बैली ब्रिज बनने से बद्रीनाथ मार्ग पर हुआ भुस्खलन का समाधान

–दिग्पाल गुसाईं की रिपोर्ट-
गौचर, 26 मार्च। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे समय से परेशानी का कारण बने कमेड़ा और नंदप्रयाग के भूस्खलन क्षेत्रों पर भले ही अब तक पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका हो, लेकिन गलनाऊं में बैली ब्रिज बनने से बड़ी राहत मिली है। अब उम्मीद है कि बरसात के दौरान भी इस स्थान पर यातायात सुचारु रूप से चलता रहेगा।
दरअसल, ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कमेड़ा, नंदप्रयाग के साथ ही चटवापीपल और कर्णप्रयाग के बीच स्थित गलनाऊं क्षेत्र वर्षों से भूस्खलन के कारण संवेदनशील बना हुआ है। बारिश के मौसम में इन स्थानों पर कई-कई दिनों तक मार्ग बाधित रहने से तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता रहा है।
हालांकि एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) द्वारा इन भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार ट्रीटमेंट कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन कमेड़ा और नंदप्रयाग में अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है। इसके विपरीत, गलनाऊं में भारत कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 50 मीटर लंबा और 25 फीट चौड़ा बैली ब्रिज तैयार कर इस समस्या का प्रभावी समाधान कर दिया गया है।
इस पुल का डिजाइन विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि मुख्य मार्ग के साथ-साथ पैदल यात्रियों के लिए भी अलग सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कंपनी के अनुसार, इस पुल के निर्माण में करीब नौ माह का समय लगा है और यात्रा सीजन शुरू होने से पहले इसे पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
स्पष्ट है कि इस बैली ब्रिज के निर्माण से गलनाऊं क्षेत्र में भूस्खलन के कारण होने वाली परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी और बरसात के दिनों में भी यातायात बिना बाधा के जारी रह सकेगा।
