नंदादेवी बड़ी जात की तिथियां घोषित : इसी साल होगा हिमालयी कुम्भ
सामन्ती परम्परा पर लोक भारी: लोगों ने नहीं माना राज जात समिति का तर्क

हरेंद्र बिष्ट/महिपाल गुसाईं
नंदानगर / थराली, 23 जनवरी। कांस्वा के कुंवरों की असहमति के बावजूद आज बसंत पंचमी के अवसर पर नंदाधाम कुरूड़ से श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की 2026 में बड़ी जात यात्रा की तिथियों की विधिवत घोषणा कर दी गई है। इसके साथ ही बधाण, दशोली एवं बंड़ परगनों की नंदा डोलियों के रूटमैप भी जारी कर दिए गए हैं। जबकि राकेश कुंवर की अध्यक्षता वाली समिति ने मौसम के जोखिम को लेकर राज जात 2026 को स्थगित कर इस 2027 में कराने की घोषणा कर दी थी।
जारी कार्यक्रम के अनुसार, बधाण की नंदादेवी की बड़ी जात यात्रा 5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरूड़ से प्रारंभ होगी और 30 सितंबर को नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा (थराली) के मंदिर में उत्सव डोली के विराजमान होने के साथ विधिवत रूप से संपन्न होगी।
बसंत पंचमी के अवसर पर नौटी में श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को मौसमी परिस्थितियों तथा शासन-प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग पर समस्त कार्य पूर्ण न किए जाने का हवाला देते हुए प्रस्तावित 2026 की राजजात यात्रा को 2027 तक स्थगित करने की घोषणा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश सिंह कुंवर द्वारा की गई।
वहीं दूसरी ओर, उसी दिन सिद्धपीठ कुरूड़ में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंदिर में पूजा-अर्चना के पश्चात नंदा देवी के पश्वा को अवतरित किया गया। पश्वा द्वारा स्पष्ट रूप से वर्ष 2026 में ही बड़ी जात यात्रा आयोजित करने का संदेश दिया गया। इसके बाद बधाण, दशोली एवं बंड़ की यात्रा समितियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की डोलियों की तिथियां और मार्गों की औपचारिक घोषणा कर दी।
बधाण की नंदादेवी की डोली का यात्रा कार्यक्रम
बधाण की नंदादेवी की उत्सव डोली, जो बड़ी जात एवं छोटी जात की मुख्य डोली मानी जाती है, 5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरूड़ से सायं 4 बजे रवाना होकर पहले दिन चरबंग में रात्रि विश्राम करेगी।
6 सितंबर को चरबंग से कुंडबगड़ होते हुए मथकोट,
7 सितंबर को मथकोट से धरगांव, सिद्धेश्वर मंदिर होते हुए उस्तोली,
8 सितंबर को उस्तोली से सरपानी, लाखी होते हुए भेटी,
9 सितंबर को भेटी से स्यारी-बंगारी होते हुए थराली के सोलडुंग्री,
10 सितंबर को सोलडुंग्री से केरामेन होते हुए कालरात्रि और सूना,
11 सितंबर को सूना से थराली, राड़ीबगड़ होते हुए चेपड़ो,
12 सितंबर को चेपड़ो से कोठी होते हुए नंदाधाम नंदकेसरी पहुंचेगी।
नंदकेसरी में कुमाऊं सहित विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली नंदादेवी एवं अन्य देवी-देवताओं की डोलियों, छंतोलियों तथा राजछतोलियों का बधाण की नंदादेवी की डोली से भावपूर्ण मिलन होगा।
13 सितंबर को सभी डोलियां नंदकेसरी से पूर्णा, देवाल, इच्छोली, हाट होते हुए फल्दियागांव,
14 सितंबर को फल्दियागांव से कांडेई, लब्बू, ल्वाणी, बगड़ीगाड़ होते हुए मुंदोली,
15 सितंबर को मुंदोली से लोहाजंग, कर्जाबगड़ होते हुए लाटू धाम वांण पहुंचेगी।
यहीं पर कुरूड़ से चली दशोली तथा बंड़ से चली नंदादेवी की डोलियों का बधाण, कुमाऊं एवं अन्य क्षेत्रों से आई डोलियों से मिलन होगा।
16 सितंबर को देवी की डोलियां वांण गांव से लाटू मंदिर पहुंचेंगी, जहां लाटू देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात उनका निशान यात्रा की अगुवाई करेगा। इसके बाद यात्रा रणकाधार होते हुए पहले निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल में रात्रि विश्राम करेगी।
17 सितंबर को गैरोलीपातल से डोलीधार होते हुए वेदनी बुग्याल,
18 सितंबर को वेदनी में सप्तमी की जात के बाद यात्रा पातरनचौनिया,
19 सितंबर को पातरनचौनिया से केलवाविनायक, रूपकुंड, ज्योरागली होते हुए शीलासमुद्र,
20 सितंबर को शीलासमुद्र से पंचगंगा होते हुए दोपहर में होमकुंड पहुंचेगी।
होमकुंड में बड़ी जात की पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के बाद यात्रा वापसी पड़ावों की ओर लौटेगी।
20 सितंबर को रात्रि विश्राम जामुनडाली,
21 सितंबर को जामुनडाली से तातड़ा, ध्यो सिंह धाम होते हुए नंदानगर के सुतोल गांव,
22 सितंबर को सुतोल से कनोल गांव पहुंचेगी।
यहां से दशोली, बंड़ एवं कुमाऊं की डोलियां और छंतोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ एवं नंदानगर के लिए प्रस्थान करेंगी, जबकि बधाण की डोली पुनः वांण लौटेगी।
23 सितंबर को वांण से कुलिंग,
24 सितंबर को कुलिंग से ल्वाणी,
25 सितंबर को ल्वाणी से उलंग्रा,
26 सितंबर को उलंग्रा से बेराधार,
27 सितंबर को बेराधार से गोठिंड़ा,
28 सितंबर को गोठिंड़ा से कुराड़,
29 सितंबर को कुराड़ से डाखोली और
30 सितंबर को डाखोली से भेटा होते हुए नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा, थराली के मंदिर के गर्भगृह में छह माह के लिए विराजमान होंगी।
इस यात्रा कार्यक्रम की जानकारी बधाण यात्रा समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़ ने दी।
परगना दशोली की नंदा डोली
परगना दशोली की नंदा डोली 5 सितंबर को सायं 4 बजे कुरूड़ से रवाना होकर धरगांव होते हुए कुमजुम में रात्रि विश्राम करेगी।
6 सितंबर को कुमजुम से कुंडबगड़, लुणतरा,
7 सितंबर को लुणतरा से माणखी,
8 सितंबर को माणखी से कांडेई,
9 सितंबर को कांडेई से सेमा,
10 सितंबर को सेमा से पगना,
11 सितंबर को पगना से ल्वाणी,
12 सितंबर को ल्वाणी से रामणी,
13 सितंबर को रामणी से आला,
14 सितंबर को आला से कनोल,
15 सितंबर को कनोल से वांण पहुंचकर बधाण की नंदा डोली से मिलन के पश्चात होमकुंड की यात्रा में सम्मिलित होगी।
यह यात्रा कार्यक्रम मंदिर समिति अध्यक्ष सुखवीर रौतेला, उपाध्यक्ष कृपाल बिष्ट एवं सचिव हर्षवर्धन बिष्ट द्वारा जारी किया गया है।
बंड़ की नंदा देवी की डोली
बंड़ की नंदा देवी की डोली 5 सितंबर को कुरूड़ मंदिर से सायं 4 बजे रवाना होकर मैठाणा में रात्रि विश्राम करेगी।
6 सितंबर को मैठाणा से चमोली, क्षेत्रपाल होते हुए बटुला,
7 सितंबर को बटुला से दिगोली,
8 सितंबर को दिगोली से नोरख,
9 सितंबर को नोरख से कम्यार,
10 सितंबर को कम्यार से किरोली,
11 सितंबर को किरोली से गौणा,
12 सितंबर को गौणा से रामणी पहुंचेगी, जहां दशोली की डोली से देवी का मिलन होगा। इसके बाद दोनों डोलियां वांण के लिए प्रस्थान करेंगी।
इस यात्रा कार्यक्रम को बंड़ यात्रा समिति के अध्यक्ष अशोक गौड़ एवं कोषाध्यक्ष शिव प्रसाद गौड़ ने जारी किया है।
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बसंत पंचमी के दिन सिद्धपीठ कुरूड़ में देवी को एक चौसिंगा मैड़ा भी चढ़ाया गया। बताया गया कि यह चौसिंगा मैड़ा नंदानगर क्षेत्र के सूंग गांव में जन्मा था, जिसे विधि-विधान के साथ नंदादेवी को अर्पित किया गया।

