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सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों पर ऐतिहासिक फैसला: सार्वजनिक स्थानों से हटाने और शेल्टर में रखने का आदेश

नई दिल्ली, 8 नवंबर : देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार हो रही वृद्धि के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों और अन्य आवारा जानवरों के प्रबंधन पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शुक्रवार (7 नवंबर 2025) को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को तत्काल हटाया जाए। इन कुत्तों को पकड़ने के बाद नसबंदी (स्टेरलाइजेशन) और टीकाकरण के बाद शेल्टर होम में रखा जाए, और इन्हें वापस उसी क्षेत्र में छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसा करना इन परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य को विफल कर देगा।

फैसले की मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए शुरू किया था, जो जुलाई 2025 में दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती कुत्ते काटने की घटनाओं और रेबीज के मामलों पर आधारित था। कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा मानते हुए सभी राज्यों को शामिल किया। फैसले के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

बिंदु विवरण
आवारा कुत्तों का हटाना सभी शैक्षणिक संस्थान (स्कूल, कॉलेज), अस्पताल, खेल परिसर, बस डिपो, रेलवे स्टेशन आदि से आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए। दो सप्ताह में इन स्थानों की पहचान हो और आठ सप्ताह में सुरक्षा इंतजाम पूरे हों।
नसबंदी और शेल्टर पकड़े गए कुत्तों को एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम, 2023 के तहत नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद डेजिग्नेटेड शेल्टर में रखा जाए। इन्हें मूल स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
सुरक्षा उपाय इन परिसरों में बाड़ लगाना, गेट पर गार्ड तैनात करना अनिवार्य। प्रत्येक संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए जो निगरानी करेगा। नगर निगम और पंचायतें तीन महीने तक नियमित निरीक्षण करेंगी और प्रगति रिपोर्ट देंगी।
आवारा जानवरों का प्रबंधन हाईवे और सड़कों से आवारा मवेशी और अन्य जानवरों को हटाने का आदेश। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और अन्य एजेंसियां इन्हें शेल्टर में शिफ्ट करेंगी। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम अपनाकर भोजन स्रोतों को खत्म किया जाए।
जवाबदेही राज्यों को एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर अमल करने और हलफनामा दाखिल करने का आदेश। अनुपालन न होने पर मुख्य सचिवों को दोबारा तलब किया जा सकता है। मामला 13 जनवरी 2026 को आगे सुनवाई के लिए निर्धारित।

कोर्ट ने कहा कि यह फैसला दो दशकों से चली आ रही लापरवाही का परिणाम है, जो मानव जीवन और पशु कल्याण दोनों के लिए खतरा बन चुका है। जस्टिस संदीप मेहता ने फैसला पढ़ते हुए जोर दिया कि “यह निर्देश कोर्ट के उद्देश्य को विफल करने वाला नहीं होना चाहिए।”

पृष्ठभूमि और सुनवाई का विवरण

यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ, जब मीडिया रिपोर्ट्स में दिल्ली में बच्चों पर कुत्तों के हमलों और रेबीज मौतों का जिक्र आया। कोर्ट ने 27 अक्टूबर को राज्यों को चेतावनी दी थी। 3 नवंबर को मुख्य सचिवों को पेश होने का आदेश दिया गया, जहां कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्यालय परिसर में कुत्तों को खाना खिलाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खाना खिलाने के लिए डेजिग्नेटेड जोन बाहर बनाए जाएं।

याचिकाकर्ता ननिता शर्मा, जो एक वकील हैं और इस मुद्दे पर लंबे समय से काम कर रही हैं, फैसला सुनते ही भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन आवश्यक कदम है।” हालांकि, एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स ने विरोध जताया है, दावा किया कि यह ABC नियमों का उल्लंघन है और पशु क्रूरता को बढ़ावा देगा।

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