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भारत में तेजी से बढ़ता विमानन क्षेत्र : India’s Aviation Sector is Booming

-uttarakhandhimalaya.in –

भारत सरकार की लोक समर्थक नीतियों के प्रति अटल प्रतिबद्धता और बढ़ती मांग के कारण देश के विमानन क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिली है। अपनी सभी सीमाओं को पीछे छोड़ विमानन उद्योग ने उल्लेखनीय परिवर्तन करते हुए एक जीवंत और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ है। इस गतिशील बदलाव ने भारत को वैश्विक विमानन पारिस्थितिकी तंत्र में प्रथम कतार में खड़ा कर दिया है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन गया है।


विमानन उद्योग के इस सफलता की कहानी में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस उद्योग को सशक्त बनाने और इसकी संभावित क्षमता हासिल करने के लिए केंद्र सरकार ने अनेकों रणनीतिक पहल की हैं।

बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार तत्पर

पिछले वर्षों में भारत के विमानन क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि 2014 में जहां देश में परिचालित हवाई अड्डों की संख्या मात्र 74 थी वहीं यह आंकड़ा केवल 9 साल में, यानी अप्रैल 2023 तक, बढ़कर 148 हो गया। नई पहल और सरकार की जन परोपकारी नीतियां इस विकास के मुख्य आधार हैं। ऐसी ही एक नवीन पहल 2016 में की गई – क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) – उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक), जिसका उद्देश्य मौजूदा हवाई पट्टियों और हवाई अड्डों के पुनरुद्धार के माध्यम से बेकार या अपरिचालित हवाई अड्डों को सुचारु बनाना है।

भारत सरकार ने हवाई पट्टियों और हवाई अड्डों के पुनरुद्धार के समय स्‍थायित्‍व को भी सदैव प्रथमिकता दी है, यह बात दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों की हालिया उपलब्धियों से स्पष्ट है। दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों को कार्बन प्रत्यायन में प्रतिष्ठित स्तर 4+ से सम्मानित किया गया है। यह मान्यता सरकार के कार्बन पदचिह्न को कम करने और जिम्मेदार विमानन प्रथाओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

क्षेत्रीय संपर्क योजना – उड़ान

विमानन क्षेत्र के विस्तार का आधार क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) – उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) है। भारत के विशेष रूप से दूरदराज और अल्पसेवित क्षेत्रों को जोड़ने पर केंद्रित इस योजना ने गत 6 वर्षों में कई सफलताएं प्राप्त की हैं। उड़ान योजना का लक्ष्य, मौजूदा हवाई पट्टियों और हवाई अड्डों का पुनरुद्धार करके, हवाई यात्रा से वंचित समुदायों तक हवाई यात्रा की उपलब्धता पहुंचाना और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। 10 साल के दृष्टिकोण के साथ शुरू किए गए इस योजना का उद्देश्य सभी भारतीयों तक हवाई यात्रा के लिए समान अवसर प्रदान करना है।

आरसीएस-उड़ान, नागरिक उड्डयन उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल बीते 6 वर्षों में ही चार नई और सफल एयरलाइंस सामने आई हैं। इस योजना ने विमान संचालकों को सुचारु परिचालन और एक स्थायी व्यवसाय मॉडल विकसित करने में मदद की है। इसके अतिरिक्त, आरसीएस-उड़ान योजना लघु क्षेत्रीय विमान संचालकों को व्यवसाय बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रही है और उनका सफल संचालन इस तथ्य का प्रमाण है कि यह योजना विमानन उद्योग के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही है।

प्रगति की वर्तमान स्थिति (04 दिसंबर 2023 तक)

  1. उड़ान योजना के तहत देश में हवाई अड्डों के विकास के लिए 4500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, इनमें से योजना के आरंभ से अब तक 3751 करोड़ रुपये का काम पूरा किया जा चुका है।
  2. 517 आरसीएस मार्गों से अब तक 76 हवाई अड्डों का परिचालन शुरू, इनमें 9 हेलीपोर्ट और 2 जल हवाई अड्डे शामिल।
  3. अब तक एक करोड़ तीस लाख से अधिक लोग उड़ान योजना का लाभ उठा चुके हैं।
  4. देश में 50 नए हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट व जल हवाई अड्डों के विकास और संचालन के लिए 2023-24 बजट में एक हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए

 

हवाई यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि

कोविड काल समाप्त होने के बाद से हवाई यात्रियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिससे विमानन उद्योग में एक उल्लेखनीय पुनरुत्थान देखने को मिला है। घरेलू से लेकर अंतर्राष्ट्रीय यात्रा तक हवाई यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है, जिससे इस क्षेत्र में एक मजबूत उछाल देखने को मिला है और यह बढ़ोतरी एक आशाजनक भविष्य की ओर संकेत कर रही है।

  1. जनवरी से सितंबर 2022 तक, घरेलू हवाई जहाजों से लगभग 8 करोड़ 74 लाख यात्रियों ने सफर किया, जबकि 2023 में इसी अवधि के दौरान 11 करोड़ 28 लाख से अधिक यात्रियों ने हवाई यात्राएं की, जो कि 29.10% अधिक है।

  1. जनवरी और सितंबर 2023 के बीच, करीब 4 करोड़ 60 लाख अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों ने हवाई सफर किया, जो 2022 की समान अवधि में किए गए करीब 3 करोड़ 29 लाख यात्रियों की तुलना में 39.61% ज्यादा है।

कार्बन तटस्थता संबंधित पहल

नागर विमानन मंत्रालय (एमओसीए) ने भारतीय हवाई अड्डों के कार्बन लेखांकन और रिपोर्टिंग ढांचे के मानकीकरण के जरिए देश में हवाई अड्डों पर कार्बन तटस्थता और नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस उद्देश्य के लिए निर्धारित परिचालन वाले हवाई अड्डा संचालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने संबंधित हवाई अड्डों पर कार्बन उत्सर्जन का मानचित्रण करें और कार्बन तटस्थता और नेट ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में चरणबद्ध तरीके से काम करें।

एमओसीए ने राज्य सरकारों के सहयोग से भावी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के निर्माताओं से कार्बन तटस्थता और नेट ज़ीरो प्राप्त करने की दिशा में काम करने की सलाह दी है।

भारत सरकार के उपरोक्त प्रयासों से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे हवाई अड्डों ने लेवल 4+ और हवाई अड्डा अंतर्राष्ट्रीय परिषद (एसीआई) से उच्च स्तर की मान्यता हासिल कर ली है और कार्बन तटस्थ बन गए हैं। इसके अतिरिक्त, 66 भारतीय हवाई अड्डे शत-प्रतिशत हरित ऊर्जा पर काम कर रहे हैं। ( PIB feature)

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