एनसीसी कैडेट्स ने सीखा— ड्रम और बोतलों से कैसे बनाई जाती है राफ्ट
कैडेट्स को दिए बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों के व्यावहारिक प्रशिक्षण

देहरादून, 11 अक्टूबर। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा संचालित युवा आपदा मित्र परियोजना के अंतर्गत एनसीसी कैडेट्स के लिए चल रहे सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों की तकनीकी जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के द्वितीय सत्र में एनडीआरएफ (NDRF) के इंस्पेक्टर दीपक ने कैडेट्स को बाढ़ से संबंधित खतरों, उनसे बचाव के उपायों और आपातकालीन स्थिति में किए जाने वाले प्राथमिक कदमों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने सीमित संसाधनों में स्थानीय सामग्री— जैसे प्लास्टिक की बोतलें, बांस, रस्सी और ड्रम— से इम्प्रोवाइज्ड फ्लोटेशन डिवाइसेज़ (तैरने वाले उपकरण) बनाने की विधि सिखाई। एनडीआरएफ टीम ने इन उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया, जिससे कैडेट्स ने रेस्क्यू तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और सीखा।
कैडेट्स ने प्रशिक्षण के दौरान केरोसिन टिन राफ्ट, चारपाई राफ्ट, बांस राफ्ट, बैरल राफ्ट, केले के वृक्ष की राफ्ट, ट्यूब राफ्ट, प्लास्टिक बोतल राफ्ट, और थर्मोकोल लाइफ जैकेट बनाने की विधियां सीखी। इसके अलावा, उन्होंने पानी में डूब रहे व्यक्ति को बचाने की विभिन्न तकनीकें— रीच विधि, थ्रो विधि, वेड विधि, वेट रेस्क्यू और कांटेक्ट टो रेस्क्यू— का अभ्यास भी किया।
पहले सत्र में मास्टर ट्रेनर मनोज कंडियाल ने कैडेट्स को आपदा प्रबंधन की मूल अवधारणाओं से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि आपदा केवल एक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानसिक प्रभावों से जुड़ी स्थिति होती है। उन्होंने आपदाओं के प्रकार, उनकी गंभीरता, युवाओं की भूमिका और त्वरित राहत कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सजग, सक्षम और उत्तरदायी नागरिक के रूप में तैयार करना है, ताकि वे आपदा की स्थिति में न केवल स्वयं की रक्षा कर सकें, बल्कि दूसरों की भी मदद कर सकें और समुदाय में जन-जागरूकता फैलाकर आपदा जोखिम को कम करने में योगदान दे सकें।
