टीएमयू में भगवान वासुपूज्य के निर्वाण कल्याणक महोत्सव पर लाडू समर्पित

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उत्तम ब्रह्मचर्य: लाडू प्रतियोगिता में नम्रता जैन- प्रथम, परमार्थ ग्रुप द्वितीय तो प्रयास एंड ग्रुप रहा तृतीय

–प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के रिद्धि-सिद्धि भवन में अनंतचतुर्दशी पर जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का निर्वाण कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इस सुअवसर पर निर्वाण-काण्ड पूजन विधि-विधान से हुआ। इस पुण्यतिथि पर वासुपूज्य भगवान को रिद्धि-सिद्धि भवन में लाडू समर्पित किया गया। अनंत चतुर्दशी औऱ दसलक्षण पर्व समापन पर हवन क्रिया सम्पूर्ण कराई गई। हवन-पूजन में श्रावक धोती दुपट्टा, जबकि श्राविकाएं पीली साड़ी पहने सम्मिलित हुए। पूजा विधियों में से मंगल कलश पर स्वस्ति निर्माण जैनाचार्य श्रीमद् विजय धर्मधुरंधर सुरीश्वर जी महाराज के हाथों से कराया गया। महाराज जी ने अपने मुखारविंद से सिद्ध भक्ति मंत्रों का उच्चारण किया। इसके बाद अग्निवेश से लेकर हवन समापन तक सारा पूजन प्रतिष्ठाचार्य जी ने कराया। इस दौरान कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, डॉ. एसके जैन, प्रो. विपिन जैन, प्रो. रवि जैन, डॉ. रत्नेश जैन, श्री विपिन जैन, ब्रह्मचारिणी डॉ. कल्पना जैन, डॉ. अर्चना जैन, डॉ. विनोद जैन, डॉ. पवन, डॉ. नमन, श्री आदित्य जैन, डॉ. आशीष सिंघई, श्री अरिंजय जैन आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। सम्मेद शिखर से आए प्रतिष्ठाचार्य पंडित श्री ऋषभ जैन ने विधि-विधान से विनय पाठ, स्वस्ति मंगल पाठ, देवशास्त्र गुरु पूजन, समुच्य पूजा, श्री अनन्तनाथ जिन पूजन, सोलहकारण पूजन, दसलक्षण पूजन, रत्नत्रय पूजन और जिनवाणी पूजन कराया। पंडित जी ने यह बताया, केवल जैन धर्म में मृत्यु को भी एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर लाडू प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें अतिश्रेष्ठ और आकर्षक लाडू बनाने पर श्रीमती नम्रता जैन को प्रथम, परमार्थ ग्रुप को द्वितीय और प्रयास एंड ग्रुप को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। रिद्धि-सिद्धि भवन में कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने दसलक्षण महोत्सव में महत्वपूर्ण सहयोग औऱ योगदान दे रहे लोगों को सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में प्रतिष्ठाचार्य श्री ऋषभ जैन, दस दिन से उपवास रख रहे श्रावक-श्राविकाएं, रजनीश जैन बैंड एंड पार्टी आदि प्रमुख रहे। इनके अलावा पंडाल निर्माण औऱ सजावट में शामिल लोग भी सम्मानित किए गए। इससे पूर्व मुरादाबाद जैन समाज के अध्यक्ष श्री अनिल जैन ने  घोषणा की, 12 सितम्बर को मुरादाबाद में महावीर भगवान की शोभायात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने कुलाधिपति सहित समस्त टीएमयू परिवार को सादर आमंत्रित किया, जबकि कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने बताया,18 सितम्बर को यूनिवर्सिटी कैंपस में भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। दूसरी ओर ऑडी में कल्चरल इवनिंग का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित के संग हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मुरादाबाद जिले के एसएसपी श्री हेमंत कुटियाल, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गुरजीत कौर (एसडीपीओ, मुरादाबाद), एएसपी मुरादाबाद श्री सागर जैन, धर्मपत्नी श्रीमती तान्या जैन (सीए) के संग-संग कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, कॉलेज ऑफ़ लॉ के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित, प्रिंसिपल डॉ. सुशील कुमार आदि की गरिमायी मौजूदगी रही। अतिथियों ने बतौर जज भी भूमिका निभाई।

मुख्य अतिथि एसएसपी, मुरादाबाद श्री हेमंत कुटियाल को स्मृति चिन्ह देते हुए कॉलेज ऑफ़ लॉ के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित। साथ में कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, एसएसपी की धर्मपत्नी श्रीमती गुरजीत कौर, एएसपी, मुरादाबाद श्री सागर जैन, श्रीमती तान्या जैन के अलावा ला कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुशील कुमार आदि।

प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य मिला सागर जैन को

उत्तम ब्रह्मचर्य के दिन प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य सागर जैन, द्वितीय स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, तृतीय स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य प्रो. विपिन जैन, जबकि चतुर्थ स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य प्रयास जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य कुलाधिपति परिवार को प्राप्त हुआ और द्वितीय शांतिधारा करने का सौभाग्य अक्षत जैन, ऋतिक जैन, आयुष जैन, अंकित जैन, हिमांशु जैन को मिला। भोपाल से आयी रजनीश जैन एंड पार्टी ने विद्यासागर नाम रे, जपो सुबह शाम रे…, आओ आओ जी कलशा लाओ रे…, होली खेले रे मुनिराज, अकेले वन में…, केसरिया केसरिया, आज हमरो रंग केसरिया…, जबसे प्रभुदर्श मिला, मन है मेरा खिला खिला…, सनेड़ो सनेड़ो…, मस्ती में झूमे नाचे तेरे दीवाने आए हैं…, आदि भजनों पर रिद्धि-सिद्धि भवन में आए श्रावक श्राविकाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतिष्ठाचार्य ने संध्याकाल में भक्ताम्बर पाठ पढ़वाया गया।

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के रिद्धि-सिद्धि भवन में लीन श्रावक-श्राविकाएं।

ला के स्टुडेंट्स ने सल्लेखना/संथारा प्रथा पर दी नाट्य प्रस्तुति 

टीएमयू में कल्चरल इवनिंग पर कॉलेज ऑफ़ लॉ एंड लीगल स्टडीज के स्टुडेंट्स ने समापन संध्या पर विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण की प्रस्तुति के साथ हुई। कॉलेज ऑफ़ ला की छात्राओं ने भरतनाट्यम नृत्य के जरिए दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों का मन मोह लिया। इस क्लासिकल डांस परफॉर्मन्स में ख़ुशी जैन, निष्ठा जैन, मेघा जैन, मैत्री जैन, श्वेता गाँधी, मानसी जैन आदि ने भाग लिया। नाटक की थीम सल्लेखना या संथारा रही। सल्लेखना मृत्यु को निकट जानकर अपनाए जाने वाली एक जैन प्रथा है। यह श्रावक औऱ मुनि दोनों के लिए बताई गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस प्रथा को आत्महत्या जैसा बताते हुए इसे भारतीय दंड संहिता 306 औऱ 309 के तहत दंडनीय बताया था औऱ इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। इस सच्ची घटना को ला के स्टुडेंट्स ने प्रस्तुत किया। इस नाटक में माताजी के रोल में मोनिशा जैन, गुरूजी अक्षत जैन, हाई कोर्ट के एडवोकेट के किरदार में सुयश जैन औऱ अनन्या जैन के अलावा दीगर छात्र-छात्राओं ने अभिनय किया। इसमें मोनिशा जैन को नाटक के बेस्ट परफ़ॉर्मर के ख़िताब से नवाजा गया। इसके बाद राजस्थानी नृत्य प्रस्तुति से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन किया गया। इस डांस परफॉर्मन्स में ला की छात्राओं रिया जैन, सोनाली नाहर, शालिनी जैन, वंशिका जैन, संस्कृति जैन आदि ने भाग लिया। राजस्थानी डांस में वंशिका जैन को बेस्ट परफ़ॉर्मर चुना गया।

ऋचा जैन ने मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित

कॉलेज ऑफ़ ला एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित ने सल्लेखना पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने उत्तम अकिंचन्य के धर्म की पराकाष्ठा पर प्रकाश डाला। सनातन परंपरा को महान बताते हुए उन्होंने नाटक की भूमिका बताई। इसके बाद ला कॉलेज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित औऱ प्रिंसिपल डॉ. सुशील कुमार की मौजूदगी में ला फाइनल ईयर के सभी जैन स्टुडेंट्स को स्मृति चिन्ह भेंटकर विदाई दी गई। छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने कॉलेज के अनुभव भी साझा किए। हॉस्पिटल के निदेशक पीएंडडी श्री विपिन जैन ने कविता पर अभिनय से माहौल को खुशनुमा कर दिया। एल्युमिनाई विशेष जैन ने छात्र औऱ शिक्षक पर आधारित व्यंगात्मक कविता सुनाई। कुलाधिपति परिवार की पुत्रवधू श्रीमती ऋचा जैन ने मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। अंत में प्रो. दीक्षित जी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व दिव्यघोष के साथ कॉलेज ऑफ़ ला एंड लीगल स्टडीज के स्टुडेंट्स और फैकल्टी मेंबर्स ने ज्योति को जिनालय से रिद्धि-सिद्धि भवन में विराजमान कराया गया। इस मौके पर कुलाधिपति परिवार के अलावा कॉलेज ऑफ़ ला एंड लीगल स्टडीज की ओर से डीन प्रो. हरबंश दीक्षित, प्रिंसिपल डॉ. सुशील कुमार  के अलावा डॉ. एसके जैन, प्रो. विपिन जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. विनोद जैन, डॉ. अर्चना जैन,  श्री विपिन जैन एवं ला कॉलेज के अन्य फैकल्टी मेंबर्स की उपस्थिति रही।

संसार में हम न कुछ लेकर आए हैं, न कुछ लेकर जाएंगे: प्रतिष्ठाचार्य 

सम्मेद शिखर से आए श्री ऋषभ जैन ने ऑडी में बोले, संसार में जो कुछ भी दिख रहा है, वह मेरा नहीं है। ऐसा भाव अगर मानव के मन में आ जाए तो उत्तम अकिंचन्य धर्म का पालन होता है। भाव ऐसा होना चाहिए, किंचित मात्र भी मेरा नहीं है। मेरी आत्मा में जो कर्म लगे हुए हैं, वो भी मेरे नहीं हैं। आत्मा का शुद्ध रूप ही अपना होना वास्तविक रूप में अकिंचन्य धर्म है। प्रतिष्ठाचार्य जी ने एक उदाहरण के माध्यम से सात तत्वों का ज्ञान दिया। वह तत्व हैं- जीव, अजीव, आश्रव, वंद, संवद, निर्जरा और मोक्ष। जीव को हमेशा कर्मों का आश्रव होता है। केवल शुद्ध जीव का बचना ही अकिंचन्य है। ममत्व बुद्धि का त्याग करना उत्तम अकिंचन्य धर्म है। पंडित जी बोले, पाप छिप कर और पुण्य छपाकर करते हैं, पुण्य चक्रवर्ती बनाती है और पाप सड़क पर ले आती है। कहानी के माध्यम से उन्होंने बताया कि संसाधन केवल जीवन-यापन के लिए प्राप्त हुए हैं, इसीलिए छोटे बच्चे के और मृत्यु के समय ओढ़ाए जाने वाले कपड़े में जेब नहीं होती। अंत में उन्होंने कहा, इस संसार में हम न कुछ लेकर आए हैं, न कुछ लेकर जाएंगे। संत कबीरदास जी के जीवन प्रसंग द्वारा हमें पता चलता है कि जो व्यक्ति धर्म की कील के सहारे पार लग जाता है वह कदापि नहीं पिसता। उत्तम ब्रह्मचर्य के दिन प्रतिष्ठाचार्य जी बोले, आचार्यों के अनुसार- पूर्ण ब्रह्मचर्य धर्म हेतु कर्णेन्द्रिय, रसनेन्द्रिय अर्थात पंचेन्द्रिय संबंधित ब्रह्मचर्य होना चाहिए। मन, वचन और काय के स्तर पर जीवन को संयमित करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करना है। जो केवल अपनी आत्मा में रमण करते हैं, वे ही धर्म की सरिता में अनवरत बहते जाते है।

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