जड़ी-बूटी शोध संस्थान मंडल और महाविद्यालय गोपेश्वर के बीच एमओयू संपन्न

छात्रों की क्षमता विकास और स्वरोजगार सृजन की दिशा में कदम
चमोली, 9 अक्टूबर ( कपरूवाण)। नई शिक्षा नीति के तहत छात्र-छात्राओं के कौशल एवं क्षमता विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान, मंडल (चमोली) ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में गुरुवार को संस्थान ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोपेश्वर के साथ-साथ कृषि, उद्यान, सहकारिता, भेषज संघ सहित अन्य विभागों के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इस एमओयू के माध्यम से अब जड़ी-बूटी के कृषिकरण, शोध एवं विकास संबंधी कार्यों में विद्यार्थियों को सहज रूप से प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
संस्थान के मंडल मुख्यालय में आयोजित समारोह में संस्थान के निदेशक एवं मुख्य विकास अधिकारी, चमोली डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के व्यावहारिक और शोध आधारित कौशल विकास पर बल दिया गया है। इस दिशा में संस्थान युवाओं को जड़ी-बूटी कृषिकरण एवं शोध कार्यों हेतु प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाएगा।
उन्होंने कहा कि इस एमओयू के तहत राजकीय महाविद्यालय गोपेश्वर के वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान एवं रसायन विज्ञान विभागों के छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण और शोध कार्यों में सहयोग प्रदान किया जाएगा। साथ ही जिला प्रशासन के अन्य संबंधित विभागों को भी इस पहल से जोड़ा गया है।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं में कौशल और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। संस्थान की ओर से प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में भी सहयोग दिया जाएगा।
इस अवसर पर जड़ी-बूटी सलाहकार बोर्ड के उपाध्यक्ष बलवीर घुनियाल और भुवन विक्रम डबराल ने कहा कि राज्य में जड़ी-बूटियों के कृषिकरण से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और उनके जीवन स्तर में सुधार आया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्यभर में लगभग 20 हजार किसान नौ सौ हेक्टेयर भूमि पर जड़ी-बूटियों की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य विभागों की मदद से कूट, कुटकी, अतीस जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के साथ संस्थान का यह अनुबंध शोध कार्यों और जड़ी-बूटी कृषिकरण को और गति देने वाला सराहनीय कदम है।
इस मौके पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. ए.के. भंडारी ने छात्र-छात्राओं को विभिन्न जड़ी-बूटियों के उत्पादन, गुण, उपयोग और व्यावसायिक संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय गोपेश्वर के प्रभारी प्राचार्य डॉ. दिनेश सती, परियोजना निदेशक आनंद भाकुनी, कृषि अधिकारी जेपी तिवारी, मुख्य उद्यान अधिकारी नितेंद्र सिंह, डॉ. प्रियंका राणा, डॉ. रुपेश कुमार, डॉ. दिनेश गिरी, डॉ. सी.पी. कुनियाल, डॉ. डी.एस. बिष्ट, दिनेश तिवारी, मनोज जुयाल, विद्यासागर, देवेंद्र बिष्ट, पुनीत पुरोहित, संजीव बिष्ट, कलम सिंह झिंक्वाण, भेषज संघ सचिव विवेक कुमार सहित अन्य अधिकारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
