों के लिए उद्भव स्थल (इनक्यूबेशन ग्राउंड) के रूप में काम करते हैं जहाँ विशेष पाठ्यक्रम और सहयोगात्मक स्थान और वातावरण उपलब्ध हैं जो छात्रों को प्रोडक्शन स्टूडियो और प्रौद्योगिकी कंपनियों से जोड़ते हैं। राज्य स्तर पर भी कई पहलें की गई हैं जो एनीमेशन और गेमिंग के लिए क्षेत्रीय समूहों को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे रचनात्मक अवसरों को महानगरीय केंद्रों से आगे बढ़ने की संभावनाएं बन सकें।
भारत के रचनात्मक तकनीकी बुनियादी ढाँचे को और मज़बूत करते हुए, वेवएक्स मीडिया-टेक स्टार्टअप एक्सेलरेटर ने एवीजीसी-एक्सआर परिवेश के लिए हैदराबाद स्थित टी-हब के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत एक समर्पित नवोन्मेष केंद्र स्थापित किया जायेगा। यह सहयोग मीडिया-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, मार्गदर्शन, वित्तपोषण और बुनियादी ढाँचे तक पहुँच को सुगम बनाने और रचनात्मक पेशेवरों और तकनीकी उद्यमों के बीच सेतु निर्माण पर केंद्रित होगा।23
भारत के एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र के लिए आगे की राह
भारत का एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र नवोन्मेष, कौशल विकास और नीतिगत संमिलन
द्वारा रणनीतिक विकास के चरण में प्रवेश कर रहा है। आगे का ध्यान रचनात्मक अर्थव्यवस्था को एक वैश्विक महाशक्ति में बदलने पर रहेगा जो स्वदेशी प्रतिभा, तकनीकी प्रगति और रचनात्मक उद्यमिता द्वारा संचालित होगा।24
एनीमेशन और दृश्य प्रभाव (वीएफएक्स)

- वैश्विक वीएफएक्स और पोस्ट-प्रोडक्शन केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए उत्कृष्टता केंद्र विकसित करना और वित्तीय प्रोत्साहन शुरू करना।
- भारतीय प्रतिभा को वैश्विक विषयों के परिवेश के अनुसार अपनाकर सह-निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
- आईपी-आधारित एनीमेशन परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना जो भारत की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक विविधता को प्रतिबिंबित करता हो।
गेमिंग और ईस्पोर्ट्स

- मूल भारतीय खेलों और पेशेवर टूर्नामेंटों को समर्थन देने के लिए एक संरचित गेमिंग और ईस्पोर्ट्स परिवेश को बढ़ावा देना।
- मनोरंजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में गेमिंग प्रौद्योगिकियों के लिए स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन और निवेश के अवसरों का विस्तार करना।
- एक विश्वसनीय और जिम्मेदार गेमिंग वातावरण बनाने के लिए नैतिक सिद्धांतों और मुद्रीकरण ढांचे को संस्थागत बनाना।
विस्तारित रियलिटी (एक्सआर) और उभरती प्रौद्योगिकियाँ

- मनोरंजन से आगे बढ़कर, शिक्षा, पर्यटन, रक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में एक्सआर अनुप्रयोगों का विस्तार करना।
- पहुँच और अंतर-संचालन के लिए मानक बनाना और ज़िम्मेदार और समावेशी प्रौद्योगिकी उपयोग सुनिश्चित करना।
कॉमिक्स और डिजिटल बौद्धिक संपदा

- एनीमेशन, गेमिंग और क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म स्टोरीटेलिंग के लिए भारतीय कॉमिक और लोककथाओं के आईपी का डिजिटलीकरण और उनकी पुनर्कल्पना करना।
- ऐसी नई ट्रांसमीडिया फ्रैंचाइज़ को बढ़ावा देंना जो सांस्कृतिक प्रामाणिकता को वैश्विक बाज़ार अपील के साथ मिला सकें।
- रचनात्मक परिवेश का विस्तार करने के लिए कलाकारों, प्रकाशकों और स्टूडियो के बीच सहयोग को मज़बूत करना।
रणनीतिक सक्षमकर्ता और अंतर-क्षेत्रीय प्राथमिकताएँ
- प्रमाणन मानकों और राष्ट्रीय प्रतिभा रजिस्ट्री की सहायता से, मुख्यधारा की उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण में एवीजीसी-एक्सआर पाठ्यक्रमों को एकीकृत करना।
- “भारत में सृजन” और “ब्रांड इंडिया” पहलों के माध्यम से बौद्धिक संपदा ढाँचे को सुदृढ़ करना और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच को सुगम बनाना।
सामूहिक रूप से, ये उपाय एक ऐसे समग्र परिवेश की कल्पना करते हैं जहाँ नीतिगत सुधार, मानव पूंजी और रचनात्मक प्रौद्योगिकी के बीच में तालमेल रहे और जिससे एवीजीसी-एक्सआर के क्षेत्र में भारत को वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने के प्रयासों को तेज किया जा सके।
