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भारत का ‘अभेद्य कवच’: इजराइली तकनीक और स्वदेशी शक्ति का संगम

उषा रावत

भारत अपनी सीमाओं को एक ऐसे सुरक्षा चक्र से घेरने की तैयारी में है जिसे भेदना दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा के साथ ही दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक नए युग की शुरुआत होती दिख रही है। इस साझेदारी का सबसे बड़ा आकर्षण ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) और ‘आयरन बीम’ (Iron Beam) जैसी विश्व प्रसिद्ध तकनीकें हैं।

तकनीक हस्तांतरण (Tech Transfer) पर जोर

​इस बार भारत की रणनीति केवल हथियार खरीदने की नहीं, बल्कि उन्हें भारत में बनाने की है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और इजराइल एक ऐसे लैंडमार्क समझौते (MoU) के करीब हैं, जिसके तहत इजराइल अपनी उन रक्षा तकनीकों को साझा करेगा जो उसने अब तक किसी और देश को नहीं दी हैं।

  • मेक इन इंडिया: इन हथियारों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया जाएगा।
  • रणनीतिक लक्ष्य: भारत का उद्देश्य अपनी 15,106 किमी लंबी भूमि सीमा और 7,516 किमी लंबी तटरेखा को सुरक्षित करना है।

सुदर्शन चक्र’ और मल्टी-लेयर्ड डिफेंस

​भारत 2035 तक ‘प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र’ के माध्यम से एक अखिल भारतीय मल्टी-लेयर्ड शील्ड (Pan-India multi-layered shield) बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें इजराइली और रूसी सिस्टम के साथ-साथ भारत के स्वदेशी सिस्टम भी शामिल होंगे:

  1. आयरन डोम (Iron Dome): 4 से 70 किमी की दूरी तक कम दूरी के रॉकेटों को रोकने के लिए।
  2. डेविड स्लिंग और एरो (David’s Sling & Arrow): मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन (300 किमी तक) से निपटने के लिए।
  3. आयरन बीम (Iron Beam): 100 kW की लेजर बीम जो महज 10 किमी के दायरे में आने वाले खतरों को पलक झपकते ही राख कर देगी।
  4. स्वदेशी योगदान: भारत के पास पहले से ही रूस का S-400 सिस्टम, इजराइल के सहयोग से बना MR-SAM (बराक-8) और स्वदेशी ‘आकाश’ सिस्टम मौजूद है।

नए खतरों का मुकाबला: ‘गोल्डन होराइजन’ और ‘कुश’

​पाकिस्तान और चीन की ओर से बढ़ते ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों (जैसे चीनी PL-15) के खतरों को देखते हुए भारत अपनी आक्रामक मारक क्षमता भी बढ़ा रहा है।

    • गोल्डन होराइजन (Golden Horizon): सुखोई-30MKI जेट्स के लिए एक नई श्रेणी की मिसाइल, जो मच 5 (Mach 5) की रफ्तार से परमाणु ठिकानों और भूमिगत बंकरों को नष्ट कर सकती है।
    • प्रोजेक्ट कुश (Project Kusha): इसके साथ ही DRDO अपनी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली विकसित कर रहा है, जो S-400 के स्तर की सुरक्षा प्रदान करेगी।

भारत की यह पहल केवल रक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण के जरिए भविष्य के लिए ‘आत्मनिर्भर’ बनना है। इजराइल के साथ यह सहयोग भारत को वैश्विक रक्षा मानचित्र पर एक नई महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

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