तेहरान पर महाहमला: खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में भयंकर तनाव
तेहरान/वॉशिंगटन/तेल अवीव। पश्चिम एशिया में तनाव अब निर्णायक और विस्फोटक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन और आधिकारिक समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) ने पुष्टि की है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (86) का 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 की दरम्यानी रात निधन हो गया। यह घटना अमेरिकी और इजरायली वायु सेनाओं द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमले के बाद हुई, जिसने तेहरान स्थित उनके आवास और कार्यालय परिसर को भारी क्षति पहुँचाई। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों—एसोसिएटेड प्रेस (AP), रॉयटर्स और द गार्जियन—ने भी विभिन्न स्रोतों के हवाले से हमले और उसके प्रभाव की पुष्टि की है।
संयुक्त हवाई हमला और भारी क्षति
सूत्रों के अनुसार हमले में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया। उपग्रह तस्वीरों में खामेनेई के आवासीय परिसर के कई हिस्सों के ध्वस्त होने के संकेत मिले हैं। ईरानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने इसे “सीधी नेतृत्व-नाशक कार्रवाई” बताया है, जबकि वॉशिंगटन और तेल अवीव ने आधिकारिक बयान में इसे “ईरान की आक्रामक क्षमताओं को निष्क्रिय करने की रणनीति” कहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यह “ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर” है। इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
शीर्ष नेतृत्व पर गहरी चोट
ईरानी मीडिया और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में सुरक्षा और सैन्य ढांचे के कई प्रमुख चेहरे भी मारे गए। इनमें खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व प्रमुख अली शमखानी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की जमीनी सेना के कमांडर मोहम्मद पाकपुर, तथा रक्षा मंत्री अमीर नासिरज़ादेह शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हमले में खामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य—उनकी बेटी, दामाद और पोती—भी मारे गए। तेहरान और अन्य शहरों में समानांतर लक्ष्यों पर हमलों में लगभग 40 उच्च पदस्थ अधिकारियों की मौत की खबर है। हालांकि, स्वतंत्र स्रोतों से इन संख्याओं की पूर्ण पुष्टि अभी शेष है।
जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव
हमले के कुछ घंटों के भीतर ईरान ने “ऑपरेशनल डिफेंस” के तहत जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। तेल अवीव और क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें हैं। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया। इजरायल ने अपनी वायु-रक्षा प्रणाली को उच्चतम सतर्कता पर रखा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हमले और जवाबी कार्रवाइयों का यह सिलसिला जारी रहा तो यह संघर्ष सीमित टकराव से पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
ईरान में शोक और अस्थायी व्यवस्था
ईरानी सरकार ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और एक सप्ताह के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थलों पर शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं। देश में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी आंतरिक अशांति को रोका जा सके।
संविधान के अनुसार, नए सर्वोच्च नेता का चुनाव 88 सदस्यीय विशेषज्ञों की परिषद (Assembly of Experts) करेगी। तब तक एक अंतरिम परिषद प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और न्यायपालिका प्रमुख शामिल हैं। खामेनेई ने अपने जीवनकाल में किसी आधिकारिक उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की थी, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है।
वैश्विक प्रभाव और भारत पर असर
इस संकट का असर वैश्विक विमानन पर भी पड़ा है। भारत की प्रमुख एयरलाइंस—एयर इंडिया और इंडिगो—ने मध्य-पूर्व के हवाई क्षेत्र से उड़ानों को हटाने या रद्द करने का निर्णय लिया है। यूरोप और एशिया के कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श जारी किया है।
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि पश्चिम एशिया ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी भारतीयों और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
दुनिया की निगाहें तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव पर
वर्तमान घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया की शक्ति-संरचना को झकझोर दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु न केवल धार्मिक-राजनीतिक नेतृत्व का अंत है, बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों के पुनर्संतुलन की शुरुआत भी हो सकती है। सैन्य गतिविधियां अभी जारी हैं और दोनों पक्ष उच्च सतर्कता पर हैं। आने वाले दिनों में विशेषज्ञों की परिषद का निर्णय, ईरान की आंतरिक स्थिरता, और अमेरिका-इजरायल की रणनीति इस संकट की दिशा तय करेगी। फिलहाल, दुनिया की निगाहें तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी हैं, जहां से निकला हर संकेत वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
