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शनि के चंद्रमा के नीचे छिपा महासागर: अब मिले जटिल जैविक अणु

Researchers dove deep into information gathered from the ice grains that were collected during a close and super-fast flyby through a plume of Saturn’s icy moon. A new analysis of data from NASA’s Cassini mission found evidence of previously undetected organic compounds in a plume of ice particles ejected from the ocean that lies under the frozen shell of Saturn’s moon Enceladus. Researchers spotted not only molecules they’ve found before but also new ones that lay a potential path to chemical or biochemical activity.

NASA’s Cassini spacecraft captured dramatic plumes, both large and small, spray water ice out from many locations along the famed ‘tiger stripes’ near the south pole of Saturn’s moon Enceladus.

 

-BY-JYOTI RAWAT-

शोधकर्ताओं ने शनि के बर्फीले चंद्रमा एनसेलाडस के प्ल्यूम (फव्वारे) से बेहद तेज़ी से गुज़रते हुए एक निकट flyby के दौरान इकट्ठा किए गए बर्फ के कणों की गहराई से जांच की।

नासा के कैसिनी मिशन के डेटा के एक नए विश्लेषण में एनसेलाडस के जमे हुए खोल के नीचे मौजूद महासागर से निकले बर्फ के कणों के प्ल्यूम में पहले पता न चले जैविक यौगिकों (organic compounds) के सबूत मिले हैं। शोधकर्ताओं ने न सिर्फ पहले से ज्ञात अणु पाए बल्कि कुछ नए अणु भी खोजे जो रासायनिक या जैवरासायनिक गतिविधि की संभावना की ओर इशारा करते हैं।

जांच किए गए बर्फ के कण चंद्रमा की सतह से महज़ 13 मील (21 किलोमीटर) दूर से एकत्र किए गए थे। यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने एनसेलाडस के सबसरफेस जल से ताज़ा निकले कणों में जैविक यौगिकों की इतनी विविधता देखी है। बुधवार को नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित यह निष्कर्ष चंद्रमा की सतह के नीचे सक्रिय जैविक रसायन विज्ञान (organic chemistry) की पुष्टि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह की रासायनिक गतिविधि उन यौगिकों को सहारा दे सकती है जो पृथ्वी पर जैविक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं और जीवन का आवश्यक हिस्सा हैं।

पहले पाए गए जैविक यौगिकों की विविधता बढ़ाने के अलावा, इस नए अध्ययन ने कैसिनी अंतरिक्ष यान द्वारा प्ल्यूम के सीधे बीच से गुज़रते हुए एकत्र किए गए कणों का विश्लेषण करके पिछले निष्कर्षों में एक नया आयाम जोड़ा — यह चंद्रमा के महासागर में सीधे डुबकी लगाने के सबसे करीब का विकल्प था।

बर्लिन की फ्राई यूनिवर्सिटी के प्रमुख लेखक नोज़ैर ख्वाजा ने कहा, “पहले हमने ऐसे बर्फ के कणों में जैविक यौगिक पाए थे जो वर्षों पुराने थे और आसपास के तीव्र विकिरण वातावरण से संभवतः बदल चुके थे। लेकिन ये नए जैविक यौगिक महज़ कुछ मिनट पुराने थे, जो एनसेलाडस की सतह के नीचे के महासागर से ताज़ा निकले बर्फ में मिले।”

पिछले कैसिनी डेटा से वैज्ञानिकों को पता था कि शनि के ई-रिंग (एक हल्की, चौड़ी बाहरी वलय) के कणों में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन युक्त जैविक यौगिक मौजूद हैं, जो एनसेलाडस के प्ल्यूम से निकलने वाली बर्फीली सामग्री से बनती है। लेकिन नए शोध में सीधे चंद्रमा के प्ल्यूम से आए बर्फ के कणों का विश्लेषण किया गया — यानी वे कण जो अपने सबसरफेस स्रोत के सबसे करीब थे।

सह-लेखक फ्रैंक पोस्टबर्ग (फ्राई यूनिवर्सिटी बर्लिन) ने कहा, “ताज़ा निकले इस पदार्थ में हमें जो जटिल जैविक अणु मिले, वे साबित करते हैं कि शनि के ई-रिंग में कैसिनी द्वारा पता किए गए जटिल जैविक अणु अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने का परिणाम नहीं हैं, बल्कि एनसेलाडस के महासागर में आसानी से उपलब्ध हैं।”

तेज़ और फलदायी

यह डेटा 2008 में एकत्र किया गया था जब बर्फ के कण कैसिनी के कॉस्मिक डस्ट एनालाइज़र उपकरण से टकराए थे। ये कण न सिर्फ सीधे प्ल्यूम से आए थे बल्कि इनके पास एक और खासियत थी — अंतरिक्ष यान 11 मील प्रति सेकंड (चंद्रमा के सापेक्ष लगभग 18 किमी/सेकंड) की रफ्तार से गुज़रा था, जिससे टक्कर के दौरान ये कण चूर-चूर हो गए।

टक्कर की ऊर्जा ने बर्फ के कणों को वाष्पीकृत कर दिया और उनमें से एक बड़ा हिस्सा आयनित (ionized) हो गया। इन आयनों को उपकरण के मास स्पेक्ट्रोमीटर ने विश्लेषित किया और उनकी रासायनिक संरचना जांची।

लेखकों ने एक मिलीमीटर के हज़ारवें हिस्से से भी छोटे टुकड़ों — फ्लू वायरस से भी छोटे — का विश्लेषण किया और प्ल्यूम के कणों में पहले कभी न देखे गए जैविक यौगिकों की पहचान की।

नए पता चले यौगिकों में एलिफैटिक और साइक्लिक एस्टर तथा ईथर परिवार के यौगिक शामिल हैं, जिनमें से कुछ में दोहरे बंधन भी हैं। पहले से पुष्टि हो चुके एरोमैटिक, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन युक्त यौगिकों के साथ मिलकर ये यौगिक उन बिल्डिंग ब्लॉक्स का निर्माण कर सकते हैं जो जटिल जैविक रसायन विज्ञान को जन्म दे सकते हैं — वही रसायन जो एस्ट्रोबायोलॉजी के लिए रोचक हैं और सौर मंडल में जीवन की खोज को केंद्रित करते हैं।

प्ल्यूम से गुज़रने के बाद, दक्षिणी कैलिफोर्निया में नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी द्वारा प्रबंधित यह अंतरिक्ष यान लगभग एक दशक तक शनि प्रणाली की खोज करता रहा।

कैसिनी के बारे में अधिक जानकारी कैसिनी-ह्यूजेंस मिशन नासा, ईएसए (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी) और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी का संयुक्त प्रोजेक्ट था। पासाडेना में कैलटेक की एक इकाई जेपीएल ने वाशिंगटन में नासा के स्पेस मिशन डायरेक्टोरेट के लिए मिशन का प्रबंधन किया तथा कैसिनी ऑर्बिटर को डिज़ाइन, विकसित और असेंबल किया।

कैसिनी के बारे में अधिक जानने के लिए देखें: https://science.nasa.gov/mission/cassini/

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