क्षेत्रीय समाचारसुरक्षा

आईटीबीपी की 8वीं वाहिनी ने 60वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया

गौचर, 6 मार्च (गुसाईं)। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की 8वीं वाहिनी ने अपना 60वां स्थापना दिवस धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया।

इस अवसर पर वाहिनी के सेनानी विरेन्द्र सिंह रावत ने शहीद स्मारक पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सशस्त्र सैन्य टुकड़ी ने परेड के साथ बल के ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और जवानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए सेनानी विरेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की 8वीं वाहिनी बल की सबसे पुरानी बटालियनों में से एक है। इसकी स्थापना 6 मार्च 1967 को करेरा (मध्य प्रदेश) में की गई थी। स्थापना के बाद से वाहिनी ने देश के विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दी हैं। बाद में 17 जुलाई 2006 को वाहिनी का मुख्यालय स्थायी रूप से गौचर, जिला चमोली में स्थापित किया गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के जवान अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी दिन-रात मुस्तैद रहते हैं। इसके अलावा किसी भी आपदा या संकट की स्थिति में बचाव और राहत कार्यों में भी बल के जवान सदैव अग्रणी भूमिका निभाते हैं, जिस पर हमें गर्व है।

उन्होंने कहा कि वाहिनी के अधिकारी और जवान प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन हालात के बावजूद दिन-रात सीमा की चौकसी में लगे रहते हैं। इसके साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी बल की तैनाती रहती है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा और सेवा की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

सेनानी ने कहा कि सीमा सुरक्षा के साथ-साथ वाहिनी के जवानों ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुरक्षित निकालने तथा राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करते हुए भी बल के जवान आम नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए इसी तरह तत्पर रहेंगे।

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