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‘मिशन मौसम’: अब पंचायत स्तर तक मिलेगी सटीक चेतावनी; भारत ने कसी जलवायु परिवर्तन से निपटने की कमर

नई दिल्ली, 05 फरवरी. जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते मौसम के मिजाज—जैसे अचानक भारी बारिश, भीषण लू (हीट वेव) और चक्रवातों की बढ़ती आवृत्ति—से निपटने के लिए भारत अब एक ‘क्लाइमेट स्मार्ट’ राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि देश में अब पंचायत स्तर तक सटीक मौसम पूर्वानुमान देने वाली अत्याधुनिक प्रणालियाँ सक्रिय हो चुकी हैं।

‘मिशन मौसम’ और उच्च तकनीक का सुरक्षा कवच

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन मौसम’ के तहत भारत ने अपनी निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। देश का 87 प्रतिशत हिस्सा अब 47 डॉप्लर मौसम रडार (DWR) के दायरे में आ चुका है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब मौसम विभाग बादलों की हलचल और आने वाले खतरों को पहले से कहीं अधिक स्पष्टता और तेजी से पकड़ सकता है।

पंचायत स्तर पर सटीक भविष्यवाणी: ‘भारत-एफएस’ और ‘मिथुना’ समाचार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भारत की नई कंप्यूटर सिमुलेशन प्रणालियाँ हैं:

  1. भारत पूर्वानुमान प्रणाली (BharatFS): यह उन्नत मॉडल 6 किलोमीटर के अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर काम करता है। इसकी विशेषता यह है कि यह अब किसी विशिष्ट शहर ही नहीं, बल्कि पंचायत या पंचायतों के समूह स्तर पर 10 दिनों तक की वर्षा का सटीक पूर्वानुमान दे सकता है।

  2. मिथुना पूर्वानुमान प्रणाली (Mithuna-FS): यह नई पीढ़ी का वैश्विक मॉडल है जो वायुमंडल, महासागर और समुद्री बर्फ जैसे सभी घटकों को जोड़कर विश्लेषण करता है। यह विशेष रूप से मानसून की गतिशीलता और चक्रवातों की सटीक जानकारी देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

शहरी क्षेत्रों के लिए ‘हाइपर-रेजोल्यूशन’ मॉडल राजधानी दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए 330-मीटर का ‘हाइपर-रेजोल्यूशन’ शहरी मॉडल पेश किया गया है। यह तकनीक विशेष रूप से कोहरा, दृश्यता (विजिबिलिटी) और वायु गुणवत्ता के सटीक पूर्वानुमान में मदद करेगी, जिससे सर्दियों के दौरान यातायात और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया जा सकेगा।

सुपरकंप्यूटर ‘अरुणिका’ और ‘अर्का’ की शक्ति इतने विशाल डेटा को प्रोसेस करने के लिए सरकार ने ‘अरुणिका’ और ‘अर्का’ नामक उच्च-प्रदर्शन वाली कंप्यूटिंग सुविधाएं (सुपरकंप्यूटर्स) स्थापित की हैं। ये मशीनें रडार, उपग्रह और स्वचालित मौसम स्टेशनों से प्राप्त जानकारी को सेकंडों में विश्लेषित कर अंतिम उपयोगकर्ता तक पहुँचाती हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की तैयारी भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे में विकसित ‘पृथ्वी प्रणाली मॉडल’ का उपयोग अब वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए किया जा रहा है। भारत न केवल अपनी सुरक्षा कर रहा है, बल्कि ‘इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज’ (IPCC) जैसी वैश्विक संस्थाओं को भी डेटा साझा कर रहा है।

राज्यसभा में पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा दी गई यह जानकारी स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल मौसम की मार सहने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से उससे दो कदम आगे रहने वाला राष्ट्र बन गया है।

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