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जनऔषधि केंद्र गढ़ रहे हैं मासिक धर्म स्वच्छता की नई परिभाषा-किफायत से सशक्तीकरण तक

Access to safe and affordable menstrual hygiene products is not just a health issue, but a matter of dignity. Under the Government of India’s flagship initiative, Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana (PMBJP), sanitary pads are available at just ₹1 per pad (₹10–12 per pack) through Pradhan Mantri Jan Aushadhi Kendras across the country. For many women and adolescent girls, this Small Pink Packet represents freedom from hesitation, financial burden, and unsafe, cumbersome alternatives. What was once a monthly compromise has now become an affordable and accessible choice.

 

-A PIB FEATURE-

सुरक्षित और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों तक पहुँच केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि गरिमा का विषय है। भारत सरकार की प्रमुख पहल, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत, देशभर के प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सेनेटरी पैड मात्र ₹1 प्रति पैड (₹10–12 प्रति पैकपर उपलब्ध हैं। कई महिलाओं और किशोरियों के लिए, यह ‘छोटा गुलाबी पैकेट’ झिझक, आर्थिक बोझ और असुरक्षित एवं कष्टदायक विकल्पों से मुक्ति का प्रतीक है। जो कभी हर महीने किया जाने वाला एक समझौता था, वह अब एक किफायती और सुलभ विकल्प बन गया है।

 

पहली नज़र में, ये जन औषधि केंद्रों की अलमारियों पर रखे महज़ साधारण से गुलाबी पैकेट लगते हैं। लेकिन कई महिलाओं के लिए, यह किफायत, गरिमा और सुविधा का प्रतीक हैं। उन महिलाओं के लिए जिन्हें कभी ₹60–70 की कीमत वाला पैक खरीदने से पहले दो बार सोचना पड़ता था, वही चीज़ ₹10–12 में मिल जाना लगभग अविश्वसनीय लगता है।

 

पीरियड में स्कूल से कोई छुट्टी नहीं

चौदह वर्षीय चाँदनी बताती है कि वह और उसकी कक्षा की कई अन्य लड़कियाँ नियमित रूप से इन पैड्स का उपयोग करती हैं। वह आत्मविश्वास के साथ कहती है, “ये बहुत ही किफायती और आरामदायक हैं।

चाँदनी जैसी स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए, कम कीमत वाले सेनेटरी पैड्स की उपलब्धता का अर्थ हैपीरियड्स के दौरान कम चिंता, स्कूल से कम छुट्टियाँ और कक्षा में बेहतर आत्मविश्वास।  जो कभी एक असहज विषय हुआ करता था, वह अब उसकी सहेलियों के बीच एक खुली चर्चा बन गया है।

एक निजी स्कूल में शिक्षिका मेमी, पहली बार दवाइयाँ खरीदने के लिए जन औषधि केंद्र गई थीं। एक दिन, उनकी नज़र काउंटर पर रखे एक गुलाबी पैकेट पर पड़ी। वे याद करते हुए कहती हैं, “जब दुकानदार ने मुझे बताया कि इसकी कीमत केवल ₹12 है, तो मैं हैरान रह गई। उन्होंने इसे इस्तेमाल करने का फैसला किया और तब से वे लगातार इसका उपयोग कर रही हैं।

पहले, उन्हें एक पैकेट के लिए ₹40-50 खर्च करने पड़ते थे। अब, वे न केवल खुद के लिए इसे खरीदती हैं, बल्कि उन्होंने अपने पड़ोस और स्कूल की महिलाओं को भी अपनी मासिक धर्म संबंधी आदतों को बदलने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह इस बात का एक जीवंत उदाहरण है कि कैसे जागरूकता, व्यक्तियों को अपने समुदायों के भीतर चेंजमेकर में बदल सकती है।

समझौतों के चक्र को तोड़ना

ज्योति बताती हैं कि पहले ऊंची कीमतों के कारण कई महिलाएँ सेनेटरी पैड खरीदने में संकोच करती थीं या कपड़े का उपयोग करने को मजबूर थीं। वे कहती हैं, “जब हमें पता चला कि एक पैड की कीमत केवल ₹1 है, तो सब कुछ बहुत आसान हो गया। अब मात्र ₹10 में हमारे पास एक सुरक्षित और आरामदायक विकल्प है।

अनगिनत महिलाओं के लिए, इस योजना ने आर्थिक तनाव को कम किया है और मासिक धर्म स्वच्छता की आदतों में सुधार किया है। किफायती सेनेटरी पैड्स की उपलब्धता ने संकोच को आत्मविश्वास में और समझौते को सुविधा में बदलने में मदद की है।

गरिमा और स्वास्थ्य की ओर एक कदम

यह पहल केवल किफायती होने के बारे में नहीं है; बल्कि यह सुलभता, जागरूकता और गरिमा के बारे में है। मात्र ₹1 प्रति पैड की दर से गुणवत्तापूर्ण सेनेटरी पैड की उपलब्धता सुनिश्चित करके, सरकार ने विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वर्ग की महिलाओं के स्वास्थ्य को सहारा देने की दिशा में एक सार्थक कदम उठाया है।

चाँदनी, मेमी, ज्योति और ऐसी कई अन्य महिलाओं के लिए, यह केवल एक योजना नहीं है; बल्कि यह उनके रोजमर्रा के जीवन में सशक्तिकरण है। महिलाओं के लिए सस्ती दरों पर मासिक धर्म स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित करना पीएमबीजेपी के कई लाभों में से एक है। 30.11.2025 तक, इन केंद्रों के माध्यम से 100 करोड़ से अधिक जन औषधि सुविधा सेनेटरी पैड बेचे जा चुके हैं। इसमें से, वर्ष 2025 में 30.11.2025 तक 22.50 करोड़ से अधिक जन औषधि सुविधा सेनेटरी पैड की बिक्री हुई है।

 

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