दून पुस्तकालय में भारतीय सिनेमा पर सचित्र व्याख्यान का आयोजन

देहरादून, 7 अप्रेल। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से भारतीय सिनेमा के 20 वर्ष पर एक सचित्र व्याख्यान का कार्यक्रम आयोजित किया गया.
फिल्म विशेषज्ञ पार्थ चटर्जी द्वारा इस सचित्र व्याख्यान में सन् 1950 के दशक से लेकर 1970 के दशक के आरम्भ तक हिंदी सिनेमा के बीस वर्ष का विवरण प्रस्तुत किया गया.
पार्थ चटर्जी ने 1950 के दशक से लेकर 1970 के दशक के आरंभतक हिंदी सिनेमा के भावनात्मक / समाजशास्त्रीय विकास का विश्लेषण। बिमल रॉय, गुरु दत्त, कमाल अमरोही, किदार शर्मा और राज कपूर जैसे निर्देशकों के दृष्टिकोण से, उस समय की चिंताओं की दर्शना। रचनाओं में महिलाओं की भूमिका पर विशेष पर विशेष प्रकाश डाला.
इसमें हिंदी सिनेमा सौंदर्यशास्त्र हिंदी सिनेमा का समाजशास्त्रीय परिदृश्य,चिंताएँ और भावनात्मक रेखांकन तथा निर्देशकों की दृष्टि/महिला अभिनेत्रियों की भूमिका साझाकरण के साथ ही कई निर्देशकों का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया. फिल्म जगत की कई हस्तियों से जुड़े बिमल रॉय,गुरु दत्त,कमाल अमरोही, किदार शर्मा, राज कपूर के साथ ही नरगिस मीना कुमारी,गीता बाली,नूतन, बीना राय,वैजयंतीमाला,निम्मी,वहीदा रहमान पर भी महत्वपूर्ण जानकारी श्रोताओं को दी. श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध होकर इस पुरानी सचित्र व्याख्यान माला की खूब जमकर सराहना की.
उन्होंने यह भी बताया कि प्रमुख कलाकारों के रूप में मान्यता प्राप्त होने के बावजूद कई कलाकारों को उचित भुगतान नहीं मिला। ठीक वैसे ही जैसे उनके समकालीन पुरुष कलाकार (दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद या अशोक कुमार, यहां तक कि भरत भूषण और प्रदीप कुमार) आदि.
कार्यक्रम में लोगों ने सवाल जबाब भी किये. प्रारम्भ में कार्यक्रम सलाहकार निकोलस ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए इस विषय पर व्यापक प्रकाश डाला.
कार्यक्रम में दून पुस्तकालय के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी सहित संजय शुक्ला,एलन सीली, नादिर बिल्मोरिया, प्रकाश नागिया,डॉ.मनोज पंजानी, अरुण असफल, अपर्णा वर्धन, वी के डोभाल,राजीव राजदान, आलोक सरीन, बी.एस. रावत, कुल भूषण नैथानी, हिमांशु आहूजा,सुंदर सिंह बिष्ट,मदन सिंह, राकेश कुमार, विजय यादव आदि अन्य लोग मौजूद थे।
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_दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून, 9410919938_
