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बधाण की नंदा देवी की डोली करेगी राज जात 2026 की आगवानी

— हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट

थराली, 3 नवंबर। 2026 में आयोजित होने वाली श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को पारंपरिक एवं विधि-विधान से संपन्न किए जाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है। इस अवसर पर नंदकेशरी से बधाण की नंदा देवी के डोले द्वारा यात्रा की अगवानी किए जाने और कुरूड़ से प्रतिवर्ष आयोजित नंदा लोकजात यात्रा के सभी पड़ावों को राजजात यात्रा में सम्मिलित किए जाने सहित कुल नौ प्रस्ताव पारित किए गए।

नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा, थराली में राजजात समिति के अध्यक्ष प्रो. राजेश कुंवर की अध्यक्षता में परगना चांदपुर, बधाण एवं नंदाक क्षेत्र के नागरिकों, चौदह सयानों और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़ ने प्रस्ताव रखा कि नंदा लोकजात यात्रा के सभी पड़ावों को नंदा राजजात यात्रा के मानचित्र में प्रदर्शित किया जाए तथा इन स्थलों पर आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नंदकेशरी से आगे की यात्रा की अगवानी बधाण की नंदा देवी का डोला करेगा, जबकि लाटू धाम वांण से आगे की अगवानी लाटू देवता के निशान द्वारा की जाएगी। इस दौरान गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों के राजवंशों के परिजन विधिवत रूप से यात्रा में सम्मिलित होंगे।

गढ़वाल एवं कुमाऊं से यात्रा में शामिल होने वाली त्यौरियों और निशानों को संस्कृति विभाग से पंजीकृत करने का भी प्रस्ताव रखा गया। इसके साथ ही सिद्धपीठ देवराड़ा और कुरूड़ मंदिरों के सौंदर्यीकरण, वहां आवासीय व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर भी बल दिया गया।

बैठक में यह भी तय किया गया कि राजजात समिति चमोली में बधाण, नंदाक और दशोली आदि मंदिर समितियों को शामिल किया जाए। थराली के सोल क्षेत्र में त्रयोदशी का एक अतिरिक्त पड़ाव बूंगा गांव में बनाए जाने तथा यात्रा की तैयारियों के लिए सरकार से टोकन मनी तत्काल जारी करने का भी प्रस्ताव पारित हुआ।

सदस्यों ने कहा कि राजजात 2026 की तैयारियों के लिए अब केवल 270 दिन शेष हैं, इसलिए शासन-प्रशासन को युद्ध स्तर पर कार्य आरंभ कर देना चाहिए। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि बैठक में पारित सभी प्रस्तावों की प्रतिलिपि जिला प्रशासन, उत्तराखंड शासन, सांसदों एवं विधायकों को भेजी जाएगी।

बैठक में नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ एवं देवराड़ा को राज्य के पर्यटन मानचित्र में दर्शाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि नंदा देवी राजजात समिति सर्वोच्च समिति है, इसलिए शासन एवं प्रशासन को इसके प्रस्तावों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

बैठक में समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल, कोषाध्यक्ष सुशील रावत, सदस्य डीडी कुनियाल, महानंद मैठाणी, पृथ्वी सिंह रावत, देवराड़ा मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन हटवाल, सहसचिव चरण सिंह रावत, कोषाध्यक्ष मोहन प्रसाद देवराड़ी, मनसा राम गौड़, त्रिलोक सिंह रावत, नरेन्द्र सिंह भंडारी, गोविंद सिंह भंडारी, बृजमोहन सिंह नेगी, लाटू मंदिर वांण के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट, गजपाल सिंह भंडारी, मनमोहन सिंह, पुजारी योगेश गौड़, पदमा देवी, जानकी देवी, हेमा देवी, गीता देवी, जयंती देवी, अनसूया प्रसाद सती, प्रेम फर्स्वाण, प्रेमशंकर रावत एवं भुवन विक्रम रावत सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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