कल्पना से भी दूर कल्पना को मिली राज्यसभा सीट: त्रिवेन्द्र को एक और झटका

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देहरादून, 29 मई(उहि)। राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में उत्तराखण्ड की एकमात्र सीट के लिये राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्षा डा0 कल्पना सैनी ने त्रिवेन्द्र सिंह रावत जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ कर भाजपा का टिकट हथिया लिया। पार्टी का राज्य विधानसभा में 47 अंकों का प्रचण्ड बहुमत होने के कारण कल्पना का निर्वाचन अब महज औपचारिकता ही है। कल्पना के चयन से त्रिवेन्द्र रावत और विजय बहुगुणा समर्थकों में मायूसी छा गयी है। प्रदेश संगठन द्वारा इस एक सीट के लिये जो 10 नाम भेजे गये थे, उनमें कल्पना का नाम नहीं था। इसलिये भाजपा नेतृत्व द्वारा उनके नाम की घोषणा किये जाने से कई नेता भौंचक्के रह गये। कल्पना के चयन से ऐसा कयास लग रहा है कि भाजपा नेतृत्व की त्रिवेन्द्र से नाराजगी अभी कम नहीं हुयी है। नाराजगी का कारण उनकी अलोकप्रियता एवं उन पर लगे गंभीर आरोप माने जा रहे हैं।
भाजपा नेतृत्व ने रविवार को राज्यसभा की खाली हो रही 57 सीटों के लिये आगामी 10 जून को हो रहे द्विवार्षिक चुनाव के लिये अपने 16 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। जिनमंे वित्तमंत्री सीता रमण और उपभोक्ता मामलों तथा सार्वजनिक वितरण मंत्री पियूष गोयल के भी नाम हैं। उत्तराखण्ड से राज्य पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष डा0 कल्पना सैनी को मैदान में उतारा गया है। सीता रमण को कर्नाटक से तथा गोयल को महाराष्ट्र से उतरा गया है।
उत्तराखण्ड से भाजपा संगठन द्वारा इस एक सीट के लिये 10नेताओं के नाम भेजे गये थे। जिनमें प्रमुख नाम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का भी था। यद्यपि विजय बहुगुणा का नाम सूची में नहीं था, फिर भी उन्हें भी संभावित प्रत्याशी माना जा रहा था। दिल्ली भेजे गये नामों में कुलदीप कुमार का भी नाम था। चूंकि त्रिवेन्द्र को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था और जब भी किसी मुख्यमंत्री को पद से हटाया जाता है तो पार्टी उसे कहीं न कहीं सम्मानजनक ढंग से पुनर्वासित करती रही है, लेकिन त्रिवेन्द्र के मामले में ऐसा नहीं हुआ। जबकि उन्हें अमित शाह के करीब माना जाता रहा है। इसी करीबी के चलते उन्हें अप्रत्याशित रूप से मुख्यमंत्री पद से नवाजा गया था। अब लगता है कि उनके प्रति पार्टी नेतृत्व की नाराजगी कम नहीं हुयी। या फिर वह नेतृत्व का विश्वास दुबारा हासिल करने में सफल नहीं हुये। उन पर भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगते रहे हैं, जबकि उनके कार्यकलापों से पार्टी प्रदेश में अलोकप्रिय भी हुयी है।
भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशी कल्पना सैनी मूल रूप से शिवदासपुर तेलीवाला रुड़की की हैं तथा सन् 1990 से आरएसएस से जुड़ी हुयी हैं। उन्होंने मेरठ विश्व विद्यालय से संस्कृत में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वह नेशनल फर्टिलाइजर लि0 की डाइरेक्टर भी रहीं। वह दुर्गावाहिनी सहित आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद के विभिन्न संगठनों से जुड़ी रहीं। उनके पिता पृथ्वी सिंह विकसित उत्तर प्रदेश में मंत्री रहे। कल्पना ने अपना कैरियर एक शिक्षिका के रूप में शुरू किया और गांधी महिला शिल्प विद्यालय की प्रधानाचार्या भी रहीं।

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