मानव–वन्यजीव संघर्ष बना पहाड़ों से पलायन का बड़ा कारण
पोखरी, 21 दिसंबर (राणा)।सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्राम पंचायत किमोठा के प्रधान बाल ब्रह्मचारी हरिकृष्ण किमोठी ने पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन का प्रमुख कारण मानव–वन्यजीव संघर्ष को बताया है। एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उन्होंने कहा कि पहाड़ों में भालू, बाघ, जंगली सूअर, बंदर और लंगूरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
हरिकृष्ण किमोठी ने कहा कि भालू और बाघ के हमलों से कई स्थानों पर लोगों की जान जा रही है, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए खेतों में काम करना और जंगल जाना अत्यंत जोखिम भरा हो गया है। वहीं, स्कूली बच्चों का सुरक्षित रूप से स्कूल आना-जाना भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि जंगली सूअर, बंदर और लंगूरों ने खेती-बाड़ी को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया है। लगातार फसल बर्बादी के कारण काश्तकारों का कृषि से मोहभंग हो रहा है और आजीविका के साधन खत्म होते जा रहे हैं। मजबूरी में ग्रामीण परिवार रोज़गार की तलाश में मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं।
हरिकृष्ण किमोठी ने सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर पहाड़ों से पलायन रोकने की बातें की जाती हैं, जबकि दूसरी ओर जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव है। ढुलमुल नीतियों के चलते अधिकांश पर्वतीय गांव खाली होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेषकर भालू और बाघ के भय से लोगों का अकेले घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
किमोठी ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि मानव–वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को देखते हुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाएं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पूर्व सैनिकों को हथियारों के साथ जंगली जानवरों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और पहाड़ों से हो रहे पलायन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
