लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बना जहां ताजा कचरे का डंपिंग स्थल शून्य है
With the launch of the Shivari Solid Waste Management Plant, Lucknow marks a major milestone in urban sustainability, achieving 100% scientific processing of municipal solid waste under the Swachh Bharat Mission-Urban.
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स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ ने नगरपालिका ठोस कचरे के 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण का लक्ष्य हासिल कर लिया है
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नव स्थापित शिवारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है
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लखनऊ में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता बढ़कर 96.53 प्रतिशत हो गई है और स्रोत पर ही कचरे को अलग करने का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक है
-A PIB FEATURE-
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों के साथ तेजी से विकसित हो रहा एक शहरी केंद्र है। इस तीव्र विकास के कारण अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता में जटिल चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सतत शहरी विकास पर केंद्रित बहुआयामी रणनीति के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान कर रहा है, जिससे शहर में जन स्वास्थ्य और पर्यावरण की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।
लखनऊ ने अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति अपने वैज्ञानिक और टिकाऊ दृष्टिकोण के अनुरूप, शिवारी संयंत्र में अपनी तीसरी ताजे अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया है। इसके साथ ही यह उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जिसने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण हासिल किया है और आधिकारिक तौर पर ‘शून्य ताजे अपशिष्ट डंप’ शहर का दर्जा प्राप्त कर लिया है।

नवस्थापित संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। लखनऊ नगर-निगम अब दो मौजूदा संयंत्रों के साथ प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 2,100 मीट्रिक टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करने में सक्षम है। इससे खुले में कचरा फेंकने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और यह टिकाऊ शहरी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसके प्रबंधन के लिए लखनऊ नगर निगम और भूमि ग्रीन एनर्जी ने 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता वाले तीन कचरा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए हैं। कचरे को जैविक (55 प्रतिशत) और अजैविक (45 प्रतिशत) भागों में अलग किया जाता है। जैविक कचरे को खाद और बायोगैस में परिवर्तित किया जाता है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण के लिए छांटा जाता है या सीमेंट और कागज उद्योगों में उपयोग के लिए अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) में परिवर्तित किया जाता है। लखनऊ में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता बढ़कर 96.53 प्रतिशत हो गई है और स्रोत पर ही कचरे को अलग करने का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक है।

नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शहर में लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से लगभग 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया गया है। इससे प्राप्त अपशिष्ट आधारित ईंधन (आरडीएफ), निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट, जैव-मिट्टी और मोटे कणों का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल तरीकों जैसे पुनर्चक्रण, सह-प्रसंस्करण और निचले इलाकों में भूमि भराव के लिए किया गया है। कचरे के प्रसंस्करण से कई मूल्यवान उप-उत्पाद उत्पन्न हो रहे हैं। लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन अपशिष्ट आधारित ईंधन (आरडीएफ) को भारत भर के उद्योगों में सीमेंट और कागज निर्माण में सह-प्रसंस्करण के लिए भेजा गया है। मोटे कणों (4.38 लाख मीट्रिक टन), जैव-मिट्टी (0.59 लाख मीट्रिक टन) और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (2.35 लाख मीट्रिक टन) जैसी अक्रिय सामग्रियों का उपयोग निचले इलाकों में भूमि भराव और अवसंरचना विकास के लिए किया गया है।

इससे धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया। साइट पर 25 एकड़ से अधिक भूमि का पुनर्विकास किया गया है, जिसे अब 2,100 मीट्रिक टन की दैनिक प्रसंस्करण क्षमता वाली एक पूर्णतः कार्यरत ताजे अपशिष्ट उपचार सुविधा के रूप में विकसित किया जा रहा है। साइट पर अब विंडरो पैड, आंतरिक सड़कें, शेड, समर्पित वजन मापने वाले पुल और एक संपूर्ण अपशिष्ट प्रसंस्करण प्रणाली मौजूद है।
आगे की योजना के तहत एलएमसी शिवारी में अपशिष्ट-से-ऊर्जा (डब्ल्यूटीई) संयंत्र स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित संयंत्र अपशिष्ट से प्राप्त कच्चे ईंधन (आरडीएफ) को बिजली में परिवर्तित करेगा। योजनाबद्ध 15 मेगावाट का डब्ल्यूटीई संयंत्र प्रतिदिन 1,000-1,200 मीट्रिक टन आरडीएफ का उपयोग करेगा, जिससे लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित सीमेंट कारखानों तक आरडीएफ के परिवहन की लागत और दूरी कम करने में मदद मिलेगी।
लखनऊ का अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है—जिसमें संसाधनों की अधिकतम पुनर्प्राप्ति, अपशिष्ट पदार्थों का न्यूनतम उपयोग और पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है। लखनऊ नगर निगम की ये पहलें भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य शहरों और एजेंसियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
