हर थाली में भोजन : 81 करोड़ नागरिकों के लिए खाद्य और पोषण समानता का भारत मिशन
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-A PIB FEATURE –
भारत आज उस मुकाम पर खड़ा है जहाँ हर नागरिक की थाली में भोजन पहुँचाना केवल एक योजना नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रतिबद्धता बन चुका है। अक्टूबर 2025 तक 78.90 करोड़ लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत नि:शुल्क खाद्यान्न मिल रहा है। यह संख्या अपने आप में दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक को दर्शाती है।
खाद्य सुरक्षा: अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी
खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल अनाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक को सुरक्षित, पौष्टिक और पर्याप्त भोजन हर समय सुलभ हो। इसी दृष्टि से वर्ष 2007-08 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) आरंभ किया गया, जिसका उद्देश्य था—धान, गेहूं और दालों के उत्पादन में वृद्धि, मिट्टी की उर्वरता को पुनर्स्थापित करना, और किसानों की आय में सुधार लाना।
2014-15 में मिशन में मोटे अनाज (श्री अन्न) को शामिल किया गया और 2024-25 में इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन (NFSNM) का नया रूप दिया गया, ताकि खाद्य उत्पादन के साथ पोषण पर भी समान बल दिया जा सके।
उत्पादन से वितरण तक: दोहरी जिम्मेदारी
जहाँ एनएफएसएनएम देश के खाद्यान्न उत्पादन को मजबूत करता है, वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 उसका समान वितरण सुनिश्चित करता है। अधिनियम के तहत ग्रामीण भारत की 75% और शहरी भारत की 50% आबादी — कुल मिलाकर 81 करोड़ से अधिक लोग — लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के अंतर्गत आते हैं।
1 जनवरी 2023 से सरकार ने सभी पात्र परिवारों को नि:शुल्क अनाज देने का निर्णय लिया था, जिसे अब 1 जनवरी 2024 से पाँच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है। इस पर केंद्र सरकार का अनुमानित व्यय 11.80 लाख करोड़ रुपये है।
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली: गरीबों की जीवनरेखा
टीपीडीएस वह तंत्र है जो अनाज को हर गाँव और हर पात्र परिवार तक पहुँचाता है। केंद्र सरकार अनाज की खरीद, भंडारण और परिवहन करती है, जबकि राज्य सरकारें लाभार्थियों की पहचान, राशन कार्ड जारी करने और वितरण व्यवस्था की निगरानी करती हैं।
इस व्यवस्था में दो प्रमुख श्रेणियाँ हैं
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) : देश के सबसे निर्धन परिवार, जिन्हें प्रति परिवार प्रति माह 35 किलो अनाज मिलता है।
प्राथमिकता परिवार (PHH) : प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज के हकदार।
इन परिवारों की पहचान राज्यों द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार की जाती है ताकि कोई भी पात्र परिवार वंचित न रह जाए।
डिजिटल भारत में ‘मेरा राशन’ और ‘अन्न मित्र’
सरकार ने ‘मेरा राशन 2.0’ और ‘अन्न मित्र’ जैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से राशन वितरण को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। ई-पीओएस मशीनों से 99.9% राशन कार्ड आधार से जुड़े हैं और 99.6% उचित मूल्य की दुकानों का ऑटोमेशन पूरा हो चुका है।
वन नेशन, वन राशन कार्ड (ONORC) के तहत आज कोई भी लाभार्थी देश के किसी भी हिस्से में जाकर अपना हकदार अनाज प्राप्त कर सकता है। अक्टूबर 2025 तक 191 करोड़ से अधिक पोर्टेबिलिटी लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं।
पोषण सुरक्षा: केवल अनाज नहीं, स्वास्थ्य भी
भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि पोषण के लिए है। इसलिए सरकार ने चावल फोर्टिफिकेशन पहल शुरू की, जिसमें चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। मार्च 2024 तक देश की सभी योजनाओं के तहत वितरित 100 प्रतिशत चावल फोर्टिफाइड किया जा चुका है।
सरकार ने इस पहल को दिसंबर 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दी है, जिसके लिए 17,082 करोड़ रुपये का पूर्ण वित्तपोषण केंद्र सरकार करेगी।
कोविड काल से सबक: पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना
महामारी के दौरान गरीबों की सहायता के लिए शुरू हुई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) अब एक स्थायी मिशन बन चुकी है। इसके तहत भी अंत्योदय और प्राथमिकता परिवारों को नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रत्यक्ष लाभांतरण: सब्सिडी सीधे खाते में
सरकार ने 2015 से प्रत्यक्ष लाभांतरण (DBT) व्यवस्था लागू की, जिसके तहत चंडीगढ़, पुडुचेरी और दमन-दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में लाभार्थियों को सब्सिडी की रकम सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है।
स्कूलों और आंगनबाड़ियों तक पोषण
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित आईसीडीएस योजना और पीएम पोषण (मिड-डे मील) ने बच्चों और माताओं के लिए पौष्टिक भोजन की गारंटी दी है।
वित्त वर्ष 2024-25 में इन योजनाओं के लिए क्रमशः 26.46 लाख मीट्रिक टन और 22.96 लाख मीट्रिक टन अनाज का आवंटन किया गया है।
अनाज भंडार की स्थिति
1 जुलाई 2025 तक केंद्रीय पूल में 377.83 एलएमटी चावल और 358.78 एलएमटी गेहूं का भंडार था, जो अनिवार्य भंडारण मानदंडों से कहीं अधिक है। यह दिखाता है कि भारत न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि आपदाओं या मांग वृद्धि के समय भी खाद्य आपूर्ति बनाए रखने में सक्षम है।
भूख से मुक्त भारत की ओर
भारत का खाद्य सुरक्षा मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ‘हर थाली में भोजन’ का संकल्प है। यह देश की सामाजिक नीति का सबसे मानवीय चेहरा है — जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी नागरिक भूखा न सोए, और हर बच्चा, हर माँ, हर परिवार पोषित और सशक्त बने।
आज जब 81 करोड़ नागरिक इस योजना के दायरे में हैं, तब यह स्पष्ट है कि भारत ने भूख के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है।
