आपदा/दुर्घटना

उत्तराखंड में बेकाबू वन्यजीव हमले: तेंदुए ने 65 वर्षीय महिला को मार डाला, भालू के हमले में सात घायल

-Uttaratkhand Himalaya desk-

देहरादून/पौड़ी/रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के जंगलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष तेजी से गहराता जा रहा है। ताजा घटनाओं में, पौड़ी जिले के पोखरा क्षेत्र में तेंदुए के हमले में 65 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि रुद्रप्रयाग जिले के धरकुड़ी गाँव में भालू के हमले में सात महिलाएँ घायल हो गईं।

पौड़ी के पोखरा क्षेत्र में रहने वाली रानी देवी (65) गुरुवार दोपहर चारे के लिए खेत गई थीं। देर शाम तक वापस न लौटने पर परिवार वाले उनकी तलाश में निकले। कुछ दूरी पर एक तेंदुआ दिखाई दिया और बाद में रानी देवी का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ हफ्तों से तेंदुए की गतिविधियाँ बढ़ी हुई थीं।

रुद्रप्रयाग के धरकुड़ी गाँव में शुक्रवार को तब हड़कंप मच गया जब चारा लेने गई महिलाओं का एक भालू से आमना-सामना हो गया। हमले में 55 वर्षीय किद्दी देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाकी छह महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि झुंड से अलग भालू अधिक आक्रामक हो जाते हैं और ऐसे हमले अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष जंगलों में फल-फूल की कमी के कारण भालू और अन्य जानवर भोजन की तलाश में मानव बस्तियों के करीब आ रहे हैं। शीतनिद्रा से पहले भोजन जुटाने की प्रवृत्ति भी उनकी आक्रामक गतिविधियों में वृद्धि का एक कारण है।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के खीरी जिले से भी एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ आठ वर्षीय बच्ची ट्विंकल की तेंदुए के हमले में मौत हो गई। घटना खीरी के खूसीपुर पथियाँ गाँव में गुरुवार शाम घटित हुई, जहाँ स्कूल से लौट रही बच्ची को तेंदुआ खेतों की ओर घसीट ले गया। खीरी में तीन महीने में यह सातवीं मौत है। दुधवा नेशनल पार्क से सटे क्षेत्रों में लगातार तेंदुए की गतिविधियों में इज़ाफ़ा दर्ज किया जा रहा है।

उत्तराखंड और खीरी—दोनों स्थानों पर वन विभाग ने कैमरा ट्रैप, पिंजरे और रेस्क्यू टीम तैनात की हैं। रेंज अधिकारी और विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए जंगलों में भोजन की उपलब्धता बढ़ाने, ग्रामीणों को सतर्क रहने और वन्यजीवों के मूवमेंट की रियल-टाइम मॉनिटरिंग आवश्यक है।

लगातार बढ़ रहे हमलों ने स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है और वन विभाग के सामने मानवीय सुरक्षा तथा वन्यजीव संरक्षण—दोनों को संतुलित करने की चुनौती खड़ी कर दी है।

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