रक्षा मंत्रालय ने साल 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ घोषित किया
Raksha Mantri Shri Rajnath Singh chaired a meeting with all the Secretaries of the Ministry of Defence (MoD) on the eve of the New Year to review the progress on various schemes, projects, reforms, and the way ahead. In order to give impetus to the ongoing and future reforms, it was unanimously decided to observe 2025 as the ‘Year of Reforms’ in the MoD. This would aim at transforming the Armed Forces into a technologically advanced combat-ready force capable of multi-domain integrated operations.
- ‘सुधारों का वर्ष’ देश में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह
- “यह देश की रक्षा तैयारियों में अभूतपूर्व प्रगति की नींव रखेगा और 21वीं सदी की चुनौतियों के बीच भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता भी सुनिश्चित करेगा”
नयी दिल्ली, 1 जनवरी । रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नव वर्ष की पूर्व संध्या पर विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, सुधारों और भविष्य की गतिविधियों में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए रक्षा मंत्रालय के सभी सचिवों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। वर्तमान एवं भविष्य के सुधारों को गति देने के लिए ही रक्षा मंत्रालय में सर्वसम्मति से साल 2025 को ‘सुधार वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत और युद्धक परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार बल में रूपांतरित करना है, जो बहु-क्षेत्रीय एकीकृत संचालन में सक्षम हो। वर्ष 2025 में प्रमुख हस्तक्षेप के लिए निम्नलिखित व्यापक क्षेत्रों की पहचान की गई है:
- सुधारों का उद्देश्य संयुक्तता एवं एकीकरण पहल को और अधिक विस्तार देना तथा एकीकृत थिएटर कमांड की स्थापना को सुगम बनाना होना चाहिए।
- सुधारों को साइबर व अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, हाइपरसोनिक्स और रोबोटिक्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित होना चाहिए। भविष्य के युद्धों को जीतने के लिए आवश्यक संबद्ध रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाएं भी विकसित की जानी चाहिए।
- अंतर-सेवा सहयोग एवं प्रशिक्षण के माध्यम से परिचालन आवश्यकताओं और संयुक्त परिचालन क्षमताओं की साझा समझ विकसित करना।
- तीव्र एवं सुदृढ़ क्षमता विकास के लिए अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सरल व समय-संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है।
- रक्षा क्षेत्र और असैन्य उद्योगों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व ज्ञान साझाकरण को सुविधाजनक बनाना तथा व्यापार को आसान बनाकर सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना।
- रक्षा इकोसिस्टम में विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना। बंधनों को तोड़ना। प्रभावी असैन्य-सैन्य समन्वय का उद्देश्य अकुशलताओं को समाप्त करना और संसाधनों का अनुकूलन करना होना चाहिए।
- भारत को रक्षा उत्पादों के एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में स्थापित करना, ज्ञान साझाकरण व संसाधन एकीकरण के लिए भारतीय रक्षा उद्योगों और विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के बीच अनुसंधान एवं विकास तथा साझेदारी को बढ़ावा देना।
- भूतपूर्व सैनिकों की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए उनके कल्याण को सुनिश्चित करना। भूतपूर्व सैनिकों के लिए कल्याणकारी उपायों के अनुकूलन की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
- भारतीय संस्कृति और विचारों के प्रति गौरव की भावना उत्पन्न करना, स्वदेशी क्षमताओं के विस्तार के माध्यम से वैश्विक मानकों को प्राप्त करने में आत्मविश्वास को बढ़ावा देना और साथ ही देश की परिस्थितियों के अनुकूल आधुनिक सेनाओं से सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को अपनाना।
रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सुधार का वर्ष’ सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह देश की रक्षा तैयारियों में अभूतपूर्व प्रगति की नींव रखेगा, जिससे 21वीं सदी की चुनौतियों के बीच राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने की तैयारी पूरी होगी।
