संविधान दिवस पर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज की ओर सेप्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी का व्याख्यान

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ख़ास बातें : 

  • विश्व गुरु बनने को सहनशक्ति, धैर्य और उदारता होनी चाहिए
  • टीएमयू में वही स्टुडेंट्स आएं, जिन्हें अपना करियर बनाना हैः कुलाधिपति
  • प्रो. दीक्षित बोले, संविधान आकांक्षाओं, मूल्यों, और आदर्शों का दस्तावेज
  • टीएमयू आउटकम बेस्ड और हॉलिस्टिक एजुकेशन के लिए प्रतिबद्धः वीसी
  • रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने गिनाईं यूनिवर्सिटी की उपलब्धियां
  • विभिन्न करिकुलम में 215 से अधिक इंहैंसमेंट प्रोग्राम्स शामिलः प्रो. मंजुला
  • मुख्य वक्ता ने लॉ कॉलेज के न्यूज़ लेटर का किया विमोचन, पौधा भी रोपा

-उत्तराखंड हिमालय ब्यूरो –
मुरादाबाद, 26  नवंबर  । उत्तर प्रदेश स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन के चेयरमैन प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने बतौर मुख्य अतिथि कहा, राष्ट्र का निर्माण अचानक से नहीं होता है, बल्कि इसका निर्माण सामर्थ्यवान, संस्कारवान, चरित्रवान और देशभक्त लोग करते हैं। ऐसे लोगों के निर्माण की प्रक्रिया का नाम ही शिक्षा है। राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता, स्वायत्ता और संप्रभुता मायने रखती है, पर इससे ज्यादा मायने यह बात रखती है कि कोई व्यक्ति, कोई समाज, कोई राष्ट्र लंबे समय तक अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता को कैसे बनाए रखता है। वही समाज, व्यक्ति और राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता को लंबे समय तक बनाए रखता है, जो शिक्षा और ज्ञान से संप्रभुत्व होता है। प्रो. त्रिपाठी तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज की ओर से आयोजित संविधान दिवस के मौके पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी, टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, वाइस चांसलर प्रो. रघुवीर सिंह, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, एसोसिएट डीन प्रो. मंजुला जैन, लॉ कॉलेज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित, लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. सुशील कुमार सिंह, लॉ एंड लीगल स्टडीज के एचओडी डॉ. अमित वर्मा आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर अतिथियों को बुके देकर स्वागत किया गया। लेक्चर के दौरान मुख्य अतिथि समेत चांसलर, जीवीसी, प्रो. दीक्षित आदि ने लॉ कॉलेज के न्यूज़ लैटर का विमोचन भी किया। मुख्य वक्ता ने पौधारोपण भी किया। अंत में स्मृति चिन्ह देकर और शॉल ओढ़ाकर अतिथियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान डीआईजी श्री शलभ माथुर और एसपी सिटी श्री अखिलेश भदौरिया की गरिमामयी मौजूदगी रही। संचालन डॉ. मनीष यादव ने किया।

प्रो. त्रिपाठी बोले, नई शिक्षा नीति में हम ऐसी शिक्षा की पुरजोर वकालत करते हैं, जो मस्तिष्क के साथ-साथ हृदय का भी परिमार्जन करती हो। किसी भी संप्रभुता राष्ट्र की तीन विशेषताएं होती हैं- अपना ध्वज, अपना संविधान और अपनी भाषा। इसके लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आयाम है। ऐसा कोई नहीं, जिसमें कोई ना कोई विशेष गुण न हो। सफलता के लिए पांच बातें होना जरूरी है- थीम या आइडिया, डुअर्स, मैथोडोलॉजी, इच्छाशक्ति और भाग्य। यदि हम चार चीजों को ही बस में कर लेते हैं तो पांचवीं वस्तु स्वयं ही हमें प्राप्त हो जाती है। कानून बनाने की व्यवस्था संविधान में है, लेकिन पालन कराने की व्यवस्था नहीं है। शिक्षा का महत्व मनुष्य के जन्म से ही है। हमारा देश कर्तव्य परायण देश रहा है। यदि हम अपने कर्तव्यों का ध्यान रखते हैं तो अधिकार हमें स्वयं ही मिल जाते हैं। हमारे अंदर संविधान के प्रति श्रद्धा हो, उसका पालन करें, इसके लिए हमें सकारात्मकता की जरूरत होती है। साइंस और टेक्नोलॉजी राष्ट्र के लिए बने हैं, बल्कि राष्ट्र साइंस और तकनीकी के लिए नहीं। हमारा देश वैश्विक सोच का देश है। हमने प्राचीन काल से ही वसुधैव कुटुंबकम, सर्वे भवंतु सुखिनः जैसी सोच को अपनाया है। हमारे अंदर सहनशक्ति, धैर्य और उदारता होनी चाहिए, तभी हम विश्वगुरू बन सकते हैं।

टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन बोले कि मैं केवल इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनेजमेंट का बंदोबस्त कर सकता हूं, बाकी सारी कामयाबी देना एकेडमिशियन्स की जिम्मेदारी है। हमें ऐसा माहौल तैयार करना है, जिसमें छात्र केवल करियर के बारे में ही सोचें। टीएमयू में केवल वही स्टुडेंट्स आएं, जिन्हें अपना करियर बनाना है। हममें शक्ति के साथ सहनशक्ति भी होनी चाहिए। वह स्टुडेंट्स से बोले, अच्छे मौके जीवन में कभी-कभी प्राप्त होते हैं, जो इनका लाभ उठाते हैं वही कामयाब बनते हैं। उन्होंने छात्रों से इस लेक्चर से कोई एक सूत्र प्राप्त करके उसे जीवन भर याद रखने को कहा। श्री जैन बोले, मैनेजमैंट देश की बेस्ट फैकल्टीज यूनिवर्सिटी में लाने के लिए प्रयासरत हैं। हम स्टुडेंट्स के साथ हर समय खड़े हैं ।

टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने कहा, टीएमयू आउटकम बेस्ड और हॉलिस्टिक एजुकेशन देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम ऐसी शिक्षा देते हैं जो छात्र का सर्वांगीण डवलपमेंट करके हाई लेवल थिंकिंग विकसित कर सकें, सॉफ्ट स्किल्स का विकास हो सके और साइकोमोटर स्किल्स का भी विकास हो कर सके। हम स्टुडेंट्स को इंडस्ट्री और सोसायटी के अनुरूप तैयार करते हैं। लॉ कॉलेज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित ने कहा, संविधान केवल कानून का दस्तावेज नहीं है बल्कि यह हमारी आकांक्षाओं, मूल्यों, और आदर्शों का दस्तावेज है। दुनिया का कोई भी ऐसा देश नहीं है जिसने भारत के समान लंबे समय तक गणतंत्र रहा हो। भारत एक गणतंत्र है यह भी संविधान और जनता की क्षमता है। कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा, देश की इतनी बड़ी आबादी को मुफ्त में खाना देना भी संविधान की ताकत है। उन्होंने टीएमयू की एजुकेशन, मैनेजमेंट और समाज को जोड़ने की क्षमता को भी बताया। कोरोना के समय राज्य सरकार से टीएमयू हॉस्पिटल को एल-3 हॉस्पिटल की श्रेणी में लेना भी गौरव की बात है।

रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने यूनिवर्सिटी की यात्रा पर प्रकाश ड़ालते हुए कहा, बहुत ही सीमित संसाधनों के साथ यूनिवर्सिटी ने अपनी यात्रा शुरू की थी। समर्पण भाव और अपनी क्षमता के दम पर आज यूनिवर्सिटी 140 एकड़ के विशाल कैंपस में फैली है। यूनिवर्सिटी के यूजीसी से 12 बी स्टेटस और नैक से ए ग्रेड प्राप्त कर चुकी है। 760 से अधिक पेटेंट यूनिवर्सिटी की फैकल्टीज और स्टुडेंट्स के हो चुके हैं। 2500 से अधिक रिसर्च पेपर नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर प्रकाशित हो चुके है, जो यूनिवर्सिटी के शोध गुणवत्ता को बताता है। एसोसिएट डीन प्रो. मंजुला जैन ने कहा, हमें अपनी मैमोरी को तेज रखना चाहिए। संविधान दिवस हमारे लिए बहुत गौरव की बात है। संविधान की गुणवत्ता उसके प्रयोग पर निर्भर करती है। हमें अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिए। यूनिवर्सिटी के बारे में बताते हुए बोलीं, यूनिवर्सिटी नई शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से योजना बनाकर लागू करने के लिए प्रयासरत है। हमने इंडियन नॉलेज सिस्टम को बनाया है, जिसमें 81 कोर्सों को शामिल किया गया है। यूनिवर्सिटी ने विभिन्न करिकुलम में 215 से अधिक इंहैंसमेंट प्रोग्राम्स को शामिल किया है। साथ ही विभिन्न इंडस्टीज के साथ कोलाबोरेशन किया हुआ है। इस मौके पर कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज के एचओडी डॉ. अमित वर्मा ने मुख्य वक्ता की जीवन शैली पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल्स, सभी विभागों के एचओडी और यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं की मौजूदगी रही।

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