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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने विकसित किया मवेशियों के भ्रूण विकृतियों को ठीक करने वाला नया उपकरण

बरेली: गर्भवती गाय-भैंसों में भ्रूण की गर्दन मुड़ने या पैर-हाथ टेढ़े होने जैसी जटिलताओं के कारण अक्सर सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है। अब इन स्थितियों में राहत मिल सकती है, क्योंकि भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली के वैज्ञानिकों ने हथेली के आकार का एक अभिनव उपकरण ‘I-Hook’ विकसित किया है। यह उपकरण गर्भाशय के भीतर भ्रूण के मुड़े हुए अंगों को सीधा कर प्राकृतिक प्रसव को संभव बनाता है।

इस उपकरण को पेटेंट कर लिया गया है और अब यह पशु चिकित्सकों के उपयोग के लिए उपलब्ध हो गया है।

IVRI के वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि
“संस्थान के पॉली-रिफरल क्लिनिक में हर महीने लगभग 25 ऐसे मामले आते हैं, जिनमें भ्रूण की गर्दन या पैर गर्भाशय में मुड़ जाते हैं। इससे प्रसव अत्यंत कठिन हो जाता है और अधिकांश मामलों में सर्जरी करनी पड़ती है। पहले उपलब्ध उपकरण भारी, सख्त और कम लचीले होने के कारण उतने प्रभावी साबित नहीं होते थे।”

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए डॉ. कुमार और उनकी टीम ने इस उपकरण पर काम शुरू किया। उन्होंने दो प्रारंभिक डिजाइन—एक अंडाकार और दूसरा ‘D’ आकार—तैयार किए और कुल 24 प्रोटोटाइप का परीक्षण किया। फील्ड ट्रायल के दौरान कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आईं, जैसे—उपकरण की पकड़ में कठिनाई, आकार के अनुसार फिट न होना और सीमित लचीलापन। लगातार संशोधन कर इन समस्याओं को दूर किया गया।

डॉ. कुमार ने आगे बताया,
“अंतिम रूप से तैयार उपकरण छोटा, हल्का और हथेली के आकार का है। इसे स्टेनलेस-स्टील चेन से जोड़ा गया है। इसे धीरे-धीरे गर्भाशय में डाला जाता है, जहां इसका हुक भ्रूण के मुड़े हुए पैर या गर्दन को पकड़ लेता है। नियंत्रित खिंचाव से भ्रूण के अंगों को सीधा किया जा सकता है, जिससे सिजेरियन की आवश्यकता काफी कम हो जाती है।”

उन्होंने कहा,
“यह I-Hook किसानों पर आर्थिक बोझ घटाएगा, क्योंकि सिजेरियन प्रसव महंगा होता है और नवजात बछड़े की गहन देखभाल की भी जरूरत पड़ती है। यह उपकरण मां और बच्चे—दोनों के लिए जोखिम कम करता है।”

यह उपकरण ICAR, नई दिल्ली में पेटेंट रजिस्टर्ड हो चुका है और जल्द ही देशभर में पशु चिकित्सकों के लिए उपलब्ध होगा।

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