लद्दाख हिंसा के लिए गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक को ठहराया जिम्मेदार
नई दिल्ली, 25 सितम्बर। लद्दाख में छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने मंगलवार को हिंसक रूप ले लिया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उनके भड़काऊ भाषणों ने भीड़ को उकसाया, जिसके कारण हालात बेकाबू हो गए।
मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि वांगचुक 10 सितम्बर से भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी प्रमुख मांगों में लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करना और राज्य का दर्जा देना शामिल था। मंत्रालय का कहना है कि ये वही मुद्दे हैं जिन पर भारत सरकार पहले से ही Apex Body Leh और Kargil Democratic Alliance के साथ बातचीत कर रही है। उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) और उसकी उप-समितियों की कई बैठकों में इन बिंदुओं पर चर्चा भी हो चुकी है।
गृह मंत्रालय ने कहा कि भूख हड़ताल के दौरान कई नेताओं ने वांगचुक से हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने इसकी अनदेखी की और लोगों को भड़काने वाले बयान देने लगे। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने अरब स्प्रिंग और नेपाल में हाल ही में हुए Gen Z विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण देकर स्थानीय लोगों को उकसाया और उन्हें यह आभास दिलाने की कोशिश की कि इसी प्रकार के आंदोलन से ही परिवर्तन संभव है।
हिंसा की ओर मुड़ा आंदोलन
मंत्रालय के अनुसार, 24 सितम्बर को सुबह करीब 11.30 बजे उनके इन भड़काऊ भाषणों से प्रभावित भीड़ अचानक भूख हड़ताल स्थल से निकलकर हिंसक हो गई। गुस्साई भीड़ ने सबसे पहले लेह में एक राजनीतिक दल के कार्यालय और फिर मुख्य कार्यकारी पार्षद (CEC) के सरकारी कार्यालय पर हमला कर दिया। दोनों ही स्थानों पर आगजनी की गई और व्यापक तोड़फोड़ हुई।
भीड़ ने मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर भी हमला किया और पथराव करते हुए पुलिस के एक वाहन को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान 30 से अधिक पुलिस और सीआरपीएफ के जवान घायल हो गए। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बेकाबू भीड़ लगातार हिंसक गतिविधियों को अंजाम देती रही और पुलिसकर्मियों पर हमला करती रही।
स्थिति जब पूरी तरह हाथ से निकल गई तो पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। मंत्रालय ने कहा कि दुर्भाग्यवश इस गोलीबारी में कुछ लोगों के हताहत होने की खबर है।
हालात काबू में
गृह मंत्रालय के अनुसार, सुबह हुई इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की और दोपहर 4 बजे तक स्थिति सामान्य हो गई।
मंत्रालय ने यह भी खुलासा किया कि इस हिंसक घटनाक्रम के बीच ही सोनम वांगचुक ने अचानक अपना उपवास तोड़ दिया और किसी भी प्रकार की शांति बहाली का प्रयास किए बिना एम्बुलेंस से अपने गांव लौट गए। मंत्रालय ने इसे गैर-जिम्मेदाराना आचरण बताते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि आंदोलन का असली उद्देश्य संवाद से समाधान निकालना नहीं था।
सरकार की अपील
प्रेस विज्ञप्ति में गृह मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार लद्दाख की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने और उन्हें पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने अपील की है कि लोग पुराने और भड़काऊ वीडियो या संदेशों को मीडिया और सोशल मीडिया पर साझा न करें ताकि क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनी रहे।
मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि 6 अक्टूबर को उच्चाधिकार प्राप्त समिति की अगली बैठक प्रस्तावित है और 25-26 सितम्बर को भी लद्दाख के नेताओं के साथ वार्ता का कार्यक्रम तय है।
सरकार का मानना है कि संवाद की इस प्रक्रिया से पहले ही कई ठोस नतीजे निकले हैं—जैसे लद्दाख की अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 84 प्रतिशत करना, महिलाओं को परिषदों में एक-तिहाई आरक्षण देना और भोटी व पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्रदान करना। ऐसे में हिंसा का सहारा लेना जनहित और क्षेत्र की शांति के खिलाफ है।
