सुरक्षा

पश्चिमी सीमांत पर शुरू हुआ त्रि-सेवा युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल 2025’

 

नौसेना-हवाई-थल सेनाओं का समन्वित परीक्षण, सर क्रीक क्षेत्र मुख्य फोकस

जैसलमेर / नई दिल्ली, 30 अक्टूबर । भारत ने आज अपने पश्चिमी सीमांत पर बड़े पैमाने पर त्रि-सेवा (Army-Navy-Air Force) युद्धाभ्यास “त्रिशूल 2025” का औपचारिक शुभारम्भ किया। यह अभ्यास विशेषतः गुजरात के सर क्रीक और कच्छ रेंज के चारों ओर केंद्रित है और इसे कई रणनीतिक उद्देश्यों — क्षेत्रीय सतर्कता, बहु-डोमेन (multi-domain) समन्वय और सीमावर्ती तैयारियों की टेस्टिंग — के लिए आयोजित किया जा रहा है।

इस अभ्यास में थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त क्षमताओं का परीक्षण किया जाएगा — जिसमेँ समुद्री-तटीय ऑपरेशन्स, amphibious लैंडिंग-कौशल, त्वरित वायुसमर्थन, लंबी दूरी की आर्टिलरी और गतिशील टुकड़ी-समन्वय शामिल हैं। रक्षा स्रोतों के अनुसार यह अभ्यास वास्तविक-परिस्थितिगत परिदृश्यों के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण निर्णय-निर्माण, कमांड-कंट्रोल तथा इंटीग्रेटेड संवेदन (surveillance) और अग्नि शक्ति के समन्वय का परीक्षण करेगा।

किस इलाके में औ कितना बड़ा?
अभ्यास का क्षेत्र जैसलमेर से लेकर कच्छ के मार्शल-एरिया और सर क्रीक तक फैला है — एक संवेदनशील, दलदली तथा खारट इलाके जहाँ भूमि-समुद्र सीमा का मिश्रित जियो-भूगोल है। रिपोर्टों में बताया गया है कि इसमें लगभग 30,000 से अधिक सैनिक, हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान (राफेल समेत), टैंक्स, तोपखाने और नौसेना की सतह-नौकाएँ हिस्सा लेंगी। अभ्यास 30 अक्टूबर से प्रारम्भ होकर करीब 10 नवंबर तक चलेगा, जिसके चलते संबंधित हवाई-क्षेत्र पर नो-फ्लाई-ज़ोन/NOTAM जारी किए गए हैं।

क्यों किया जा रहा है — रणनीतिक संदर्भ
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार यह अभ्यास सिर्फ सैनिक प्रशिक्षण नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी है — सीमा पर स्थिति की निगरानी, संभावित किसी उकसावे पर त्वरित तथा समन्वित प्रतिक्रिया देने की क्षमता और बहु-डोमेन आक्रमण/रक्षा रणनीतियों को परखने का अवसर। सर क्रीक का भौगोलिक महत्व ऐसे समय में और बढ़ गया है जब वहां गत व्यापक राजनीतिक-सैनिक चर्चा और तनाव की खबरें आई थीं। सरकार ने सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता पर सख्त रुख का इशारा पहले ही कर दिया था, और यह अभ्यास उसी नीति-परिप्रेक्ष्य में आता है।

पड़ोसी देशों की प्रतिक्रियाएँ और एयरोस्पेस प्रभाव
अभ्यास शुरू होने से पहले और दौरान पाकिस्तान ने भी अपने कुछ हवाई मार्गों और तकनिकी नियमन के संबंध में कदम उठाए; कुछ रिपोर्टों ने कहा कि पाकिस्तान ने भी NOTAM जारी कर कुछ हवाई गतिविधियाँ सीमित कीं — जिसका असर क्षेत्रीय उड्डयन संचालन पर पड़ा। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन ने नागरिक और वाणिज्यिक उड़ानों के लिए वैकल्पिक मार्गों और सुरक्षा-अनुदेश जारी किए हैं। आम नागरिकों और मछुआरों को भी सीमावर्ती समुद्री-क्षेत्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

डिफेंस विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे अभ्यास समय-समय पर आवश्यक होते हैं — वे न केवल उपकरण और रणनैतिक प्रक्रियाओं की दक्षता जाँचते हैं, बल्कि अलग-अलग सेवाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, सूचना-हस्तांतरण और त्वरित निर्णय-निर्माण के अभ्यास के रूप में भी काम करते हैं। साथ ही, यह अभ्यास स्थानीय-सेनेटरी-लॉजिस्टिक्स, संचार नेटवर्क और आपातकालीन बचाव/सहयोग प्रक्रियाओं की क्षमता को भी परखता है।

सुरक्षा और नागरिक सलाह
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभ्यास के दौरान सीमित क्षेत्रों में आवाजाही और समुद्री-गतिविधियाँ नियंत्रित रहेंगी। हवाई मार्गों के लिए जारी NOTAM का पालन अनिवार्य है; मछुआरे, नाविक और स्थानीय तटीय समुदाय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप कार्य करें। किसी भी अप्रत्याशित घटनाक्रम की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

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