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भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में बड़ा मोड़, अंतरिम समझौते के ढांचे पर सहमति

 

नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पारस्परिक और लाभकारी व्यापार से जुड़े एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर सहमति जता दी है। इसे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह ढांचा आगे चलकर व्यापक भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का आधार बनेगा।
यह सहमति 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई व्यापार वार्ताओं की निरंतरता में सामने आई है। दोनों देशों ने इसे संतुलित, पारस्परिक और ठोस परिणाम देने वाला करार दिया है।
औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में राहत
समझौते के तहत भारत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक सामानों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला पर टैरिफ समाप्त या कम करेगा। इनमें पशु आहार, लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और अन्य उत्पाद शामिल हैं। इससे भारतीय बाजार में अमेरिकी उत्पादों की पहुंच आसान होगी।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका भारत में निर्मित वस्तुओं पर फिलहाल 18 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लागू करेगा, जिनमें वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, जैविक रसायन, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी शामिल हैं। हालांकि, अंतरिम समझौते के सफल कार्यान्वयन के बाद अमेरिका जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरे और विमान पुर्जों जैसी कई वस्तुओं पर टैरिफ हटाने पर भी सहमत हुआ है।
विमान, ऑटोमोबाइल और फार्मा क्षेत्र को राहत
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ भी इस समझौते के तहत हटाए जाएंगे। अमेरिका भारत के कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए टैरिफ वापस लेगा। साथ ही भारत को ऑटोमोबाइल पुर्जों के लिए अधिमान्य टैरिफ कोटा भी मिलेगा।
फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भारत को विशेष राहत मिलने की संभावना है। जेनेरिक दवाओं और उनके अवयवों को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर सहमति बनी है, जो भारतीय दवा उद्योग के लिए अहम मानी जा रही है।
गैर-टैरिफ बाधाएं हटाने पर जोर
दोनों देशों ने यह स्वीकार किया है कि व्यापार में सिर्फ टैरिफ ही नहीं, बल्कि गैर-टैरिफ बाधाएं भी बड़ी रुकावट रही हैं। भारत ने अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों, आईसीटी उत्पादों और खाद्य सामग्री के व्यापार में मौजूद पुरानी अड़चनों को दूर करने का भरोसा दिया है। इसके तहत आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल किया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय मानकों को मान्यता देने पर भी सहमति बनी है।
500 अरब डॉलर की खरीद और तकनीकी सहयोग
इस समझौते का सबसे अहम पहलू यह है कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा। इनमें ऊर्जा उत्पाद, विमान, विमान पुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं।
इसके साथ ही जीपीयू, डेटा सेंटर्स और उन्नत तकनीकी उत्पादों के व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी और संयुक्त तकनीकी सहयोग के विस्तार पर भी सहमति बनी है।
डिजिटल व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर फोकस
डिजिटल व्यापार में भेदभावपूर्ण नियमों और बाधाओं को हटाने तथा मजबूत और पारस्परिक रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियम तय करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाएगा। साथ ही, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
आगे की राह
भारत और अमेरिका ने इस ढांचे को तत्काल लागू करने और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने का फैसला किया है, ताकि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को तय समयसीमा में पूरा किया जा सके।

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