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थल सेना की पश्चिमी, पूर्वी, दक्षिणी कमानों के नए कमांडरों ने संभाली कमान, धीरज सेठ नए सेना उप प्रमुख

The Indian Army today gave a new shape to its command structure with four extremely important appointments. Lieutenant General Pushpendra Pal Singh has taken over the Western Command, Lieutenant General V.M.B. Krishnan has assumed charge of the Eastern Command, and Lieutenant General Sandeep Jain has taken over the Southern Command. Along with this, Lieutenant General Dheeraj Seth has assumed the charge of Vice Chief of Army Staff (VCOAS). These changes have taken place in place of senior officers who retired on 31 March 2026 and send a strong signal towards the Indian Army’s combat preparedness, border security, and modernization.

नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026। भारतीय थल सेना ने आज चार अत्यंत महत्वपूर्ण नियुक्तियों के साथ अपनी कमान व्यवस्था को नया स्वरूप दिया है। लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह ने पश्चिमी कमान, लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान और लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने दक्षिणी कमान की कमान संभाल ली है। साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सेना उप प्रमुख (वीसीओएएस) का पदभार ग्रहण कर लिया है। ये बदलाव 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए वरिष्ठ अधिकारियों के स्थान पर हुए हैं और भारतीय सेना की युद्धक तैयारियों, सीमा सुरक्षा तथा आधुनिकीकरण की दिशा में मजबूत संकेत देते हैं।

पश्चिमी कमान की बागडोर संभाली लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह

लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह ने आज पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का कार्यभार ग्रहण किया। वे लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार का स्थान ले रहे हैं, जो कल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के अनुभवी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल सिंह दिसंबर 1987 में चौथी बटालियन में कमीशन प्राप्त हुए थे। वे भारतीय सैन्य अकादमी और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं तथा पंजाब यूनिवर्सिटी से फिलॉसफी में मास्टर डिग्री प्राप्त कर चुके हैं।

लगभग चार दशकों के सैन्य करियर में उन्होंने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों तथा संवेदनशील ऑपरेशनल सेक्टरों में टुकड़ियों का सफल नेतृत्व किया। उनके अनुभव में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, लाइन ऑफ कंट्रोल और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर कई आतंकवाद रोधी अभियान शामिल हैं। वीसीओएएस बनने से पहले वे सेना मुख्यालय में डायरेक्टर जनरल ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स (डीजीओएल) रहे, जहां उन्होंने ऑपरेशनल मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स इंटीग्रेशन और सस्टेनमेंट क्षमताओं को मजबूत किया।

कमान संभालते हुए लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने उच्च ऑपरेशनल तत्परता, नवाचार, सभी रैंकों के कल्याण और मनोबल को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी कमान बहु-डोमेन ऑपरेशनों, ड्रोन-काउंटर ड्रोन प्रणालियों, खुफिया आधारित अभियानों और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान देगी। असैन्य प्रशासन के साथ समन्वय भी जारी रहेगा।

पूर्वी कमान की कमान लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन को सौंपी गई

लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी का स्थान लिया, जो 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 11 जून 1988 को कमीशन प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन अपने साथ चार दशकों का समृद्ध अनुभव लेकर आए हैं। उन्होंने सियाचिन के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में इन्फैंट्री बटालियन और ब्रिगेड की कमान संभाली, इन्फैंट्री डिवीजन और ब्रह्मास्त्र कोर का नेतृत्व किया।

रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी महानिदेशक और लंदन में रक्षा अटैची रह चुके जनरल ने क्वार्टर मास्टर जनरल के रूप में आपूर्ति श्रृंखला और बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी सुधार किए। वे डोगरा रेजिमेंट और डोगरा स्काउट्स के कर्नल भी हैं तथा काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वॉरफेयर स्कूल के कमांडेंट के रूप में विशेष प्रशिक्षण मानदंड स्थापित कर चुके हैं।

कमान संभालते समय उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और पूर्वी क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संयुक्तता, तकनीकी एकीकरण तथा सभी हितधारकों के साथ तालमेल पर जोर दिया।

दक्षिणी कमान की जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन के कंधों पर

लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने 1 अप्रैल 2026 को दक्षिणी कमान के जीओसी-इन-सी का कार्यभार संभाला। वे लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का स्थान ले रहे हैं, जिन्हें आज वीसीओएएस बनाया गया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र और जून 1988 में महार रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल जैन ने अर्ध-विकसित क्षेत्रों, दक्षिण सूडान व इथियोपिया के संयुक्त राष्ट्र मिशनों, स्ट्राइक कोर, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स और उत्तरी कमान के पिवट कोर की कमान संभाली है। उनके अनुभव में ऑपरेशन पवन, नियंत्रण रेखा और उत्तर-पूर्व के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियान शामिल हैं।

दक्षिणी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ रहते हुए उन्होंने क्षमता विकास और बल पुनर्गठन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कमान संभालते हुए उन्होंने दक्षिणी कमान युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और रेगिस्तान, रण, क्रीक, तट, द्वीप तथा भीतरी क्षेत्रों में संचालन तत्परता बनाए रखने का संकल्प लिया। स्वदेशी क्षमता विकास, जेएआई ढांचे के तहत प्रौद्योगिकी आत्मसात और संयुक्तता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ बने सेना उप प्रमुख

इन नियुक्तियों की श्रृंखला में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ (पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम) ने आज सेना उप प्रमुख का पदभार ग्रहण किया। दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में ब्रिगेड, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी बल, सुदर्शन चक्र कोर, दिल्ली क्षेत्र और दक्षिण पश्चिमी व दक्षिणी कमान की कमान संभाली। पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड का नेतृत्व करने का दुर्लभ गौरव उनके नाम है।

वे सामरिक योजना, क्षमता विकास और आधुनिकीकरण रोडमैप के प्रमुख योगदानकर्ता रहे हैं। जूनियर कमांड कोर्स में प्रथम स्थान और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में सर्वश्रेष्ठ छात्र अधिकारी पदक समेत उन्होंने कई प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

ये नियुक्तियां भारतीय सेना की निरंतरता, युद्धक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं। नए कमांडरों के नेतृत्व में थल सेना आधुनिक चुनौतियों—बहु-डोमेन युद्ध, ड्रोन तकनीक, खुफिया अभियानों और संयुक्तता—के अनुरूप अपनी तैयारियों को और सशक्त बनाएगी।

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