नये सेना नियम: शीर्ष अधिकारियों के लिए भी शारीरिक परीक्षण अनिवार्य
नई व्यवस्था अग्निवीरों से लेकर तीन-स्टार कमांडरों तक सभी पर लागू होगी, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी।
नयी दिल्ली, 9 अक्टूबर। भारतीय सेना ने अपनी शारीरिक फिटनेस संबंधी नियमों में बड़ा बदलाव किया है ताकि रैंकों में युद्ध तत्परता (War Readiness) को और मजबूत किया जा सके। नई दिशानिर्देशों के अनुसार अब सेना के शीर्ष अधिकारी भी शारीरिक परीक्षण से मुक्त नहीं रहेंगे। उन्हें भी वर्ष में दो बार आयोजित होने वाले संयुक्त शारीरिक परीक्षण (Combined Physical Test) को पास करना अनिवार्य होगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
अब तक सेना में 50 वर्ष की आयु तक के अधिकारियों और सैनिकों को हर वर्ष दो अलग-अलग परीक्षण — बैटल फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (BPET) और फिजिकल प्रोफिशिएंसी टेस्ट (PPT) — पास करने होते थे। सबसे वरिष्ठ अधिकारी इनसे मुक्त थे। लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत परीक्षण की आयु सीमा 60 वर्ष तक बढ़ा दी गई है। इसका अर्थ है कि नई व्यवस्था अग्निवीरों से लेकर तीन-स्टार जनरल रैंक तक के सभी अधिकारियों पर लागू होगी।
सेना के 3 अक्टूबर के एक पत्र में कहा गया है —
> “शारीरिक फिटनेस सैनिकों के लिए सर्वोपरि है ताकि वे सैन्य प्रशिक्षण की कठोरताओं और बहु-क्षेत्रीय अभियानों (multi-domain operations) की मांगों को सह सकें। ताकत, सहनशक्ति और फुर्ती युद्ध तत्परता की कुंजी हैं। एक फिट सैनिक न केवल सक्षम और विश्वसनीय होता है बल्कि अपनी इकाई की सफलता में निर्णायक योगदान देता है। सभी स्तरों के कमांडर अपनी टीम के लिए रोल मॉडल होने चाहिए और उन्हें हर स्थिति में अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व करने में सक्षम होना चाहिए।”
पत्र के अनुसार, संयुक्त शारीरिक परीक्षण मौजूदा परीक्षणों की गहन समीक्षा, इन-हाउस अध्ययनों और विदेशी सेनाओं में अपनाए गए मानकों का परिणाम है। BPET और PPT के दिशानिर्देशों को मिलाकर विभिन्न आयु वर्गों और लिंग के लिए नई संयुक्त तालिकाएं तैयार की गई हैं, जिनमें अपेक्षित मानक और रेटिंग प्रणाली निर्धारित की गई है।
50 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लिए परीक्षणों में 3.2 किलोमीटर की तेज चाल के साथ आयु के अनुसार तय संख्या में सिट-अप्स और पुश-अप्स शामिल होंगे। भारतीय सेना में अधिकारी प्रायः 50 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते दो-स्टार मेजर जनरल रैंक प्राप्त कर लेते हैं।
पत्र में कहा गया है कि आधुनिक युद्ध के डिजिटलीकरण के बावजूद “मानवीय तत्व” अब भी सैन्य अभियानों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। 35 से 50 वर्ष आयु वर्ग के लिए मानक में 3.2 किलोमीटर की दौड़, पुश-अप्स और सिट-अप्स शामिल हैं, जबकि 45 वर्ष से कम आयु वालों को रस्सी चढ़ने की क्षमता का परीक्षण भी देना होगा। ये नए मानक पूर्व BPET और PPT के बीच संतुलन बनाते हैं। पहले BPET में युद्ध पोशाक में 4.5 किलोग्राम के भार के साथ 5 किलोमीटर दौड़ शामिल थी, जबकि PPT में 2.4 किलोमीटर की दौड़ ली जाती थी।
नई व्यवस्था के तहत हर सैनिक या अधिकारी को कम-से-कम ‘संतोषजनक’ ग्रेडिंग में परीक्षण पास करना होगा। असफल होने वालों को सुधार का अवसर दिया जाएगा, अन्यथा उनकी करियर प्रगति प्रभावित हो सकती है।
संयुक्त शारीरिक परीक्षणों से परीक्षणों की संख्या में कमी आएगी और समय व प्रयास दोनों की बचत होगी। पहले BPET और PPT को मिलाकर वर्ष में आठ बार परीक्षण आयोजित होते थे, जबकि अब संयुक्त परीक्षण केवल दो बार होंगे।
पत्र में कहा गया है —
> “यह बदलाव सुनिश्चित करेगा कि परीक्षण प्रक्रियाएं अधिक प्रासंगिक, व्यावहारिक और समावेशी हों। इससे सैनिकों को खेल, शौक या अन्य एडवेंचर गतिविधियों के लिए अधिक समय मिलेगा।”
पूर्व महानिदेशक (मिलिट्री ऑपरेशंस) लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (रिटायर्ड) ने कहा कि नई व्यवस्था “एक स्वागतयोग्य कदम” है। उनके अनुसार,
> “केवल मानसिक और शारीरिक रूप से फिट कमांडर ही अपने सैनिकों को युद्ध में ले जा सकते हैं और अपेक्षित उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं।”
सेना अधिकारियों का कहना है कि इन नए नियमों को सेना भर में फिटनेस स्तर सुधारने के लिए की गई आंतरिक सिफारिशों की लंबी प्रक्रिया के बाद लागू किया गया है।
