पश्चिम एशिया का गहराता संकट और भारत की बढ़ती ‘गैस पीड़ा’
The escalating military conflict in West Asia, particularly between Iran and Israel-US allies, has destabilized the Strait of Hormuz, disrupting global energy supplies. Qatar, a major LNG exporter supplying about 40% of India’s imports, halted production following Iranian drone attacks on its facilities, temporarily cutting around 20% of worldwide LNG output.This has forced India to rely on expensive spot market purchases, with prices surging from $10 to $25 per unit. GAIL has warned of up to 30% supply cuts, severely impacting the fertilizer industry, agriculture, food security, city gas distribution, and CNG/PNG prices for households and vehicles.JSRawat

-जयसिंह रावत-
पश्चिम एशिया में धधकती युद्ध की ज्वाला अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसकी तपन भारतीय रसोइयों और औद्योगिक गलियारों में ‘गैस पीड़ा’ के रूप में महसूस की जाने लगी है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग को अस्थिर कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के समक्ष एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।वास्तव में यह संकट केवल आपूर्ति की कमी का नहीं, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक संवेदनशीलता का भी है।
आपूर्ति का संकट और कतर की भूमिका
भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा स्तंभ कतर से होने वाला आयात है, जो वर्तमान में सीधे निशाने पर है। विश्व के तीसरे सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) निर्यातक कतर ने हाल ही में ईरानी हमलों के बाद अपना उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। इसके चलते दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति रातों-रात थम गई है। भारत के लिए स्थिति और भी विकट है क्योंकि हमारी कुल एलएनजी आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले कतर से आता है। गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा हाल ही में दी गई चेतावनी कि गैस आपूर्ति में 30 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है, इस बात की पुष्टि करती है कि युद्ध की विभीषिका हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।
कीमतों का बोझ और घरेलू अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
संकट केवल उपलब्धता का नहीं है, बल्कि बढ़ती कीमतों का भी है। दीर्घकालिक अनुबंधों के बाधित होने के कारण भारत को अब ‘स्पॉट मार्केट’ से गैस खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जहाँ कीमतें कुछ ही दिनों में 10 डॉलर से उछलकर 25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुँच गई हैं। इस मूल्य वृद्धि का सबसे पहला और गहरा प्रहार उर्वरक उद्योग पर पड़ेगा, जहाँ प्राकृतिक गैस एक अनिवार्य कच्चे माल के रूप में उपयोग होती है। यदि उर्वरक उत्पादन की लागत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर कृषि लागत और अंततः खाद्य सुरक्षा पर पड़ना तय है। इसके अतिरिक्त, पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने जिस ‘सिटी गैस वितरण’ (CGD) और सीएनजी वाहनों को बढ़ावा दिया है, वे भी अब अधर में नजर आ रहे हैं। महंगी आयातित गैस को जब घरेलू गैस के साथ मिश्रित किया जाएगा, तो सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भारी उछाल आना स्वाभाविक है, जो सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर डाका डालेगा।
रणनीतिक सबक और भविष्य की राह
वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल आयात पर निर्भर रहकर कोई भी देश दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता। आज भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी ऊर्जा नीति को ‘विविधीकरण’ और ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर मोड़ने की है। हमें केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे अन्य स्रोतों से अपने संबंधों को और मजबूत करना होगा। साथ ही, घरेलू स्तर पर गैस की खोज और उत्पादन की गति को तेज करना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन गया है।
विकल्पों की खोज: बायोगैस और नवीकरणीय ऊर्जा
भविष्य की ऊर्जा नीति में बायोगैस और हरित हाइड्रोजन जैसे विकल्पों को मुख्यधारा में लाना होगा। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के पास पराली, गोबर और शहरी कचरे के रूप में ऊर्जा का एक विशाल भंडार उपलब्ध है, जिसे बायोगैस में बदलकर आयात पर निर्भरता को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे निवेश को और अधिक गति देनी होगी ताकि हमारा ऊर्जा ढांचा किसी एक क्षेत्र या मार्ग के संकट से पूरी तरह ध्वस्त न हो।
दूरदर्शी और संतुलित ऊर्जा नीति की आवश्यकता
पश्चिम एशिया की वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति यह सबक देती है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। यदि हमें एक विकसित और स्थिर अर्थव्यवस्था का सपना साकार करना है, तो हमें एक ऐसी दूरदर्शी और संतुलित ऊर्जा नीति की आवश्यकता है जो युद्ध और तनाव के थपेड़ों को सहने में सक्षम हो। ‘गैस की यह पीड़ा’ तभी कम होगी जब हम आयात की बैसाखियों को छोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएंगे।
