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1857 के क्रांतिकारियों का Secret Message Code कमल का फूल और रोटी थी

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा

“भारत में अंग्रेजी राज “-के लेखक पंडित सुंदरलाल की यह पुस्तक मुझे उनके ही नामराशि मेरे चाचा जी पूज्य स्व० सुंदरलाल बहुगुणा जी ,से विरासत के तौर पर मुझे मिली। चाचा जी इतिहास के प्रवक्ता रहे और तत्पश्चात राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने मुझे १२ वीं दर्जे में इतिहास पढ़ाया था।
लेखक श्री सुन्दरलाल की यह ऐतिहासिक पुस्तक भारत में अंग्रेजी राज पर आज की तारीख तक सबसे प्रमाणिक दस्तावेज माना जाता है I
इसका पहला संस्करण १९२९ में प्रकाशित हुआ था I पुस्तक के लिखे जाने के दिनों में ही इसकी भनक अंग्रेज हुक्मरानों को लग गई थी तो उन्होंने इसके प्रकाशन के तुरंत बाद पुस्तक को जब्त करने की योजना बना ली थीI ८ मार्च को यह पुस्तक प्रकाशित हुई और २२ मार्च को पुस्तक की जब्ती घोषित कर दी गयी। सरकार ने रेल तथा डाकघरों से भेजी जा रही ३०८ प्रतियां जब्त कर दी थी I जब्त हो जाने पर गाँधी जी ने इस मामले में दिलचस्पी ली -उन्होंने इसको आद्योपांत पढ़ने के लिए पहले महादेव भाई के सुपुर्द किया। महादेव भाई ने पूरी पुस्तक को पढ़ा इसके बाद गाँधी जी के प्रमुख अख़बार *यंग इंडिया* में इस पर कई सम्पादकीय लेख लिखे I गाँधी जी इस पुस्तक के जब्त किये जाने पर यंग इंडिया में अपने लेख में आंदोलनकारियों को
यह सलाह दी कि ब्रिटिश सरकार द्वारा पुस्तक के जब्त करने के विरोध में सत्याग्रह करने का अवसर आ गया है आप तोग इस पुस्तक के महत्वपूर्ण अंश फिर छाप कर पब्बिलिक में वितरण करें और जेल जाने की नौबत आये तो जाएं —

आजादी के बाद भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने इस पुस्तक को जनवरी १९६१ में पहला संस्करण छपा और इसका चतुर्थ संस्करण अप्रैल १९८२ में फिर छपा ,,,
इस पुस्तक से एक दिलचस्प बात पता लगी कि १८५७ कि इसके मुख्य प्रचारकों में सबसे पहला नाम एक जमींदार मौलवी अहमदशाह का है जो लखनऊ और और आगरे के शहरों में अंग्रेजो के खिलाफ भाषण देने जाते थे I क्रांति के नेताओं ने अपने संगठन के दो मुख्य चिन्ह तय किये थे -एक कमल का फूल और दूसरा चपाती (रोटी । कमल का फूल तो उन पलटनों में घुमाया जाता था जो इस संगठन में शामिल थे यह एक प्रकार का गुप्त सन्देश था –और चपाती (रोटी) एक गांव का चौकीदार दूसरे गांव के चौकीदार को संदेश के तौर रोटी का एक टुकड़ा खुद खाकर दूसरा टुकड़ा उसको पकड़ा दे देता था -इसी तरह यह रोटी संदेश कै रुप में गांववासियों को पहुंचाता था —-
GPB

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